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पाकिस्तान अब अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रहा, ईरान-US की फेल हुई इस्लामाबाद वार्ता को बता रहा 'मदर ऑफ ऑल डील'

पाकिस्तानी मीडिया में दावा है कि ट्रंप जल्द इस्लामाबाद आकर समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जबकि अमेरिका और ईरान ने इसे नहीं माना है.

पाकिस्तान अब अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रहा, ईरान-US की फेल हुई इस्लामाबाद वार्ता को बता रहा 'मदर ऑफ ऑल डील'

पाकिस्तान के टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया में इन दिनों एक ही चर्चा जोरों पर है. “डील डन है, ट्रंप दो दिन में साइन करेंगे”. एंकरों, विश्लेषकों और खासकर टॉक शोज में इसे 21वीं सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटना तक बताया जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई कोई ऐतिहासिक समझौता तय हो चुका है या फिर पाकिस्तानी मीडिया कुछ ज़्यादा ही उतावलेपन में नई-नई कहानियां गढ़ रहा है?

अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बातचीत जरूर हुई है. यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका-ईरान के बीच सबसे ऊंचे स्तर की प्रत्यक्ष वार्ता मानी जा रही है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन वार्ताओं में भाग लिया और माना कि कुछ प्रगति हुई है, लेकिन कोई अंतिम समझौता अभी तक सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है और न ही किसी से साथ के साझा किया गया. 

वार्ता के बाद भी कई बार ट्रंप ईरान को सार्वजनिक तौर पर कई बार धमका चुके हैं, लेकिन साथ में उन्होंने युद्ध को "करीब-करीब खत्म" भी बताया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी लागू कर रही है, जो इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में वृद्धि का संकेत है. अगली बातचीत को लेकर केवल संभावनाएं जताई हैं. इन बयानों में ईरान से डील तय हो जाने या इस्लामाबाद में हस्ताक्षर जैसी किसी पक्की और आधिकारिक घोषणा का ज़िक्र नहीं किया गया है. 

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‘मदर ऑफ ऑल डील्स' के दावे

यहीं से शुरू होती है पाकिस्तानी मीडिया की अपनी कहानी. वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर के कार्यक्रम में पूर्व सांसद मुशाहिद हुसैन जैसे विश्लेषकों ने कई बड़े दावे किए हैं. उनका मानना है कि ट्रंप असल में चाहते हैं कि इस डील का पूरा श्रेय सिर्फ उन्हें मिले. चर्चाओं में यहां तक कहा गया कि ट्रंप, जेडी वेंस को एक 'राजनीतिक खतरे' के रूप में देख सकते हैं, इसलिए वह खुद को इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में रखना चाहते हैं.

पाकिस्तानी मीडिया में यह थ्योरी भी तैर रही है कि अगर समझौता हुआ, तो डोनाल्ड ट्रंप खुद इस्लामाबाद आएंगे और दस्तखत करेंगे, ताकि इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' के रूप में अमर किया जा सके. हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक अमेरिकी या ईरानी पुष्टि नहीं है.

चीन, उत्तर कोरिया और 14–15 मई की थ्योरी

पाकिस्तानी टॉक शो ने इस घटनाक्रम में ‘चाइना एंगल' को भी मजबूती से जोड़ दिया है. यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने अमेरिका को 14 मई तक युद्ध और बातचीत खत्म करने का अल्टीमेटम दिया है. यह भी कहा जा रहा है कि ट्रंप 14-15 मई को चीन जाने वाले हैं और वहां उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मिल सकते हैं. 

इस थ्योरी के मुताबिक, ट्रंप एक ही महीने में दो ऐतिहासिक वैश्विक घटनाओं का हिस्सा बनकर अपनी छवि एक महान शांतिदूत की बनाना चाहते हैं. हक़ीकत यह है कि चीन की क्षेत्रीय भूमिका अहम जरूर है, लेकिन इन विशिष्ट तारीखों की पुष्टि किसी भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय स्रोत से नहीं हुई है. लेकिन, पाकिस्तानी मीडिया जिस तरह यह दर्शा रहा है कि पूरे घटनाक्रम का केंद्र सिर्फ पाकिस्तान है और अंतिम ऐतिहासिक समझौता वहीं होगा यह दावा अभी तथ्यों से कोसों दूर और अटकलों पर आधारित अधिक दिखता है. कूटनीति में जब तक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न हो जाएं, तब तक कुछ भी अंतिम नहीं माना जा सकता.

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