
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)
अम्मान:
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जार्डन यात्रा के दूसरे दिन भारत और जार्डन ने सीरिया, फलस्तीन में विस्फोटक स्थिति और आतंकी संगठन आईएसआईएस की ओर से पेश हो रहे खतरों के बारे में रविवार को चर्चा की।
छह समझौतों पर किए गए हस्ताक्षर
दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक जहाजरानी, राजनयिकों के प्रशिक्षण, सूचना प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं मीडिया समेत विविध विषयों पर छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनके अलावा भारत और जार्डन के विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग संबंधी 10 सहमति पत्रों पर भी हस्ताक्षर हुए।
आपसी हितों पर किया विचार-विमर्श
जार्डन के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला इनसौर ने मुखर्जी से भेंट के दौरान आपसी हितों से जुड़े विषयों पर विचार विमर्श किया। इस मुलाकात के बाद प्रतिनिधि स्तर की बैठक हुई और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। भारतीय प्रवक्ता ने बाद में बताया कि दोनों पक्षों के बीच सीरिया और फलस्तीन की स्थिति तथा आतंकी संगठन आईएसआईएस के संदर्भ में विचारों में एकरूपता थी।
आतंकवाद के दीर्घकालिक समाधान पर एकमत
प्रवक्ता ने कहा कि सीरिया के बारे में दोनों देश जिनेवा संधि के आधार पर दीर्घकालिक समाधान के पक्ष में थे जिसमें कहा गया है कि वहां की वर्तमान सरकार और उसके बाहर के लोगों की भागीदारी से देश में बदलाव लाया जाए। आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों पक्षों का मानना है कि इसका एक दीर्घकालिक समाधान निकाला जाए और विभिन्न मोर्चों पर आतंकवाद से निपटा जाए। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संयुक्त राष्ट्र संधि को अपनाने की जरूरत को रेखांकित किया।
छह समझौतों पर किए गए हस्ताक्षर
दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक जहाजरानी, राजनयिकों के प्रशिक्षण, सूचना प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं मीडिया समेत विविध विषयों पर छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनके अलावा भारत और जार्डन के विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग संबंधी 10 सहमति पत्रों पर भी हस्ताक्षर हुए।
आपसी हितों पर किया विचार-विमर्श
जार्डन के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला इनसौर ने मुखर्जी से भेंट के दौरान आपसी हितों से जुड़े विषयों पर विचार विमर्श किया। इस मुलाकात के बाद प्रतिनिधि स्तर की बैठक हुई और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। भारतीय प्रवक्ता ने बाद में बताया कि दोनों पक्षों के बीच सीरिया और फलस्तीन की स्थिति तथा आतंकी संगठन आईएसआईएस के संदर्भ में विचारों में एकरूपता थी।
आतंकवाद के दीर्घकालिक समाधान पर एकमत
प्रवक्ता ने कहा कि सीरिया के बारे में दोनों देश जिनेवा संधि के आधार पर दीर्घकालिक समाधान के पक्ष में थे जिसमें कहा गया है कि वहां की वर्तमान सरकार और उसके बाहर के लोगों की भागीदारी से देश में बदलाव लाया जाए। आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों पक्षों का मानना है कि इसका एक दीर्घकालिक समाधान निकाला जाए और विभिन्न मोर्चों पर आतंकवाद से निपटा जाए। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संयुक्त राष्ट्र संधि को अपनाने की जरूरत को रेखांकित किया।