- इजरायल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकत ने ईरान को दोबारा उकसाने पर करारा जवाब देने की चेतावनी दी है
- उन्होंने कहा कि ईरान ने दशकों से सशस्त्र गुटों को समर्थन देकर मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाई है
- बरकत ने इजरायल की सैन्य कार्रवाई को ईरान की कमजोरी उजागर करने वाला महत्वपूर्ण कारण बताया है
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हमें बताएं।इजरायल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकत ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने दोबारा उकसाया तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा और उन्होंने गाजा में किसी भी शांति सेना में पाकिस्तानी भागीदारी से साफ इनकार कर दिया है. दावोस में एनडीटीवी के विष्णु सोम को दिए एक साक्षात्कार में बरकत ने कहा, "हमने उन्हें एक बार निशाना बनाया, उन्हें करारा झटका दिया, और अगर वे हमसे पंगा लेने की कोशिश करते हैं, तो हम उन्हें सात गुना ज्यादा करारा झटका देंगे."
गाजा में शांति सेना के बारे में उन्होंने आगे कहा, "आतंकवाद का समर्थन करने वाले किसी भी देश का स्वागत नहीं है...और इसमें पाकिस्तान भी शामिल है."
ईरान में क्या होगा
- बरकत ने ईरान पर दशकों से सशस्त्र गुटों को समर्थन देकर मध्य पूर्व को अस्थिर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "ईरान...बुराई की धुरी का मुखिया रहा है. उन्होंने इजरायल को नष्ट करने का लक्ष्य रखा...हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें बनाईं...गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह को मजबूत किया, और उन्होंने इजरायल के लिए एक आसन्न खतरा पैदा किया."
- अर्थव्यवस्था मंत्री ने ईरान की कमजोरी को उजागर करने का श्रेय इजरायल की सैन्य कार्रवाई को दिया. बरकत ने कहा, "हमने उन्हें बुरी तरह पंगु बना दिया... उन पर कड़ा प्रहार किया... और यह साबित कर दिया कि वे उतने बड़े और शक्तिशाली नहीं हैं जितना वे खुद को समझते थे." उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि इसका पूरे क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा है, और अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी."
- हालांकि, बरकत ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल का ध्यान रक्षा पर है, न कि सत्ता परिवर्तन पर. उन्होंने कहा, "इजरायल का हित इजरायल की रक्षा करना है. अगर वे कोई धमकी देते हैं, तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे. अगर वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं, तो यह ईरान के हित में है."
मिडिल ईस्ट में क्या बदल रहा
- मिस्र, जॉर्डन और अब्राहम समझौते के साथ ऐतिहासिक शांति समझौतों का हवाला देते हुए, बरकत ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में "हमारे दुश्मन दोस्त बन जाएंगे." उन्होंने आगे कहा, "अगर ईरान अपना रुख बदलता है और इजरायल के साथ शांति स्थापित करना चाहता है, तो हमें उनके साथ सहयोग करने में खुशी होगी."
- बरकत ने ट्रंप प्रशासन के शांति ढांचे का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे "संयुक्त राष्ट्र से बेहतर विकल्प" बताया, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र पक्षपाती है. उन्होंने हेब्रोन में स्थानीय अरब नेतृत्व के साथ सहयोग को गाजा में भविष्य के शासन के लिए एक व्यवहार्य मॉडल बताया. उन्होंने कहा, "वहां के शेख...अब्राहम समझौते में शामिल होना चाहते हैं...हमारे साथ आतंकवाद से लड़ना चाहते हैं...आर्थिक मोर्चे पर सहयोग करना चाहते हैं."
- उन्होंने टू नेशन थ्योरी को अवास्तविक बताते हुए खारिज कर दिया. बरकत ने इजरायल की संसद में लगभग सर्वसम्मत विरोध का हवाला देते हुए कहा, "यह संभव ही नहीं है." उन्होंने आगे कहा, "फिलिस्तीनी प्राधिकरण...हमें नष्ट करने के लिए एक राज्य चाहता है."
- अंतर्राष्ट्रीय शांति स्थापना प्रस्तावों पर बरकत ने स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने कहा, "हम कतरियों, तुर्कों...और इसमें पाकिस्तान भी शामिल है, को स्वीकार नहीं करेंगे. वे गाजा में जिहादी संगठन के बहुत समर्थक रहे हैं, और हम उन पर भरोसा नहीं करेंगे कि वे वहां अपनी सेना भेजें."
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