Pakistan Loan to UAE: पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था एक बार फिर गहरे संकट में है. इस बार झटका संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से लगा है. UAE ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर (करीब 25 हजार करोड़ रुपये) के कर्ज को आगे बढ़ाने यानी रोलओवर से इनकार कर दिया है और अपना पैसा वापस मांग लिया है. पिछले सात सालों में यह पहली बार है जब UAE ने इस कर्ज को रोलओवर करने के लिए हामी नहीं भरी है.
ब्लूमबर्ग ने पाकिस्तान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान इस कर्ज को चुकाने के लिए अब तमाम विकल्पों पर विचार कर रहा है. इसमें दूसरे देशों से मदद मांगना और कमर्शियल बैंकों से कर्ज लेना शामिल है. यह संकट ऐसे समय पर आया है जब मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में है.
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अब नए कर्ज की तलाश में शहबाज सरकार
27 मार्च तक पाकिस्तान के पास करीब 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो लगभग तीन महीने के आयात के लिए काफी है. हालांकि, UAE का कर्ज वापस करने के बाद इसमें बड़ी गिरावट आ सकती है. पाक वित्त मंत्री औरंगजेब का कहना है कि वे रिजर्व को एक सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए कई स्रोतों से फंड जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.
यूरोबॉन्ड और पांडा बॉन्ड का सहारा लेगा पाकिस्तान?
कर्ज के जाल से निकलने के लिए पाकिस्तान अब वैश्विक बॉन्ड मार्केट का रुख कर रहा है. औरंगजेब ने बताया कि चार साल के लंबे अंतराल के बाद पाकिस्तान इस साल यूरोबॉन्ड जारी करने की योजना बना रहा है. इसके साथ ही 'इस्लामिक सुकुक' और डॉलर-सेटल्ड रुपया बॉन्ड भी जारी किए जाएंगे. पाक सरकार अगले कुछ दिनों में इन बॉन्ड्स के लिए लीड मैनेजर्स की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर देगी.
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान पहली बार युआन (चीनी मुद्रा) में कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है, जिसे 'पांडा बॉन्ड' कहा जाता है. सरकार की योजना दूसरी तिमाही में 25 करोड़ डॉलर के पांडा बॉन्ड बेचने की है, जिसे बाद में 1 अरब डॉलर तक बढ़ाया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में एशियाई विकास बैंक (ADB) और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं.
IMF से कर्ज की आस लगाए बैठा पाकिस्तान
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वे तेल संकट के कारण IMF से अतिरिक्त फंड या प्रोग्राम में तेजी लाने की मांग नहीं कर रहे हैं. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश की व्यापक आर्थिक स्थिति (Macroeconomic situation) और बिगड़ती है, तो वे IMF से दोबारा बात करने पर मजबूर होंगे. फिलहाल पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती UAE का पैसा चुकाना और अपने भंडार को खाली होने से बचाना है.
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