अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'नोबिटेक्स' पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है. नोबिटेक्स पर आरोप है कि उसने ईरान की सरकार और वहां के ब्लैकलिस्टेड सरकारी संस्थानों को पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों से बचने में मदद की. लेकिन इस पूरे खेल के पीछे कहानी सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की नहीं है, बल्कि परदे के पीछे सक्रिय दो ताकतवर भाइयों की है. हाल ही में आई रॉयटर्स की एक खोजी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि कैसे इस एक्सचेंज को ईरान के एक बेहद रसूखदार परिवार के दो भाई मिलकर कंट्रोल कर रहे थे. इनके संबंध ईरान के नए सुप्रीम लीडर के साथ बेहद घनिष्ठ हैं.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा कि जब ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा रही है, तब वहां के शासन ने अपने भ्रष्ट एजेंडे को पूरा करने के लिए डिजिटल एसेट टेक्नोलॉजी का सहारा लिया. इस एक्सचेंज का इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने और देश से बाहर पैसा भेजने के लिए किया जा रहा था.
कैसे हुआ दो भाइयों के 'सीक्रेट' खेल का खुलासा?
रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, नोबिटेक्स एक्सचेंज को ईरान के सबसे प्रभावशाली राजवंशों में से एक, खर्राजी परिवार के दो भाई चला रहे हैं. कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स को खंगालने पर एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि जब इस एक्सचेंज की शुरुआत हुई थी, तब दोनों भाइयों को एक ऐसे सरनेम के साथ रजिस्टर्ड किया गया था, जिसका इस्तेमाल उनका परिवार आमतौर पर नहीं करता है.
अमेरिकी ट्रेजरी ने अब इन दोनों भाइयों के असली नामों का खुलासा करते हुए उन पर व्यक्तिगत रूप से भी प्रतिबंध लगा दिया है. इन भाइयों के नाम सैयद मोहम्मद अली अगामिर मोहम्मद अली और सैयद मोहम्मद अगामिर मोहम्मद अली हैं. इनके साथ ही एक्सचेंज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीर हुसैन राड पर भी पाबंदी लगा दी गई है.
ईरान के केंद्रीय बैंक और सेना को पहुंचाया फायदा
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, नोबिटेक्स ने ईरानी सरकार को खूब सपोर्ट दिया और आईआरजीसी, ईरान के केंद्रीय बैंक से जुड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन को आसान बनाया.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान में सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद, नोबिटेक्स ने इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद ईरानी शासन की संपत्ति और फंड को सुरक्षित रखने और देश से बाहर भेजने में अहम भूमिका निभाई.
आरोपों पर क्या है नोबिटेक्स की सफाई?
कंपनी का यह भी तर्क था कि अगर नोबिटेक्स के जरिए कोई भी अवैध फंड ट्रांसफर हुआ है, तो वह मैनेजमेंट की मंजूरी या जानकारी के बिना हुआ है. इसके अलावा, कंपनी ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि दोनों भाइयों ने कभी अपनी पहचान छिपाई या किसी वैकल्पिक नाम का इस्तेमाल किया था.
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