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सैयद सुहैल का शो: अमेरिका-हूती के बीच सीक्रेट डील का दावा, लाल सागर में जहाजों पर हमले रोकने पर बनी सहमति?

अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच एक सीक्रेट डील की चर्चा ने पश्चिम एशिया की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है.

क्या अमेरिका ने हूतियों से कर ली है सीक्रेट डील?
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अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच एक सीक्रेट डील होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के तहत हूती लड़ाकों ने भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे. बताया जा रहा है कि ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिकी अधिकारियों और हूती नेताओं के बीच हुई बातचीत में इस पर सहमति बनी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हूतियों के साथ सीधे संपर्क की बात स्वीकार करने के बाद इस डील की चर्चा और तेज हो गई.

अमेरिका-हूती सीक्रेट डील का दावा

इसके बदले में अमेरिका कथित तौर पर यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य सहायता नहीं देगा. अधिकारियों का कहना है कि 2025 में अमेरिका और हूतियों के बीच हुआ सीजफायर अब भी कायम है और वॉशिंगटन इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से बचना चाहता है.

सऊदी को अब भी निशाना बनाएंगे हूती

हालांकि हूतियों ने साफ कहा है कि यह समझौता सऊदी अरब पर लागू नहीं होता. उनका कहना है कि वे सऊदी जहाजों और सऊदी का तेल ले जाने वाले जहाजों को पहले की तरह निशाना बनाते रहेंगे. हूतियों का दावा है कि यमन में सऊदी सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी की वजह से उन्हें ऐसा करने का अधिकार है.

इस बीच हूती विद्रोहियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के किनारे कई रणनीतिक इलाकों और द्वीपों पर कब्जा मजबूत कर लिया है. बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के समुद्री रास्तों पर बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि सऊदी अरब के मिसाइल इंटरसेप्टर तेजी से कम हो रहे हैं और उसने सहयोगी देशों से अतिरिक्त मदद मांगी है.

पाकिस्तान ने भी मदद से किया इनकार?

दूसरी ओर ऐसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं कि पाकिस्तान ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है. अमेरिका और ब्रिटेन भी सऊदी के समर्थन में प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए हुए हैं. ऐसे में सऊदी अरब पर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है.

हूतियों और सऊदी अरब के बीच टकराव लगातार तेज हो रहा है. सऊदी अरब ने हाल ही में मक्का की ओर ड्रोन हमले की कोशिश का आरोप लगाया था, जबकि हूतियों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे 'सदी का सबसे बड़ा झूठ' बताया. दोनों पक्षों के दावों और जवाबी दावों के बीच यमन का संकट एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

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