- ईरान ने अमेरिकी विमानों को गिराने के लिए स्वदेशी मिसाइल तकनीक और रूस-चीन के आधुनिक रडार का उपयोग किया है
- थर्ड खोरदाद, बावर 373 और खोरदाद 15 जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ईरान की मिसाइल क्षमता को बढ़ाते हैं
- ईरान ने पैसिव डिटेक्शन और चीनी YLC-8B रडार के जरिए अमेरिकी स्टील्थ विमानों का पता लगाने की तकनीक विकसित की
ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका अपनी एयर सुपीरियोरिटी का खूब दम भर रहा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में ईरान ने अमेरिका के आसमानी घमंड को दुनिया के सामने धूल चटा दी है. ये खबर अब हर जगह छपी है कि अमेरिकी के बेमिसाल माने जाने वाले मॉडर्न विमान कैसे ईरान गिरा दे रहा है. मजबूरन अमेरिकी पायलट को इजेक्ट करना पड़ा और बड़े खतरे वाला रेस्क्यू ऑपरेशन चला अमेरिका ने अपने पायलट को बचाया. जिन फाइटर जेट पर अमेरिका इतना इतराता है कि उन्हें दुनिया में मुंह मांंगी कीमत पर बेचता है, वो भी अपनी शर्तों पर. उन्हें ईरान आखिर कैसे आसमान में अपना शिकार बना रहा है. ये सवाल तो हर किसी के जेहन में होगा तो चलिए जानते हैं कि ये हो कैसे रहा है.
ईरान के पास कौन सी तकनीक, जिनसे गिराए जा रहे अमेरिकी जेट्स
ईरान द्वारा अमेरिकी विमानों और ड्रोनों को निशाना बनाने के पीछे उसकी स्वदेशी मिसाइल तकनीक और रूस-चीन से प्राप्त आधुनिक रडार प्रणालियों का एक मिला-जुला नेटवर्क है. हालिया (अप्रैल 2026) घटनाओं और पिछले रिकॉर्ड्स के आधार पर, ईरान मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग कर रहा है.
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अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम (SAM)
ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों को और अधिक घातक बनाया है.
- 3rd Khordad (थर्ड खोरदाद): यही सिस्टम 2019 में अमेरिका के सबसे महंगे ड्रोन RQ‑4 Global Hawk को गिराने के लिए जाना जाता है. यह एक मोबाइल सिस्टम है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर उन्हें निशाना बना सकता है.
- Bavar‑373 (बावर‑373): इसे ईरान का “S‑300” कहा जाता है. इसका नया वर्जन Bavar‑373‑II लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस है और दावा किया जाता है कि यह स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सकता है.
- Khordad‑15: यह सिस्टम ‘सय्याद‑3' मिसाइलों का उपयोग करता है और 150 किलोमीटर दूर से ही लड़ाकू विमानों और ड्रोनों का पता लगाने में सक्षम है.
एंटी‑स्टील्थ रडार तकनीक
अमेरिका के F‑35 और F‑15 जैसे विमानों से निपटने के लिए ईरान ने अपनी रडार क्षमता को मजबूत किया है
- Passive Detection: पारंपरिक रडार जहां सिग्नल भेजते हैं, वहीं ईरान पैसिव सेंसर का उपयोग कर रहा है। ये सेंसर विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी (Infrared) या उसके रेडियो संकेतों को बिना सिग्नल भेजे पकड़ लेते हैं, जिससे पायलट को ट्रैक किए जाने की भनक नहीं लगती.
- चीनी सहायता (YLC‑8B रडार): फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने ईरान को YLC‑8B जैसे आधुनिक रडार उपलब्ध कराए हैं, जो खास तौर पर अमेरिकी स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने के लिए तैयार किए गए हैं.
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इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर
ईरान केवल मिसाइल सिस्टम तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पर भी जोर देता है.
- GPS Spoofing: ईरान पहले अमेरिकी ड्रोनों जैसे RQ‑170 के GPS सिग्नल को हैक कर उन्हें भटकाने या सुरक्षित लैंड कराने का दावा कर चुका है.
- Signal Jamming: अमेरिकी विमानों के संचार और रडार सिस्टम को बाधित करने के लिए ईरान के पास शक्तिशाली जैमिंग तकनीक मौजूद है.
लेयर्ड डिफेंस नेटवर्क
ईरान ने अपने सुरक्षा तंत्र को कई परतों में विकसित किया है
- निचली परत: कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और ड्रोनों के लिए ‘मिस्बाह' और ‘समावत' जैसी ऑटोमैटिक गन.
- मध्यम और ऊपरी परत: ‘खोरदाद' और ‘बावर' जैसी मिसाइल प्रणालियां, जो 20 से 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं.
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में ‘सय्याद‑4B' इंटरसेप्टर और चीन से प्राप्त AI‑आधारित एयर सर्विलांस सिस्टम की भी अहम भूमिका है
(एनडीटीवी के लिए अमोद प्रकाश की रिसर्च रिपोर्ट)
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