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इस्लामाबाद में शांति की बात, उससे पहले होर्मुज में ईरान और अमेरिका का एक दूसरे से जहाजों पर आघात

US-Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में भले दोनों देशों के बीच शांति रखने और कुछ मांगों को लेकर बात बन भी जाए पर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति उलट है. अमेरिका और ईरान एकदूसरे के जहाजों को जब्त कर रहे हैं.

इस्लामाबाद में शांति की बात, उससे पहले होर्मुज में ईरान और अमेरिका का एक दूसरे से जहाजों पर आघात
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  • अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता इस्लामाबाद में पाकिस्तान के माध्यम से आज आयोजित हो रही है
  • ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिकी सहयोग के संदेह में एक जहाज को जब्त किया है
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी गार्ड्स ने समुद्री सुरक्षा के उल्लंघन के आरोप में दो और जहाजों को हिरासत में लिया
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नई दिल्ली:

अमेरिका और ईरान के बीच सबकुछ ठीक रखने के लिए दूसरे दौर की शांति वार्ता आज है. अमेरिका ने जहां उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की जगह अपने दो नेगोशिएटर जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ को भेजा है तो वहीं ईरान ने किसी को भी न भेजकर पाकिस्तान को अपना मैसेंजर यानी संदेशवाहक चुना है. इस्लामाबाद में भले दोनों देशों के बीच शांति रखने और कुछ मांगों को लेकर बात बन भी जाए पर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति उलट है. अमेरिका और ईरान एकदूसरे के जहाजों को जब्त कर रहे हैं. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने सिर्फ इसलिए एक जहाज को जब्त कर लिया क्योंकि उसपर अमेरिकी सहयोग का आरोप था. अमेरिका भी कहां पीछे रहता,उसने 24 अप्रैल को गाइडेड‑मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS राफेल पेरेल्टा (DDG‑115) ने ईरानी झंडे के तहत चल रहे एक जहाज को रोका था. बताया गया है कि यह जहाज ईरान के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था, तभी अमेरिकी नौसेना ने उसे रोक लिया. 

ईरान की अमेरिकी जहाजों पर कार्रवाई

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक जहाज को जब्त किया था, जिस पर अमेरिकी सेना का सहयोग करने का शक था. यह जानकारी ईरान की अर्ध‑सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट में दी गई है. IRGC के अनुसार, एपामिनोडेस (Epaminodes) नामक इस जहाज को इसलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उसने चेतावनियों को नजरअंदाज कर नियमों का उल्लंघन किया था. अपने बयान में IRGC ने आरोप लगाया कि यह जहाज संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था और ईरानी प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अमेरिकी सेना के साथ सहयोग करने के संदेह में एक जहाज को हिरासत में लिया गया है.हालांकि IRGC ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित उल्लंघन किस तरह के थे. IRGC के मुताबिक, पिछले छह महीनों में यह जहाज कई बार अमेरिकी बंदरगाहों पर गया था, जिसे ईरान‑अमेरिका के बीच जारी तनाव के माहौल में संदिग्ध गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है.

अपने बयान में IRGC ने कहा, “पिछले छह महीनों से IRGC नौसेना की ओर से की गई खुफिया निगरानी और सर्विलांस के दौरान यह पाया गया कि यह जहाज कई बार अमेरिकी बंदरगाहों पर गया था. चेतावनियों को नजरअंदाज करने और कई समुद्री नियमों के उल्लंघन के कारण इस जहाज को IRGC नौसेना ने जब्त कर लिया. फिलहाल इस मामले पर अमेरिकी अधिकारियों या किसी स्वतंत्र समुद्री एजेंसी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसके अलावा, जहाज के झंडे, मालिकाना हक और चालक दल की राष्ट्रीयता जैसी अहम जानकारियां भी अभी स्पष्ट नहीं की गई हैं."

