- यूक्रेन ड्रोन फोर्स के सैनिक बहुत सीक्रेट जिंदगी जी रहें, घर वालों को भी नहीं बता सकते कि वे किस टीम में हैं
- इन सैनिकों के नाम और उनकी उम्र गुप्त रखी जाती है. उनके चेहरे को छिपाए बिना उनकी फोटो या वीडियो लेना नामुमकिन
- न्हें हर चीज नकद खरीदनी होती है. पैसे निकालने के लिए हर बार ATM भी बदलना होता है
आप बस कल्पना कीजिए कि आपको अपने ही परिवार से अपनी असली पहचान छिपानी पड़े. आपकी पत्नी को न पता हो कि आप क्या करते हैं, बच्चे यह भी न जानते हों कि पापा हर दिन किस खतरे का सामना करते हैं. आपके लिए मोबाइल पर एक साधारण बातचीत भी जान का जोखिम बन जाए. आपको ATM कार्ड या ऑनलाइन पे की जगह कुछ भी खरीदने के लिए सिर्फ कैश का इस्तेमाल करने पड़ें और हर पल ऐसा लगे कि दुश्मन आपकी तलाश में है... यही जिंदगी जी रहे हैं यूक्रेन के वे सीक्रेट ड्रोन सैनिक, जिन्होंने रूसी सेना और व्लादिमीरी पुतिन को दहला दिया है. तेल बेचने वाला रूस आज तेल खरीदने को मजबूर है. लेकिन यूक्रेन के इन योद्धाओं को हर सफल मिशन के बदले अपनी जिंदगी अंधेरे और गुमनामी में बितानी पड़ रही है.
चलिए आज उन्हीं की कहानी सुनाते हैं.
"हम हर समय रूस के टारगेट पर हैं"
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन आर्मी के जांबाज डेनिस (बदला हुआ नाम) 2025 से रूस के खिलाफ इन ड्रोन हमलों में हिस्सा ले रहे हैं. लेकिन उनकी यूनिट के बहुत सख्त नियमों की वजह से उनके दोस्तों और यहां तक कि माता-पिता को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. वह टॉप-सीक्रेट टीम के एक मेंबर हैं. उन्होंने कहा, "हमें लोगों का ध्यान अपनी ओर नहीं खींचना होता, डींगें नहीं मारनी होती. आप कभी भी इस बारे में बात नहीं कर पाओगे कि आपने क्या किया है, यहां तक कि युद्ध खत्म होने के बाद भी नहीं."

सीक्रेट लाइफ जीते हैं यूक्रेन की ड्रोन फोर्स के जवान (यह सीक्रेट टीम की फोटो नहीं )
डेनिस पूर्व मरीन हैं और वह यूक्रेन की ड्रोन फोर्स के सेंटर नंबर 1 में काम करते हैं. उनकी यूनिट ने रूस पर बड़े हमले किए हैं, जिनमें मॉस्को की एक ऑयल रिफाइनरी पर जून में किया गया हमला भी शामिल है, जिससे रूसी राजधानी के ऊपर घना काला धुआं फैल गया था. इसके अलावा, सेंट पीटर्सबर्ग में एक अहम इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस शुरू होने के दौरान भी इस टीम ने वहां हमला किया था.
परिवार और दुनिया से पूरी तरह कटे हैं यह जवान
इस यूनिट के सैनिकों के नाम और उनकी उम्र गुप्त रखी जाती है. उनके चेहरे को छिपाए बिना उनकी फोटो या वीडियो लेना नामुमकिन है. इन सैनिकों को आपस में कोडनेम भी मिला हुआ है और वे इन्हीं नामों का इस्तेमाल करते हैं. वोरोन नाम के एक सैनिक ने AFP से कहा कि रूस डीप-स्ट्राइक ग्रुप' (दुश्मन के इलाके में दूर तक जाकर हमला करने वाले ग्रुप) को ढूंढ निकालने के लिए हर मुमकिन कोशिश करता है. वोरोन कभी एक ऐसी यूनिट का हिस्सा थे जो यूक्रेन के लिए यही काम करती थी- यानी रूस की लंबी दूरी के ड्रोन टीमों को ढूंढना और उन पर हमला करना. हमले से पहले, वह एक पेंटर और मार्शल आर्ट्स ट्रेनर थे.
शादीशुदा और एक बच्चे के पिता होने के नाते, उन्हें लगता है कि उनकी पत्नी को शक है कि वह क्या करते हैं- लेकिन वह सवाल नहीं पूछती. सोशल मीडिया पर, वोरोन अपनी पुरानी आर्मी यूनिट के पेज पर पोस्ट करते हैं और यूनिट के निशान (इंसिग्निया) वाली तस्वीरें शेयर करते हैं- ताकि लोगों को लगे कि वह अभी भी वहीं काम करते हैं. "मेरे सभी रिश्तेदार और दोस्त यही सोचते हैं कि मैं अभी भी स्पेशल फोर्स में हूं."
वोरोन ने कहा कि लोग हमें कैमोफ्लाज पहने कमांडो के तौर पर देखते हैं, लेकिन असल में हम शर्ट और जींस पहनकर घूमते हैं. पब्लिक प्लेस पर मिशन के बारे में कोई बात नहीं होती और "टेकऑफ" या "विंग" जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी मना है. उन्हें हर चीज नकद खरीदनी होती है. पैसे निकालने के लिए हर बार ATM भी बदलना होता है. यहां तक कि उन्हें पेट्रोल स्टेशन के लॉयल्टी प्रोग्राम (बार-बार एक पेट्रोल पंस से खरीदने वाला ऑफर) में शामिल होने की भी मनाही है.
मिलिट्री कम्युनिकेशन के लिए उनके पास खास एन्क्रिप्टेड फोन होते हैं और उनकी लोकेशन बताने वाली किसी भी डिवाइस का इस्तेमाल पूरी तरह मना है. अगर जानकारी लीक होने का शक हो या नए लोगों को परखना हो, तो लाई डिटेक्टर का भी इस्तेमाल किया जाता है.
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