Ukraine War: 6 हफ्ते बाद Russia को लग रहे धक्के, पीछे हटेगी सेना, लेकिन अब यहां होगा भयंकर युद्ध...

Russia Ukraine War: 6 हफ्तों से जारी युद्ध ने मिलिट्री ऑपरेशन बनाए रखने में रूसी असफलताओं को उजागर किया है. इससे रूसी संसद को अपने युद्ध के उद्देश्यों को कम करना पड़ा. अब जोर इस बात पर है कि यूक्रेन के डोनबास (Donbas) इलाके को अपने कब्जे में ले लिया जाए,

Ukraine War: 6 हफ्ते बाद Russia को लग रहे धक्के, पीछे हटेगी सेना, लेकिन अब यहां होगा भयंकर युद्ध...

Russia Ukraine War: युद्ध के 6 हफ्ते बाद रूसी के सेना के क्या हैं हाल?

रूसी ( Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (Vladimir Putin) को पूरा भरोसा है कि उनकी सेना यूक्रेन के पूर्व में विजय दिला सकती है. इससे राजधानी कीव को कब्ज़े में करने में मिली असफलता कम की जा सकती है. अब भी उनके सामने मुश्किल काम है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार,  6 हफ्तों से जारी युद्ध ने मिलिट्री ऑपरेशन बनाए रखने में रूसी असफलताओं को उजागर किया है. इससे रूसी संसद को अपने युद्ध के उद्देश्यों को कम करना पड़ा. अब जोर इस बात पर है कि यूक्रेन के डोनबास (Donbas) इलाके को अपने कब्जे में ले लिया जाए, जिसमें डोनेत्सक (Donetsk) और लुहांस्क (Luhansk) आते हैं और जितना हो सके उतना दक्षिणी तट से भू-भाग हथिया लिया जाए. इससे पुतिन को 2014 में अलग किए गए क्रिमीय के लिए ज़मीन का रास्ता मिल जाएगा.  

लंदन के रॉयल यूनाइटिड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के विश्लेषक सैमुअल क्रेनी -इवान्स कहते हैं, "यह अधिक वास्तविक है, शुरु में रखे गए बड़े उद्देश्यों की तुलना में लेकिन ऑपरेशन की गति मायने रखेगी. रूसी सेना थक चुकी है और अब उन्हें अपनी गति बनाए और दबाव बनाए रखने में मुश्किल होगी, अब बहुत कुछ यूक्रेनी सेना की हालत पर निर्भर करेगा."

यूक्रेन के डिप्टी प्रेसिडेंशियल चीफ ऑफ स्टाफ, इहोर झोवक्वा (Ihor Zhovkva)ने ब्लूमबर्ग टीवी को बताया कि अब डोनबास पर एक बड़ी लड़ाई होने वाली है." अधिकारियों ने नागरिकों को जितना जल्दी हो सके, यह इलाका खाली करने को कहा है.

पोलैंड के ग्डांस्क में स्थित एक डिफेंस रिसर्च ग्रुप, रोचान कन्सल्टिंग (Rochan Consulting) के अनुसार , अमेरिकी अनुमान के मुताबिक रूस की युद्ध के लिए तैयार करीब एक तिहाई सेना यूक्रेन में लड़ रही है. अगर यूक्रेन की सेना की बात करें तो उन्हें अधिक सैनिकों की ज़रूरत होगी.  

सैन्य विशेषज्ञों का क्या है कहना?

रूस में मौजूद स्वतंत्र सैन्य विश्लेषक, पवेल लुज़िन कहते हैं, "सबसे बेहतीन सैनिकों का प्रयोग पहले ही किया गया है, और हम रूस के सैनिक रिजर्वों की गुणवत्ता के बारे में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कह सकते. इसमें से कितने सैनिक युद्ध के लिए तैयार हैं, और कितने इस तरह के आक्रमण के इच्छुक हैं, यह भी नहीं कहा जा सकता."

पश्चिमी अधिकारी कहते हैं कि सैनिकों की कमी के संकेत के तौर पर, रूस ने अपने कुछ सेना को जॉर्जिया के काटे गए इलाकों से हटा कर यूक्रेन में प्रयोग किया. इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, कीव से पीछे हटाई गई रूसी सेना कुछ समय के लिए युद्ध में प्रभावी नहीं होगी. 

रूसी सैनिक यूक्रेन के दूसरे शहर खारकीव में आगे बढ़ रहे हैं, वो यूक्रेनी सेना को डोनबास से काटना चाहते हैं. रूस के रास्ते में रणनीतिक तौर से अहम कस्बे स्लोवयांस्क और क्रैमातोरस्क (Slovyansk and Kramatorsk)  हैं.  वहीं कीव में मिली सैन्य बढत से बढ़े आत्मविश्वास से भरपूर यूक्रेनी सेना के पास अमेरिका और यूरोप के हथियारों की सप्लाई है , यूक्रेन अपने सैनिकों को और मजूबत कर रहा है.  

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अब तक दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने के लिए हो रही बातचीत का कोई हल नहीं निकला है .  जबकि पुतिन 9 मई होने वाले रूस की विक्ट्री दिवस (Victory Day) परेड  से पहले कुथ जीत हासिल करने की कोशिश करेगा. यह विजय दिवस द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी को हराने के लिए मनाया जाता है.  अगर दक्षिणी बंदरगाह शहर मारुयुपोल पर रूस अपना नियंत्रण कर लेता है तो इसे रूस अपनी पहली जीत मान सकता है.  अब तक रूस को केवल काले सागर में मौजूद शहर खेरसान में सफला मिली है. यूक्रेनी इसे वापस लेने के लिए लड़ रहे हैं. जबकि रूस का सबसे बड़ा बंदरगाह शहर ओडेसा अब भी यूक्रेन के नियंत्रण में है.