मध्य पूर्व में जारी जंग के बीच शांति की आस अब पूरी तरह धुंधली पड़ चुकी है. लेबनान पर इजरायली हमलों से भड़के ईरान ने अमेरिका के साथ जारी बैक-चैनल बातचीत और मैसेज के आदान-प्रदान पर पूरी तरह से रोक दिया है. ईरानी सरकारी मीडिया तस्नीम न्यूज के मुताबिक, तेहरान की नेगोशिएटिंग टीम ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका से होने वाले हर तरह के संपर्क पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है. करीब तीन महीने से चल रहे इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए किए जा रहे तमाम राजनयिक प्रयास अब पूरी तरह से पटरी से उतरते दिख रहे हैं. यानी अब ईरान और अमेरिका युद्ध को खत्म करने को लेकर कोई डील नहीं करेंगे.
ईरान और उसके 'रेसिस्टेंस फ्रंट' (जिसमें यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह और इराक के शिया गुट शामिल हैं) ने एक नया एजेंडा तैयार किया है. इसके तहत वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह से बंद करने और अन्य मोर्चों को सक्रिय करने की धमकी दी गई है, ताकि इजरायल और उसके मददगार देशों को पैगाम दिया जा सके.
फिर वैश्विक व्यापार पर मंडराया खतरा
अगर ईरान के इशारे पर यमन के हूती विद्रोही इस जंग में एक और नया मोर्चा खोलते हैं, तो उनका सबसे पहला और सीधा निशाना बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य होगा. यमन के तट पर स्थित यह बेहद संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक शिपिंग के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि यहीं से होकर सारा समुद्री ट्रैफिक स्वेज नहर की तरफ बढ़ता है. इसे ब्लॉक करने का सीधा मतलब है दुनिया भर के व्यापार और सप्लाई चेन को ठप कर देना.
अराघची ने दिया अल्टीमेटम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बेहद सख्त लहजे में अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है. लेबनान में चल रहे इजरायली सैन्य ऑपरेशनों का जिक्र करते हुए अराघची ने लिखा, "किसी भी एक मोर्चे पर उल्लंघन का मतलब है कि सभी मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा. इसके बाद जो भी गंभीर परिणाम होंगे, उनकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल की होगी."
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