दो और जहाजों को जब्त किया था

IRGC ने इससे कुछ दिन पहले मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में कम से कम दो जहाजों को जब्त किया था.अपने बयान में IRGC नौसेना ने कहा कि उसने MSC फ्रांसेस्का और एपामिनोंडस (Epaminondas) नाम के दो जहाजों को हिरासत में लिया है.
IRGC का आरोप है कि इन जहाजों ने ‘समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाला', आवश्यक अनुमति के बिना संचालन किया और नेविगेशन सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की थी.बयान के अनुसार, इन जहाजों को ईरानी तट की ओर ले जाया गया. IRGC ने साफ शब्दों में कहा,“होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवस्था और सुरक्षा से छेड़छाड़ हमारी रेड लाइन है.” इस बयान के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और ईरान‑अमेरिका तनाव को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.

ईरान की अर्ध‑सरकारी समाचार एजेंसियों फार्स और तस्नीम ने बताया है कि एक तीसरे जहाज को भी निशाना बनाया गया है. यह जहाज ग्रीस के स्वामित्व वाला ‘यूफोरिया (Euphoria)' बताया जा रहा है, जो ईरान के तट के पास फंसा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, एपामिनोंडस (Epaminondas) नामक जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह की ओर जा रहा था. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इससे ठीक एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्र में संघर्षविराम बढ़ाने की घोषणा की थी. गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र के अहम समुद्री शिपिंग मार्ग अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के चलते बार‑बार टकराव के केंद्र बनते रहे हैं.

अमेरिका ने भी की ईरानी जहाजों पर कार्रवाई

एक अहम समुद्री अभियान में अमेरिका के सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने भी पुष्टि की कि 24 अप्रैल को गाइडेड‑मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS राफेल पेरेल्टा (DDG‑115) ने ईरानी झंडे के तहत चल रहे एक जहाज को रोका.बताया गया है कि यह जहाज ईरान के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था, तभी अमेरिकी नौसेना ने उसे रोक लिया. इंटरसेप्शन के बाद अमेरिकी नौसेना के जवान जहाज पर सवार हुए और डिटेल जांच की थी.

एक ब्रीफिंग के दौरान जनरल डैन केन ने कहा कि यह नीति हर राष्ट्रीयता के उन सभी जहाजों पर लागू होती है, जो ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं.यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के तहत की जा रही है.अमेरिका का कहना है कि इस रणनीति का मकसद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखना और ईरान से जुड़े संभावित जोखिमों को नियंत्रित करना है.

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अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान इस महीने की शुरुआत में शुरू किया गया था और इसका असर अब साफ दिखने लगा है.अब तक दर्जनों जहाजों ने टकराव से बचने के लिए अपना रास्ता बदल लिया है.अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 34 जहाज अमेरिकी नौसेना से सामना होने के बाद वापस लौट गए.यह कार्रवाई अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) के साथ समन्वय में की जा रही है.अभियान का लक्ष्य उन जहाजों पर है, जिन पर प्रतिबंधित सामान ले जाने या तथाकथित “डार्क फ्लीट” के तहत काम करने का संदेह है. अमेरिका का कहना है कि इस अभियान का मकसद प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना और समुद्री रास्तों पर अवैध गतिविधियों को रोकना है.

अधिकारियों ने हालिया दिनों में हुई कई बड़ी समुद्री कार्रवाइयों के बारे में बताया है. इनमें से एक मामले में, चेतावनियों को नजरअंदाज किए जाने के बाद एक मालवाहक जहाज को जब्त किया गया, जहां अमेरिकी मरीन सैनिकों ने हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज पर चढ़कर कार्रवाई की. इसके अलावा, प्रतिबंधित ईरानी कच्चे तेल को ढोने के संदेह में बड़े तेल टैंकरों को रोका और जांच की गई.अधिकारियों ने बताया कि यह प्रवर्तन कार्रवाई अब मध्य पूर्व तक सीमित न रहकर भारतीय और प्रशांत महासागर क्षेत्रों तक फैल चुकी है. अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित करना है.

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