- ईरान में दिसंबर के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद छात्र फिर से सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं
- तेहरान और मशहद की कई यूनिवर्सिटियों में छात्रों ने खामेनेई के खिलाफ तानाशाह के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया
- अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और परमाणु हथियार विकास के शक के बीच ईरान में बाहरी हमले का भय बना हुआ है
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. दिसंबर में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के 40 दिन बाद एक बार फिर से विरोध की चिंगारी भड़क उठी है, हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं. शनिवार से छात्र एक बार फिर से सड़कों पर हैं. रविवार के लिए भी प्रदर्शनों की अपील की गई है. इससे शांति की उम्मीद कुछ कम ही नजर आ रही है. ईरान की कई यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स नारेबाजी कर खामेनेई के खिलाफ अपना गुस्सा दिखा रहे हैं. वायरल हो रहे कई वीडियो में छात्र कथित तौर पर फारसी में बी शराफ यानी कि शर्मनाक चिल्लाते हुए सुनाई दिए. तेहरान की शरीफ टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में छात्रों की भारी भीड़ सरकार विरोधी नारे लगाती देखी गई. पिछले महीने हुई जानलेवा सुरक्षा कार्रवाई के बाद यह सबसे बड़ा प्रदर्शन है. सवाल यह है कि इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे आखिर वजह क्या है.
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बाहरी हमले के डर के बीच हो रहे विरोध प्रदर्शन
दरअसल अमेरिका ईरान के पास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वह सीमित सैन्य हमले के बारे में विचार कर रहे हैं. दरअसल अमेरिका और उसके सहयोगी यूरोपीय देशों को शक है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, हालांकि ईरान इस बात को नकारता रहा है. ट्रंप ने कहा है कि शायद अगले 10 दिनों में पूरी दुनिया को ये पता चल जाएगा कि ईरान के साथ कोई समझौता होगा या फिर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. अब ईरान में संभावित बाहरी हमले के डर के बीच खामेनेई के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतर आए हैं.
Iranians on campus cheer as the lion and sun flag is raised during protests now in Tehran 😍🫶🏼
— Emily Schrader - אמילי שריידר امیلی شریدر (@emilykschrader) February 22, 2026
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शोक सभाओं के दौरान फिर भड़के छात्र
विरोध प्रदर्शनों का नया दौर जनवरी में हुए हुई घातक हिंसा के 40 दिन पूरे होने पर आयोजित शोक सभाओं के दौरान शुरू हुआ. दरअसल इस दौरान 3100 से ज्यादा लोग मारे गए थे. हालांकि आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे हैं. शोक सभाओं के दौरान छात्रों की सुरक्षाबलों संग तीखी झड़पें हुईं, इस वजह से एक बार फिर से अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया है.
तेहरान और मशहद में फिर सड़कों पर छात्र
बांग्लादेशी मीडिया यूएनबी ने बताया कि बीबीसी ने फुटेज वेरिफाई किया है, जिसमें शनिवार को तेहरान में शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के कैंपस में प्रदर्शनकारी विरोध करते दिख रहे हैं. बाद में प्रदर्शनकारियों और सरकार के समर्थकों के बीच झड़प की खबर मिली. दूसरे प्रदर्शनों में तेहरान की शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी में धरना और नॉर्थ-ईस्ट शहर मशहद में एक रैली शामिल थी. इस दौरान यूनिवर्सिटी के छात्र इससे पहले जनवरी में हुए बड़े हिंसक और भयानक विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों को याद कर रहे थे.
शरीफ यूनिवर्सिटी के वेरिफाइड फुटेज में सैकड़ों स्टूडेंट्स दिख रहे हैं, जिनमें से कई ईरानी झंडे लहरा रहे हैं और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के लिए 'तानाशाह की मौत' जैसे नारे लगाते हुए मार्च कर रहे हैं. बांग्लादेशी मीडिया यूएनबी ने बताया कि पास में सरकार के समर्थक भी मौजूद थे और खबर है कि दोनों समूहों के बीच टकराव हो गया.
अमीर कबीर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में भी इसी तरह के प्रदर्शनों की पुष्टि हुई, और मशहद में, स्टूडेंट्स ने कथित तौर पर 'आजादी, आजादी' और 'स्टूडेंट्स, अपने अधिकारों के लिए चिल्लाओ' के नारे लगाए. दूसरी जगहों पर भी और विरोध प्रदर्शनों की खबर है, जिसमें रविवार को और रैलियों की मांग की गई है। अभी तक किसी गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं है.
ईरान को सता रहा अमेरिकी हमलों का डर?
ईरान में दिसंबर में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी. अब यह देश के धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल चुका है. देश में अशांति का माहौल ऐसे समय में पैदा हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत चल रही है. इस बीच ट्रंप ने क्षेत्र में दो विमानवाहक पोतों की तैनाती कर दी है. ईरान इसे उकसाने वाला कदम करार दे रहा है. ईरान सरकार के सामने इन दिनों चुनौती दोहरी है. एक तो अपनी जमीन पर उठ रहे विद्रोह की चिंगारी को शांत करना और दूसरी तरफ परमाणु वार्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंजाम तक पहुंचाना. रविवार के लिए भी प्रदर्शनों की अपील की गई है. इससे शांति की उम्मीद कुछ कम ही नजर आ रही है.
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