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ईरान के भीतर कट्टरपंथी कैसे अमेरिका के साथ डील को बेपटरी करना चाहते हैं? मोजतबा की लीडरशिप पर भी नजर

तेहरान की सड़कों पर कट्टरपंथियों ने बड़ी रैलियां शुरू कर दी हैं. प्रदर्शनों में शामिल लोग आखिरी बूंद खून तक लड़ने और अमेरिका को सजा देने की बातें कर रहे हैं.

ईरान के भीतर कट्टरपंथी कैसे अमेरिका के साथ डील को बेपटरी करना चाहते हैं? मोजतबा की लीडरशिप पर भी नजर
तेहरान की सड़कों पर कट्टरपंथियों ने बड़ी रैलियां शुरू कर दी हैं.
AFP

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खत्म होने की उम्मीदें तो जगी हैं, लेकिन तेहरान के भीतर ही मतभेद की दीवार खड़ी हो चुकी है.अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर बातचीत चल रही है, इस बीच ईरान का एक प्रभावशाली कट्टरपंथी धड़ा इसे पटरी से उतारने की जी-तोड़ कोशिश कर रहा है. यह गुट संसद से लेकर सुरक्षा परिषदों तक है.

हालांकि, माना जा रहा है कि यह कट्टरपंथी समूह बहुसंख्यक राय का प्रतिनिधित्व नहीं करता, लेकिन अपनी रैलियों, सोशल मीडिया और सरकारी टीवी के जरिए उन्होंने सरकार पर भारी दबाव बना दिया है. दूसरी तरफ, वाशिंगटन में भी स्थिति अभी साफ नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सिचुएशन रूम में कैबिनेट के साथ लंबी बैठक की, लेकिन समझौते पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई. तेहरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलिबाफ भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं और साफ कह चुके हैं कि जब तक अमेरिका पहल नहीं करता, ईरान एक इंच पीछे नहीं हटेगा.

सरकारी टीवी पर छिड़ी जंग

ईरान के भीतर मचे इस घमासान का सबसे बड़ा केंद्र वहां का 'स्टेट टीवी' बन गया है. कट्टरपंथी प्रबंधन के हाथ में होने के कारण, सरकारी चैनल लगातार बातचीत को 'विफल' दिखाने की कोशिश कर रहा है. राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए टीवी अधिकारियों को फटकार लगाई है. उन्होंने कहा कि जब पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई खुद बातचीत की मेज पर जाने को राजी थे, तो अब इसे गलत क्यों बताया जा रहा है?

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विवाद का आलम यह है कि तेहरान की सड़कों पर कट्टरपंथियों ने बड़ी रैलियां शुरू कर दी हैं. प्रदर्शनों में शामिल लोग आखिरी बूंद खून तक लड़ने और अमेरिका को सजा देने की बातें कर रहे हैं. रूढ़िवादी सांसद इब्राहिम अजीजी जैसे नेता तो खुलेआम कह रहे हैं कि ईरान इस युद्ध का विजेता है, इसलिए शर्तें हम तय करेंगे. 

नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर भी साधा गया निशाना

हैरत की बात यह है कि इस राजनीतिक लड़ाई में अब नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को भी घसीटा जा रहा है. अपने पिता अली खामेनेई की जगह लेने वाले मोजतबा को अपनों के ही तीखे हमलों का सामना करना पड़ा है. कट्टरपंथी सांसद हामिद रसायी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में पैगंबर नूह के बेटे का जिक्र करते हुए उन्हें 'विद्रोही' और 'काली भेड़' बताया.

हालांकि चौतरफा घिरने के बाद रसायी ने सफाई दी कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि ईरान की सत्ता के शीर्ष पर सब कुछ ठीक नहीं है. कट्टरपंथी धड़ा केवल अमेरिका से डील का विरोधी नहीं है, बल्कि वह उन ताकतों को भी कमजोर करना चाहता है जो नरमी बरतने के पक्ष में हैं.

'गुप्त' चिट्ठी से बनाया जा रहा माहौल

सौदा बिगाड़ने की सबसे बड़ी कोशिश राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बाघेरी कानी की ओर से देखी गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानी ने सर्वोच्च नेता को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि ईरानी वार्ताकार इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सामने बहुत ज्यादा झुक रहे हैं. कानी वही शख्स हैं जिन्होंने उस चेतावनी भरे पत्र पर दस्तखत करने से मना कर दिया था, जिसमें गालिबाफ और पेज़ेश्कियान ने देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और बजट संकट का हवाला दिया था.

कानी ने उसके गुप्त विवरणों को कट्टरपंथी सांसदों के साथ साझा भी कर दिया ताकि जनता के बीच बातचीत के खिलाफ माहौल बनाया जा सके. बावजूद इसके, सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई फिलहाल अपनी वार्ता टीम के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. उन्होंने संसद को संदेश भेजा है कि वे आपसी मतभेदों को बढ़ाना बंद करें, क्योंकि आंतरिक लड़ाई केवल बाहरी दुश्मनों को फायदा पहुंचाएगी.

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