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UN हेडक्वार्टर के बाहर तिब्बती झंडा लिए शख्स की आत्मदाह से हड़कंप, वजह जानने में जुटी पुलिस

UN मुख्यालय के बाहर तिब्बती झंडा लेकर व्यक्ति ने किया आत्मदाह. मौत के बाद कई सवालों के जवाबों का इंतजार है- आखिर क्या था इस खौफनाक कदम के पीछे का कारण?

UN हेडक्वार्टर के बाहर तिब्बती झंडा लिए शख्स की आत्मदाह से हड़कंप, वजह जानने में जुटी पुलिस
प्रतीकात्मक तस्वीर
AFP
  • आत्मदाह करने वाले शख्स के हाथ में तिब्बती झंडा था, अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
  • पुलिस आत्मदाह की वजह की जांच कर रही है, अभी कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया.
  • घटना के बाद तिब्बत-चीन विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया.

अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर भारतीय समय के अनुसार शुक्रवार की सुबह एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई. तिब्बती झंडा लिए 52 वर्षीय एक व्यक्ति ने खुद को आग लगा ली. गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

न्यूयॉर्क सिटी पुलिस विभाग के मुताबिक, 911 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. उस समय व्यक्ति का शरीर बुरी तरह जल चुका था. फिलहाल उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है क्योंकि उसके परिवार को अभी आधिकारिक सूचना दी जानी बाकी है.

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि व्यक्ति ने आत्मदाह जैसा कदम क्यों उठाया. इसलिए घटना के पीछे की वजह को लेकर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि घटना उस समय हुई, जब दिन की सभी निर्धारित बैठकें समाप्त हो चुकी थीं.

तिब्बत के झंडे लिए शख्स की फाइल फोटो

तिब्बत के झंडे लिए शख्स की फाइल फोटो
Photo Credit: AFP

तिब्बती झंडा क्यों बना चर्चा का विषय?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यक्ति के हाथ में तिब्बती झंडा था. हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं कहा है कि आत्मदाह का कारण तिब्बत से जुड़ा विरोध था. जांच पूरी होने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी.

तिब्बत को लेकर विवाद क्या है?

चीन का कहना है कि तिब्बत सदियों से उसका हिस्सा है और 1951 से वहां उसका प्रशासन है. दूसरी ओर, कई तिब्बती मानते हैं कि उनका क्षेत्र लंबे समय तक स्वतंत्र रहा और चीन वहां की संस्कृति और पहचान को कमजोर कर रहा है.

14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो

14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो
Photo Credit: AFP

चीन से निर्वासित तिब्बती प्रशासन जिसे केंद्रीय तिब्बती प्रशासन भी कहा जाता है, और जो भारत के धर्मशाला में स्थित है उसे चीन मान्यता नहीं देता है. इसके प्रमुख पेनपा सेरिंग हैं. लेकिन पहले दलाई लामा इसके प्रमुख थे. जो तिब्बतियों के राजनीतिक और आध्यात्मिक नेता दोनों के रूप में कार्य किया करते थे. लेकिन मार्च 2011 में दलाई लामा ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई निर्वासित सरकार को अपनी राजनीतिक सत्ता सौंप दी.

इंटरनैशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के मुताबिक चीन से आखिरी बार जनवरी 2010 में दलाई लामा की आधिकारिक बातचीत हुई थी. दरअसल, तिब्बती मामलों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए साल 2002 से 2010 के बीच चीन और दलाई लामा के दूतों के बीच कुल 8 दौर की वार्ताएं हुई थीं. जिसके अंतिम दौर की बैठक जनवरी 2010 में चीन में हुई थी. लेकिन तब कोई ठोस समाधान नहीं निकला और उसके बाद से कोई औपचारिक बात नहीं हुई है.

ये भी पढ़ें: चीन के नए कानून पर तिब्बती प्रशासन की दुनिया से अपील, तिब्बती पहचान मिटाने की साजिश का आरोप

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