- भारत नेपाल सीमा पर भंसार के नए नियमों की सख्ती के कारण आम नेपाली लोगों को सामान पर परेशानी हो रही है
- कई नेपाली लोग भंसार देने से बचने के लिए मैत्री पुल के नीचे कच्चे रास्ते से चादर में छुपाकर सामान ले जाते हैं
- बिरगंज के व्यापारी अवैध तरीके से सामान मंगवाते हैं,स्टाफ को रक्सौल भेजकर ज्यादा कीमत पर बेचने का काम कराते हैं
भारत नेपाल सीमा पर भंसार के नियमों की सख्ती ने आमलोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं.रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीद कर जाने वाले नेपाली लोग मुश्किलों में हैं. उन्हें भंसार देना पड़ रहा है.इतना ही नहीं बल्कि कई बार उनका सामान चेकिंग के दौरान फाड़ दिया जा रहा, चावल-दाल जैसी चीजें गिर जा रही हैं.नेपाल के बिरगंज से रक्सौल आए प्रभु दयाल बताते हैं,"हम चावल ले जाते हैं तो कस्टम पर फाड़ देता है,लेकिन फिर भी इधर सस्ता पड़ता है तो हम ले जाते हैं.नेपाल में मिल जाता तो इधर नहीं आते." यह समस्या इकलौते प्रभु दयाल की नहीं है. नेपाल से बिरगंज आने वाले हर नेपाली की है.अब कई लोगों ने भंसार से बचने का रास्ता निकाला है.
एनडीटीवी के कैमरे में कैद हुईं दूसरे रास्ते से जाती महिलाएं
जब हम भारत - नेपाल सीमा पर मैत्री पुल पर लोगों से बात कर रहे थे, तभी हमें दो महिलाएं पुल के नीचे की तरफ से कच्चे रास्ते से जाती हुई दिखीं.दोनों ने अपनी पीठ और पेट के तरफ सामान भर रखा था. इसके ऊपर उन्होंने चादर लपेट रखी थी ताकि वह आसानी से पता न चले. लेकिन गौर करने पर यह साफ था कि वे ढेर सारा सामान लेकर जा रही हैं. रक्सौल और बिरगंज दोनों तरफ के लोगों ने हमें बताया कि बड़ी संख्या में लोग भंसार से बचने के लिए ऐसी कोशिशें करते हैं. ओपन बॉर्डर होने के कारण यह बहुत कॉमन है. कई दूसरे नाके भी हैं, जहां लोग बच-बचाकर सामान लेकर निकल जाते हैं. इनमें पनटोका, मुसहरवा, हरईयां, सहदेवा- महदेवा जैसे नाके शामिल हैं.इन सभी नाकों से कई बार तस्करी का सामान भी आरपार कराया जाता है.

नेपाल के व्यापारी अवैध तरीके से सामान लाने को देते हैं बढ़ावा
नेपाल के बिरगंज में कपड़े का व्यवसाय करने वाले बिष्णु प्रजापति कहते हैं, "बिरगंज बाजार के कई व्यापारी अवैध तरीके से सामान लाने को बढ़ावा देते हैं.वे अपने स्टाफ को रक्सौल भेजते हैं, उनसे साड़ी, सूट जैसे सामान मंगवाते हैं.उसे ज्यादा कीमत में बेचते हैं.इतना ही नहीं बल्कि कई महिलाएं और पुरुष खुद भी यह काम करती हैं.वे दिन में दो-तीन बार बिरगंज से रक्सौल जाते हैं. वहां से सामान खरीद कर नेपाल के दुकानदारों को बेच देते हैं.इसके बदले वे कमीशन लेते हैं क्योंकि वे दिन में कई बार जाते हैं इसलिए हर बार अलग-अलग नाकों का इस्तेमाल करते हैं.ताकि सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी उन्हें पहचान न पाए." बिरगंज के स्थानीय निवासी गुड्डू ठाकुर भी इस बात की तस्दीक करते हैं. वे कहते हैं, "नए भंसार के नियमों से ज्यादा दिक्कत उन्हें हुई है जो गलत तरीके से सामान लाते थे. जो व्यापारी सही तरीके से सामान लाते थे, उन्हें परेशानी नहीं हुई है.हां, आमलोगों को कुछ दिक्कतें हुई हैं जो रोजमर्रा का सामान लाते थे."

कितना मिलता है कमीशन?
स्थानीय लोग बताते हैं कि सामान लाने वालों को 5 से 10% तक कमीशन मिलता है.आमतौर पर महिलाएं रक्सौल से साड़ी खरीद कर ले जाती हैं तो उन्हें एक बार में 1000- 2000 रुपए तक की कमाई हो जाती है. कुछ महिलाएं दिन में दो से तीन बार रक्सौल से बिरगंज सामान लेकर जाती हैं.इससे दिन में 5-6 हजार रुपए बना लेती हैं.अब यही रास्ता कई आमलोग अपना रहे हैं ताकि बिना भंसार दिए वे सामान लेकर रक्सौल से बिरगंज पहुंच पाएं.
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