
लाहौर:
पाकिस्तान की अगली पीएमएल-एन सरकार पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों की सुनवाई कराएगी।
पार्टी सांसद तारिक अजीम ने कहा, ‘‘हां, हमने मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में कराने का फैसला किया है। मुशर्रफ ने संविधान का उल्लंघन किया है और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चुने गए नवाज शरीफ का रुख इस बात को लेकर स्पष्ट है कि मुशर्रफ ने संविधान का उल्लंघन किया है जिसके लिए उनके खिलाफ सुनवाई होनी चाहिए।
अजीम ने कहा कि शरीफ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुशर्रफ के साथ कोई व्यक्तिगत वैर भाव नहीं है लेकिन कानून तोड़ने और संविधान का उल्लंघन करने को लेकर उनके खिलाफ सुनवाई होनी चाहिए।
11 मई को चुनाव कराने वाली कार्यवाहक सरकार ने अपने सीमित अधिकार का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद छह के तहत मुशर्रफ के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया था। लेकिन पीएमएल-एन ने पूर्व सैन्य शासक को नहीं छोड़ने का फैसला किया है। मुशर्रफ ने 2009 में नवाज शरीफ की सरकार को सत्ता से हटा दिया था।
मुशर्रफ अभी इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित अपने फार्महाउस में नजरबंद हैं। मुशर्रफ 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या, 2006 में सैन्य अभियान में बलूच नेता अकबर बुगती की मौत और 2007 में आपातकाल के दौरान दर्जनों न्यायाधीशों को हिरासत में लिए जाने जैसे मामलों में आरोपों का सामना कर रहे हैं।
कार्यवाहक सरकार ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि वह मुशर्रफ के खिलाफ सुनवाई कराने में समर्थ नहीं है।
पार्टी सांसद तारिक अजीम ने कहा, ‘‘हां, हमने मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में कराने का फैसला किया है। मुशर्रफ ने संविधान का उल्लंघन किया है और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चुने गए नवाज शरीफ का रुख इस बात को लेकर स्पष्ट है कि मुशर्रफ ने संविधान का उल्लंघन किया है जिसके लिए उनके खिलाफ सुनवाई होनी चाहिए।
अजीम ने कहा कि शरीफ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुशर्रफ के साथ कोई व्यक्तिगत वैर भाव नहीं है लेकिन कानून तोड़ने और संविधान का उल्लंघन करने को लेकर उनके खिलाफ सुनवाई होनी चाहिए।
11 मई को चुनाव कराने वाली कार्यवाहक सरकार ने अपने सीमित अधिकार का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद छह के तहत मुशर्रफ के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया था। लेकिन पीएमएल-एन ने पूर्व सैन्य शासक को नहीं छोड़ने का फैसला किया है। मुशर्रफ ने 2009 में नवाज शरीफ की सरकार को सत्ता से हटा दिया था।
मुशर्रफ अभी इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित अपने फार्महाउस में नजरबंद हैं। मुशर्रफ 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या, 2006 में सैन्य अभियान में बलूच नेता अकबर बुगती की मौत और 2007 में आपातकाल के दौरान दर्जनों न्यायाधीशों को हिरासत में लिए जाने जैसे मामलों में आरोपों का सामना कर रहे हैं।
कार्यवाहक सरकार ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि वह मुशर्रफ के खिलाफ सुनवाई कराने में समर्थ नहीं है।
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