घर और सीमापार 'हिंसा की संस्कृति' को बढ़ावा देता है पाकिस्तान, UN में भारत ने पड़ोसी मुल्क को घेरा

भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया उस वक्त आई जब पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत मुनीर अकरम ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) का मुद्दा उठाया. अकरम ने पाकिस्तान समर्थक नेता सैयद अली शाह गिलानी का जिक्र अपने बयान में किया. 

घर और सीमापार 'हिंसा की संस्कृति' को बढ़ावा देता है पाकिस्तान, UN में भारत ने पड़ोसी मुल्क को घेरा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान (Pakistan) को आतंकवाद (Terrorism) पर लगाई फटकार

न्यूयॉर्क:

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations ) के मंच का भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए इस्तेमाल करने पर पाकिस्तान को लताड़ा है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) अपने मुल्क और पड़ोसी देशों में लगातार हिंसा की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता है. भारत का यह कड़ा बयान उस वक्त आया जब पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत मुनीर अकरम ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) का मुद्दा उठाया. अकरम ने पाकिस्तान समर्थक नेता सैयद अली शाह गिलानी का जिक्र अपने बयान में किया. भारत ने कहा कि दुनिया भर को चिंता होनी चाहिए कि आतंकवादी अपनी करतूतों को जायज ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं. 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए संबोधन में यूएन में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि वैश्विक मंचों पर अपनी बात रखने, चर्चा करने के लिए शांति की संस्कृति सबसे जरूरी है. उस वक्त संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में शांति की संस्कृति की परिवर्तनकारी भूमिका : कोरोना काल के बाद (Post COVID) के माहौल में संयम औऱ समावेश को बढ़ावा देने के विषय पर चर्चा हो रही थी.


विदिशा ने कहा, हमने आज एक बार फिर पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल होने का उदाहरण देखा है, ताकि वो भारत के खिलाफ जहर उगल सके. वो लगातार घर और बाहर हिंसा की संस्कृति (culture of violence) को बढ़ावा देता आया है. हम ऐसे सभी प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. दरअसल, पाकिस्तान के प्रतिनिधि का बयान विषय पर केंद्रित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने बयान में सिर्फ भारत और उससे जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी.

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विदिशा ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि हिंसा और असहिष्णुता किसी भी धर्म और संस्कृति के खिलाफ है. दुनिया भर के देशों को इस बात को लेकर चिंतित होना चाहिए कि जो आतंकवादी धर्म की आड़ में अपनी गतिविधियों को उचित साबित करने का प्रयास करते हैं.