
सोल:
पोप फ्रांसिस हालांकि गर्भपात जैसे 'सांस्कृतिक लड़ाई' के मुद्दों से आम तौर पर बचते रहे हैं और यह दलील देते रहे हैं कि जिंदगी की पवित्रता पर गिरिजाघर के सिद्धांत सब जानते हैं।
लेकिन दक्षिण कोरिया के आज के दौरे में उन्होंने गर्भपात के खिलाफ कुछ मौन लेकिन मजबूत बयान दिए। वह एक स्मारक पर रुके जो ऐसे समुदाय के गर्भपात के शिकार बच्चों के थे, जिन्हें गंभीर आनुवंशिक बीमारियां थीं। इन बीमारियों का इस्तेमाल गर्भपात को उचित ठहराने के लिए किया जाता है।
फ्रांसीस ने स्मारक के पास अपने सिर झुकाए और बिना बांह और बिना टांग वाले एक गर्भपात विरोधी कार्यकर्ता से बात की।
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