- ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मोज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है
- मोज्तबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद तेहरान में उनके खिलाफ नाराबाजी हो रही है
- अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेताओं की हत्या की है
अमेरिका-इजरायल की तरफ से शुरू किए गए जंग के बीच ईरान में बड़ा फैसला लिया गया है. जंग के पहले ही दिन जान गंवाने वाले पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया है. इस बीच सबसे बड़ी खबर है कि इस ऐलान के तुरंत बाद तेहरान में उनके खिलाफ नारे सुनाई दिए. सोशल मीडिया पर 17 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुछ महिलाएं फारसी भाषा में “मुजतबा की मौत हो” जैसे नारे लगाती हुई सुनाई दे रही हैं.
People chanted “Death to Mojtaba” from their windows in Tehran's Ekbatan neighborhood early Monday shortly before Iran's Assembly of Experts announced Mojtaba Khamenei as the country's new supreme leader, according to a video shared on social media. pic.twitter.com/nEiM7x7AbM
— Iran International English (@IranIntl_En) March 8, 2026
वीडियो में दूर से धार्मिक नारे भी सुनाई दे रहे हैं. यह वीडियो रात के समय किसी इमारत की खिड़की से बनाया गया लगता है.
हालांकि NDTV इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
मोज्तबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर
ईरान में सुप्रीम लीडर चुनने वाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने रविवार शाम घोषणा की कि मुजतबा खामेनेई को उनके पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई का उत्तराधिकारी बनाया गया है. अयातुल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान पर हुए इजरायल और अमेरिका के हमलों में मौत हो गई थी. यानी जंग के पहले ही दिन.
56 साल के मुजतबा खामेनेई 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बने हैं. उनकी नियुक्ति से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो सकते हैं. ट्रंप ने ऐलान से पहले रविवार को कहा था कि वॉशिंगटन को भी इस चयन में अपनी राय देने का अधिकार होना चाहिए. अब डोनाल्ड ट्रंप ने मोज्तबा खामेनेई के इस प्रमोशन पर केवल इतना कहा है कि "हम देखेंगे कि क्या होता है."
अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच जंग
मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट तब पैदा हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए. इन हमलों में 86 साल के अली खामेनेई और ईरान के कई शीर्ष नेता मारे गए. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं.
रिपोर्टों के अनुसार अब तक ईरान में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में एक दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए हैं. इस युद्ध में कम से कम 7 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है. ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि उन्होंने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि ईरान से तुरंत खतरा पैदा हो गया था. ट्रंप ने कहा, “अगर हम पहले हमला नहीं करते, तो वे इजरायल पर हमला कर देते और अगर संभव होता तो हम पर भी हमला करते.”
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