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1500 KM की रेस, 12 मिनट का सस्पेंस और 5 घातक शिकारी... क्यों इजरायल का 'चक्रव्यूह' नहीं भेद पाता ईरान?

ईरान से इजरायल की 1500 किमी की दूरी मिसाइलों के लिए एक 'मौत का रास्ता' है. इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर 5 परतों वाला अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाया है.

1500 KM की रेस, 12 मिनट का सस्पेंस और 5 घातक शिकारी... क्यों इजरायल का 'चक्रव्यूह' नहीं भेद पाता ईरान?
  • इजरायल के पास एक अत्याधुनिक चक्रव्यूह है जिसमें पांच परतों के डिफेंस सिस्टम मिसाइलों को रोकते हैं
  • अमेरिकी सैटेलाइट और रडार मिसाइल लॉन्च होते ही ट्रैकिंग कर इजरायल को पहले ही अलर्ट भेज देते हैं
  • ईरान की मिसाइलें इराक, जॉर्डन और सीरिया के एयर डिफेंस सिस्टम और अमेरिकी लड़ाकू विमानों का सामना करती हैं
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मिडिल ईस्ट में जंग जारी काफी खतरमाक मोड़ ले चुकी है. एक तरफ से इजरायल और अमेरिका ईरान को निशाना बना रहे हैं. वहीं ईरान भी हमले का जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा. ईरान अपने पड़ोसी मुल्कों में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट कर रहा है. वो चाहकर भी इजरायल में बहुत ज्यादा हमला नहीं कर पा रहा. दोनों देशों के बीच करीब 1500 किमी की दूरी है. जब ईरान लंबी दूरी की कोई मिसाइल दागता है, तो इजरायल तक पहुंचने में 12-15 मिनट का वक्त लग जाता है. मिसाइल का इजरायल तक पहुंचना इतना आसान नहीं है. ईरान की मिसाइल इजरायल तक पहुंचने से पहले एडवांस डिफेंस सिस्टम और अभेद्य 'पांडव चक्रव्यूह' में प्रवेश करती है. जैसे महाभारत में चक्रव्यूह की सात परतें थीं, वैसे ही इजरायल की ओर बढ़ती हर मिसाइल को आसमान में पांच ऐसी घातक रुकावटों से टकराना पड़ता है, जहां चूक की कोई गुंजाइश नहीं होती.

1. अमेरिकी सैटेलाइट और रडार की पैनी नजर

जैसे ही ईरान इजरायल की तरफ कोई मिसाइल लॉन्च करता है, हजारों किलोमीटर दूर तैनात रडार और अमेरिकी सैटेलाइट्स उसे ट्रैक करना शुरू कर देते हैं. अमेरिका के रडार और सैटेलाइट इतने एडवांस और पावरफुल हैं कि ये चंद सेकंड में मिसाइल का पता लगाकर इजरायल और अमेरिकी डिफेंस को अलर्ट भेज देते हैं. यह चक्रव्यूह की पहली परत है, जो इजरायल को तैयारी के लिए करीब 12 मिनट का कीमती समय देती है.

2. तीन देशों के एयर डिफेंस सिस्टम का करना पड़ता है सामना

ईरान से इजरायल पहुंचने के लिए इराक, जॉर्डन और सीरिया जैसे देशों के एयर स्पेस से गुजरना पड़ता है. इन देशों में पहले से ही अमेरिकी सेना सक्रिय है. वहीं इन देशों के एंटी डिफेंस सिस्टम भी काफी एडवांस हैं. यानी ईरानी मिसाइलें जब यहां से गुजरती हैं, तो उनका सामना अमेरिकी F-35 और F-15 जैसे चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से होता है. वहीं जॉर्डन के डिफेंस सिस्टम भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन का खात्मा करने में सक्षम हैं.

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3. अंतरिक्ष में ही मार करने वाला सिस्टम

यह इस चक्रव्यूह का सबसे घातक हिस्सा है, Arrow-3 सिस्टम. अगर ईरान बैलिस्टिक मिसाइल दागता है, तो इजरायल का Arrow-3 सिस्टम उसे पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर यानी स्पेस में ही इंटरसेप्ट करता है. यह ऐसी तकनीक है जो दुश्मन को अंतरिक्ष में ही ढेर कर देती है, ताकि जमीन पर मलबा गिरने या रासायनिक हथियारों के फैलने का खतरा भी ना रहे. इसके अलावा इजरायली एंटी डिफेंस सिस्टम 'डेविड की गुलेल' (David's Sling) भी दुश्मन की मिसाइल से सीधे टकराकर उसे नष्ट कर सकता है.

4. सीमा के पास इजरायली फाइटर जेट कर देते हैं मिसाइल को ढेर

अगर कोई मिसाइल इन चक्रव्यूह को पार भी कर ले और इजरायली सीमा के पास पहुंच जाए तो उसका स्वागत इजरायली फाइटर जेट कर रहे होते हैं. दरअसल मिसाइल लॉन्च होते ही इजरायल को अलर्ट मिल जाता है और इस 12-15 मिनट में इजरायली डिफेंस सिस्टम तैयार हो चुके होते हैं.

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5. 'आयरन डोम' की अंतिम दीवार

चक्रव्यूह की आखिरी और सबसे मशहूर परत है आयरन डोम (Iron Dome). जब दुश्मन के रॉकेट या मिसाइल आबादी वाले इलाकों के बिल्कुल करीब पहुंच जाते हैं, तब आयरन डोम की मिसाइलें एक्शन में आती हैं. यह सिस्टम केवल उन्हीं मिसाइलों को मारता है जो रिहायशी इलाकों पर गिरने वाली होती हैं.

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