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बातचीत, धमकी और ट्रंप का 'थंडरबोल्ट'... क्या परमाणु वार्ता के बीच अमेरिका ईरान पर हमला करने जा रहा है?

US Iran Military Tension: अमेरिका और ईरान ने ओमान में फिर से बातचीत शुरू की है. यह बातचीत पिछले साल जून में हुए इजरायल-ईरान युद्ध के बाद पहली बार हो रही है. ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए.

बातचीत, धमकी और ट्रंप का 'थंडरबोल्ट'... क्या परमाणु वार्ता के बीच अमेरिका ईरान पर हमला करने जा रहा है?
US Iran Military Tension: ईरान और अमेरिका में सैन्य तनाव जारी
  • ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि के तहत यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का अधिकार रखने पर जोर दिया है
  • अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई है और कई लड़ाकू विमान और युद्धपोत तैनात किए हैं
  • अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में परमाणु वार्ता का एक और दौर अगले सप्ताह होने वाला है
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क्या परमाणु समझौते के लिए हो रही बातचीत के बीच ही अमेरिका ईरान पर हमला कर देगा? यह सवाल मिडिल ईस्ट के लिए ही नहीं, पूरी दुनिया के सामने यक्षप्रश्न बनकर खड़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने कहा है कि अमेरिका उसका सम्मान करे और ईरान जबरदस्ती की भाषा नहीं समझता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु अप्रसार संधि के तहत अपने यूरेनियम संवर्धन (इनरिच करने) को जारी रखने का अधिकार है. यह बयान उस समय दिए जा रहे हैं जब दोनों देश ओमान में अगले सप्ताह परमाणु वार्ता के एक और दौर के लिए साथ बैठने वाले हैं.

पेजेशकियान ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "परमाणु मुद्दे पर हमारा तर्क परमाणु अप्रसार संधि में दिए गए अधिकारों पर आधारित है. ईरानी देश ने हमेशा सम्मान के साथ जवाब दिया है, लेकिन जबरदस्ती की भाषा का सामना नहीं कर सकता." ईरानी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को ओमान में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता को ''आगे की ओर बढ़ाया गया कदम'' बताया और कहा कि उनकी सरकार बातचीत की पक्षधर है.

 खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य तैनाती

यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका अपनी सेना को तेजी से बढ़ा रहा है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सरकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जनवरी में हुए प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई को लेकर उस पर दबाव बढ़ा रही है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को माना कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है, लेकिन उन्होंने कहा, "अमेरिका की सैन्य मौजूदगी से हम डरते नहीं हैं.”

बता दें कि जनवरी के अंत में अमेरिका ने अपना एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में भेजा था. पिछले हफ्ते बीबीसी ने रिपोर्ट छापी कि F-15 लड़ाकू विमान, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10C थंडरबोल्ट विमान जॉर्डन के एक एयर बेस पर पहुंचे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि अमेरिकी युद्धपोत USS डेल्बर्ट डी ब्लैक स्वेज नहर से होकर लाल सागर की ओर जा रहा था. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी निगरानी ड्रोन और जासूसी विमान भी सक्रिय थे.

ईरान का सख्त रुख

अमेरिका की सैन्य बढ़त के बावजूद ईरान ने साफ कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) कभी नहीं छोड़ेगा. ईरान का कहना है कि वह अमेरिका की युद्ध की धमकियों से नहीं डरेगा. अमेरिका ने पहले ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई को लेकर हस्तक्षेप की धमकी दी थी. इसी बीच ईरान ने कुछ सुधारवादी नेताओं को गिरफ्तार किया और नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को एक और सजा दी.

अराघची ने तेहरान में कहा कि ईरान को अमेरिका पर ज्यादा भरोसा नहीं है और उसे शक है कि अमेरिका बातचीत को गंभीरता से ले रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस मुद्दे पर चीन और रूस से सलाह कर रहा है. उन्होंने कहा, “हम यूरेनियम संवर्धन क्यों नहीं छोड़ते, चाहे हम पर युद्ध ही क्यों न थोपा जाए? क्योंकि कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना है.”

अमेरिका-ईरान बातचीत

शुक्रवार को अमेरिका और ईरान ने ओमान में फिर से बातचीत शुरू की. यह बातचीत पिछले साल जून में हुए इजरायल-ईरान युद्ध के बाद पहली बार हो रही है. ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए. बदले में ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर भरोसा बढ़ाने वाले कुछ कदम उठाने को तैयार है.

पश्चिमी देश और इजरायल का कहना है कि ईरान परमाणु बम बनाना चाहता है, लेकिन ईरान इससे इनकार करता है. अराघची ने कहा, “वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम नहीं चाहते. हमारा असली हथियार बड़ी ताकतों को ‘ना' कहने की ताकत है.”

अमेरिका और इजरायल चाहते हैं कि बातचीत में ईरान की मिसाइलें और क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को दिया गया समर्थन भी शामिल हो, लेकिन ईरान इसे मानने से इंकार करता है. इस बीच अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए नए प्रतिबंध भी लगाए हैं. तेहरान में अराघची ने कहा कि लगातार प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई यह शक पैदा करती है कि दूसरा पक्ष वास्तव में ईमानदारी से बातचीत करना चाहता है या नहीं.

यह भी पढ़ें: इधर बातचीत- उधर हमले की तैयारी! अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान से निकलने को क्यों कहा

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