- होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व का लगभग बीस प्रतिशत कच्चा तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस परिवहन होता है
- अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद होर्मुज में हजारों तेल टैंकर और जहाज अटके हुए हैं और संकट गहरा गया है
- तेल टैंकरों पर हमले और आपूर्ति बाधित होने से तेल-गैस संकट और युद्ध का दायरा बढ़ने का गंभीर खतरा बना हुआ है
खाड़ी की जंग हमेशा तेल और गैस की किल्लत का सबब बनती रही है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद एक बार फिर तेल-गैस संकट को लेकर दुनिया चिंतित है. विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और लगभग 20 प्रतिशत द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का परिवहन आमतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है. अब जंग शुरू होने के बाद स्थिति ये है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हजारों तेल से भरे जहाज अटके पड़े हैं. इनमें से एक पर भी हमला हुआ तो तबाही मचनी तय है.
मैप पर देखें स्थिति

छुपकर निकले बस 9 टैंकर
मरीनट्रैफिक डेटा के अनुसार, सोमवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए केवल नौ तेल टैंकर, मालवाहक और कंटेनर जहाज ही दर्ज किए गए हैं. इनमें से कुछ ने कई बार अपनी स्थिति छिपाकर इसे पार किया है. रविवार से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले कई गुना बढ़ गए हैं. मरीनट्रैफिक प्रकाशित करने वाली पत्रिका केप्लर के विश्लेषक मैट राइट ने बुधवार को कहा, "संघर्ष के बावजूद, कुछ टैंकर अभी भी जलडमरूमध्य से पूर्व और पश्चिम की ओर यात्रा कर रहे हैं, जिनमें से कई यात्राएं एआईएस (Automatic Identification System) ब्लैकआउट के तहत हो रही हैं."इसका एक उदाहरण टैंकर कावोमालेस है, जिसने 3 मार्च को जलडमरूमध्य के पूर्व में एक संकेत भेजा और फिर लगभग 14 घंटे बाद खाड़ी में एक और संकेत भेजा. मगर ज्यादातर तेल टैंकर और जहाज जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज के आसपास के बंदरगाहों पर खड़े हो गए हैं.
तेल-गैस सप्लाई की किल्लत की बढ़ती आशंका को देखते हुए अमेरिका ने कहा है कि वो इन तेल टैंकरों को होर्मुज से निकालने के लिए अपनी नेवी की मदद भेजेगा, मगर ईरान ने कहा है कि वो अमेरिकी नेवी का इंतजार कर रहा है. जाहिर है यहां से फिलहाल इन तेल टैंकरों का सकुशल निकल पाना बहुत मुश्किल दिख रहा है.

डर इस बात का
जाहिर है एक तरफ तो तेल टैंकर और जहाजों के अटकने से तेल और गैस की आपूर्ति ठप हो गई है और कीमतें बढ़ने की आशंका है तो दूसरी तरफ ये भी डर है कि तेल टैंकर ब्लास्ट हुए तो आसपास भयानक तबाही आ सकती है. एक के बाद एक टैंकर चपेट में आ सकते हैं. तीसरा और सबसे बड़ा डर है कि अगर ईरान-इजरायल-अमेरिका के हमलों में दूसरे देशों के जहाजों को नुकसान पहुंचा तो बहुत हद तक गुंजाइश है कि इस युद्ध का दायरा बढ़ जाएगा. रूस, चीन, उत्तर कोरिया और यूरोप जैसे ताकतवर प्लेयर्स के भी जहाज होर्मुज के आसपास मौजूद हैं. अगर इन जहाजों पर किसी भी तरफ से हमला होता है तो जवाब में वो देश युद्ध में कूद सकता है. जाहिर है इसका नतीजा सर्वनाश से कम नहीं होगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं