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सभ्यता नष्ट करने का ट्रंप का गुरूर और जंग लड़ने की ईरान की जिद, आगे क्या होगा? 

ईरान के उर्जा और परिवहन ढांचे पर अमेरिका हमला करता है तो उससे निपटने के लिये ईरान की रणनीतिक तैयारी है. एक तरफ पावर प्लांट पर हमला होने की सूरत में मानव ढाल बनाने की बात कही गई तो दूसरी तरफ इसी को लेकर अगर नागरिक पर हमला होता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की किरकिरी करवाने का पूरा ब्लू प्रिंट बना लिया गया है. 

सभ्यता नष्ट करने का ट्रंप का गुरूर और जंग लड़ने की ईरान की जिद, आगे क्या होगा? 
  • अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को दी गई डेडलाइन के अंतिम घंटों में गंभीर धमकी दी है.
  • ईरान ने इजरायल के डिमोना शहर पर मिसाइल हमले कर अमेरिका की धमकियों को नजरअंदाज किया है.
  • अमेरिका और इजरायल ने ईरान के 13000 से अधिक टारगेट को तबाह किया है, जिससे तनाव और बढ़ा है.
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई पोस्ट में खुली धमकी है कि आज रात एक सभ्यता खत्म होने वाली है. दो दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने अश्लील भाषा का उपयोग किया था.लेकिन इन सबके बीच ईरान की तबाही के लिए ट्रंप ने जो डेडलाइन दी है, उसमें बस कुछ ही घंटे बचे हैं. लेकिन इजरायल के ऐटमी शहर डिमोना पर खैबर सेकंड मिसाइलों से अपने ताजा हमलों के साथ ईरान ने इशारा कर दिया है कि अमेरिका की धमकियों की वह कोई खास परवाह नहीं करता.

इधर, इजरायल भी हमलों में कोई कसर नहीं छोड़ रहा. पहले उसने ईरानी नागरिकों को चेतावनी दी कि वे ट्रेनों में सफर न करें और फिर कसान के पास एक रेलवे पुल उड़ा दिया. ट्रंप बार-बार दावा करते हैं कि उनकी ईरान के नेतृत्व से डील हो रही है, जबकि ईरान हर बार किसी भी तरह की डील की बात खारिज करता है.

ईरान को गारंटी चाहिए?

सवाल है, दावों-प्रतिदावों के भीतर का सच क्या है? अमेरिका जो सीजफायर चाहता है, ईरान ने उससे इनकार किया है. अमेरिका को भिजवाए गए अपने 10 सूत्री प्रस्ताव में उसका साफ कहना है कि सीजफायर हल नहीं है, बल्कि युद्ध हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए. ईरान बार-बार यह भी याद दिलाता है कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ही उस पर हमला किया है. इसलिए यह गारंटी उसे चाहिए कि बातचीत के बीच फिर अमेरिका हमला न कर दे. वह चाहता है कि उसपर प्रतिबंध हटाया जाए . अगर ऐसा होता है तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल सकता है. ईरान तय कर चुका है कि अब उसे अमेरिका के आगे झुकना नही है. उसका अब अमेरिका पर भरोसा भी नहीं रहा है.

दरअसल, ट्रंप और नेतन्याहू दोहरी रणनीति पर काम कर रहे हैं. वे ईरान को झुकाना तो चाहते हैं और यह दिखाना चाहते हैं कि वह बातचीत की मेज पर समझौता कर रहा है. लेकिन उन्होंने सामरिक दबाव में भी कोई कमी नहीं छोड़ी. यही वजह है कि ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमले लगातार जारी हैं.

ईरान में 13000 हजार से ज्यादा टारगेट को तबाह

ईरान के तेल भंडार खार्ग द्वीप पर अमेरिका और इजराइल ने फिर से हमला किया है. इसको लेकर आईआरजीसी ने फिर से दोहराया है कि अगर अमेरिकी सेना ने रेड लाइंस पार की तो उसका जवाब क्षेत्र से परे होगा. ईरान भी लगातार इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकाने पर हमला करने से चूक नहीं रहा है. 28 फरवरी से अब तक अमेरिका ईरान में 13000 हजार से ज्यादा टारगेट को तबाह कर चुका है .

अमेरिकी धमकी के बावजूद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. ईरान की पकड़ को देखते हुए भारत समेत कई देशों ने सीधे ईरान से बातचीत करके अपने जहाजों के लिये रास्ता निकाल लिया है.लेकिन ईरान अमेरिका के आगे झुकने बजाए अपनी शर्तो पर अड़ा हुआ है. अमेरिका लगातार सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है. लेकिन ईरान का हमला पहले से ज्यादा घातक हो गया है. वह अमेरिकी और इजराइल के डिफेस सिस्टम को लगातार धत्ता बताकर खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है. जिस तरह से अमेरिका और इजरायल  मिलकर ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे है उसी तरह ईरान भी खाड़ी देशों में अमेरिका के सहयोगी देशों के तेल डिपो और दूसरे ढांचे पर हमला कर रहा है.

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