निकाह मुताह या प्लेजर मैरिज आज भी कई इस्लामिक देशों में धड़ल्ले से चल रहा है. इसमें मौजमस्ती के लिए कुछ वक्त के लिए महिला और पुरुष पति-पत्नी का रिश्ता निभाते हैं और फिर बिना किसी झंझट के अलग हो जाते हैं. आलोचकों का तर्क है कि मौजमस्ती के लिए ऐसे निकाह होते हैं, जो कतई सही नहीं है. अमीर शख्स इसका फायदा उठाते हैं और गरीब लड़कियां इसका शिकार होती हैं. प्लेजर मैरिज को अरबी भाषा में निकाह मुताह (Nikah Mutah) भी कहते हैं. यह एक अस्थायी विवाह (Temporary Marriage) है. इसमें शादी से पहले ही दोनों पक्षों की सहमति से यह तय कर लिया जाता है कि यह शादी कितने समय यानी कुछ घंटों,दिनों या महीनों) के लिए मान्य रहेगी. समयसीमा पूरी होते ही ये निकाह खत्म हो जाता है.
निकाह मुताह क्या है
निकाह मुताह में शादी के समय ही आपसी सहमति से समय इसका टाइम तय कर लिया जाता है. दूल्हा बनने वाले पुरुष को महिला को एक तयशुदा रकम या मेहर देना अनिवार्य होता है. तलाक की जरूरत नहीं होती. तय समयसीमा खत्म होते ही शादी अपने आप खत्म हो जाती है.अगर इस विवाह से कोई संतान होती है तो उसे वैध माना जाता है और पिता की संपत्ति पर उसका कानूनी अधिकार होता है.ईरान और कुछ अन्य देशों में ऐसे मुताह ऐप और वेबसाइट भी आ गई हैं. कुल विवाहों की तुलना में ये बेहद कम है.
निकाह मुताह किन देशों में प्रचलित
यह परंपरा मुख्यतया शिया मुस्लिम समुदाय में धार्मिक और कानूनी तौर पर है. सुन्नी मुस्लिम समुदाय में इस निकाह को प्रतिबंधित यानी हराम माना जाता है. इंडोनेशिया में भी ये प्रचलन में है. ईरान एक शिया बहुल देश है, जहां निकाह मुताह (सीगेह) को कानूनी और धार्मिक मान्यता मिली है. इसके लिए बाकयदा पंजीकरण भी होता है. इराक में भी शिया आबादी बड़ी संख्या में है, इसलिए वहां भी ये प्रथा चलन में है. लेबनान के शिया समुदायों के बीच भी मुताह विवाह को सामाजिक और धार्मिक मान्यता मिली है. बहरीन, यमन, पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों में जहां शिया मुस्लिम रहते हैं, वहां ऐसे मामले सामने आ जाते हैं.
न तलाक का झंझट, न जिम्मेदारी
हालांकि ज्यादातर पारंपरिक और रूढ़िवादी शिया परिवारों में भी अपनी कुंवारी बेटियों के लिए मुताह को स्वीकार नहीं किया जाता. इसे परिवार की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है. विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के मामले में लचीलापन रहता है.अगर कोई महिला विधवा या तलाकशुदा है और गरीब है तो कई बार परिवार मुताह के लिए तैयार हो जाते हैं. कई मामलों में परिवार खुलकर तैयार नहीं होते, बल्कि लड़के और लड़कियां अपनी मर्जी से गुपचुप तरीके से मुताह कर लेते हैं. परिवारों को इसकी भनक तक नहीं लगती.
टूरिस्टों ने इसे बनाया जरिया
बहुत सारे विदेशी पर्यटक भी विदेश यात्रा के दौरान कुछ घंटों या दिनों की ऐसी शादी करते हैं. वहां की सरकार विदेशी पुरुषों और स्थानीय महिलाओं के बीच मुताह को वैध मानती है, लेकिन उसका पंजीकरण करना जरूरी होता है. अगर कोई जोड़ा होटल में ठहरता है तो उन्हें मुताह नामा (विवाह का प्रमाण पत्र) दिखाना होता है. बिना इसके धार्मिक पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है.
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धार्मिक पर्यटन का दुरुपयोग
इराक और सीरिया के कुछ धार्मिक स्थलों पर मुताह के नाम पर एक देह व्यापार भी सामने आया है. अमीर विदेशी पर्यटक संबंध बनाने के लिए कुछ दिनों के लिए स्थानीय गरीब लड़कियों से मुताह कर लेते हैं. फिर देश छोड़कर चले जाते हैं. लेकिन कोई विदेशी पर्यटक मुताह का समय खत्म होने से पहले देश छोड़ दे तो महिला के पास मुआवजा के रास्ते नहीं होते हैं. ऐसे विवाह से कोई बच्चा हो जाए तो नागरिकता और बच्चे के लिए मदद मिलना मुश्किल होता है.
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निकाह मुताह की आलोचना
दुनिया की लगभग 85-90 फीसदी मुस्लिम आबादी सुन्नी है. जहां मुताह को देह व्यापार मानकर माना जाता है.शिया समुदाय में कुछ लोग इसे सही मानते हैं, लेकिन ज्यादातर परिवार अपने बच्चों को ऐसे किसी भी बंधन में बांधना नहीं चाहते. मानवाधिकार संगठन इसे महिलाओं के शोषण का जरिया मानते हैं, जो धार्मिक परंपराओं के नाम पर सामान्य शादी जैसी सामाजिक जिम्मेदारी की जगह कुछ वक्त के लिए शारीरिक संबंध बनाने की कानूनी छूट देता है.
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