- प्लैनेट लैब्स ने ईरान और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की सैटेलाइट तस्वीरों की रिलीज पर रोक लगाई
- प्लैनेट लैब्स ने केवल नई तस्वीरों पर नहीं बल्कि नौ मार्च तक की पुरानी तस्वीरों को भी जारी करने से मना किया है
- यह प्रतिबंध सुरक्षा कारणों और तस्वीरों के दुश्मन द्वारा हमले के लिए इस्तेमाल की आशंका के चलते लगाया गया है
ईरान के साथ जंग के बीच अब अमेरिका ने सैटेलाइट्स तस्वीरों पर भी पहरा लगा दिया है. दुनिया की बड़ी सैटेलाइट इमेजरी कंपनी 'प्लैनेट लैब्स' ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि वह अब ईरान और इस जंग के तमाम इलाकों की तस्वीरें जारी नहीं करेगा. कंपनी ने साफ किया है कि यह पाबंदी अमेरिकी सरकार की गुजारिश पर लगाई गई है और यह तब तक जारी रहेगी जब तक जंग खत्म नहीं हो जाता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, कैलिफोर्निया स्थित इस कंपनी ने अपने ग्राहकों को भेजे ईमेल में बताया कि अमेरिकी प्रशासन ने सभी सैटेलाइट इमेजरी प्रोवाइडर्स से अपील की है कि वे जंग वाले इलाकों की तस्वीरें रोक दें. यह कदम पिछले महीने लगाई गई 14 दिनों की पाबंदी का ही विस्तार है. प्लैनेट लैब्स का मानना है कि इन तस्वीरों का इस्तेमाल दुश्मन देश अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हमला करने के लिए कर सकते हैं.
जंग की पुरानी तस्वीरों पर भी लगी रोक
प्लैनेट लैब्स ने सिर्फ नई तस्वीरों पर ही नहीं, बल्कि पुरानी यादों पर भी रोक लगा दिया है. कंपनी ने साफ कहा है कि वह 9 मार्च तक की तस्वीरों को भी पब्लिक या क्लाइंट्स के लिए जारी नहीं करेगी. कंपनी का कहना है कि ये हालात 'असाधारण' हैं और उन्हें तमाम सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखकर यह कड़वा फैसला लेना पड़ रहा है.
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जासूसी और सामरिक सुरक्षा का पेचीदा मसला
मिलिट्री के नजरिए से देखा जाए तो सैटेलाइट तस्वीरें किसी हथियार से कम नहीं होतीं हैं. इनका इस्तेमाल टारगेट की पहचान करने, मिसाइलों को रास्ता दिखाने और दुश्मन की हरकतों पर नजर रखने के लिए किया जाता है.
जानकारों का अंदेशा है कि ईरान भी अमेरिकी दुश्मनों के जरिए इन कमर्शियल तस्वीरों तक पहुंच बना सकता है. हालांकि, इस पाबंदी से उन पत्रकारों और जानकारों के लिए भी रास्ते बंद हो गए हैं जो इन तस्वीरों के जरिए डेटा स्टोरी दुनिया के सामने लाते थे. यानी किस इलाके में कितना हमला हुआ पहले और बाद में कितना अंतर है.
बाकी कंपनियां क्या कह रही हैं?
प्लैनेट लैब्स के अलावा दूसरी बड़ी कंपनी 'वेंटोर' ने बताया कि अमेरिकी सरकार ने उनसे तो संपर्क नहीं किया, लेकिन वे खुद ही अपने स्तर पर पाबंदियां लागू कर रहे हैं. वेंटोर के पास पहले से ही ऐसे नियम हैं कि वह भू-राजनीतिक तनाव के वक्त अपनी तस्वीरों पर कंट्रोल कर सकता है. वेंटोर कंपनी को पहले Maxar Tech के नाम से जाना जाता था.
कंपनी का कहना है कि वे उन इलाकों की तस्वीरों पर रोक लगा सकते हैं जहां अमेरिकी फौज एक्टिव है या जिन्हें दुश्मनों की ओर से निशाना बनाया जा रहा है. दूसरी तरफ, 'ब्लैकस्काई टेक्नोलॉजी' जैसी कंपनियों ने अभी तक इस पूरे मामले पर कोई बयान नहीं दिया है.
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