- नेपाल में भारी बाढ़ के कारण करीब तीन सौ भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, फोन और बिजली सेवा बाधित है
- भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हॉटलाइन शुरू की है और नेपाली सेना के साथ मिलकर फंसे भारतीयों की सहायता कर रहा है
- भारत ने नेपाल को राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है और आवश्यकताओं के अनुसार सहायता प्रदान करता रहेगा
भारत नेपाल डायलॉग अन्वीक्षा के लिए एनडीटीवी राजधानी काठमांडू पहुंची. इसमें नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव पहुंचे तो उन्होंने नेपाल के मौजूदा हालात पर बात की. साथ ही भारत की तरफ से की जा रही मदद और भारतीयों की स्थिति पर विस्तार से बात की.
करीब 300 भारतीयों से संपर्क नहीं
नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि कल सुबह हम जब उठे भी थे और बातचीत हो रही थी तब भी ये किसी ने नहीं सोचा की ऐसी त्रासदी होगी. खैर त्रासदी हुई है. उसके बाद से ही हमारा दूतावास ने यहां पर जो विभिन्न ट्रैवल एजेंसी हैं, उनसे संपर्क साधा था. हमारी एक कंपनी के कुछ लोग यहां काम कर रहे थे. एक हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट है अपर त्रिशूली में. वहां के मैनेजर से भी बात हुई थी. ये पता लगाने के लिए कि भारतीय सुरक्षित हैं कि नहीं. दोपहर तक हमें जो जानकारी मिली कि कई भारतीय जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उस रूट का उपयोग करते हैं, वहां पर फंसे हुए हैं. कुछ कंपनी के लोग भी फंसे हुए हैं. आज सुबह तक की जो जानकारी हमारे पास है करीब 300 के आसपास लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. और संपर्क इसलिए नहीं हो पाया है क्योंकि उस क्षेत्र में बिजली नहीं है. ना फोन की सुविधा चल रही है. बाढ़ से मोबाइल टावर्स भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. पावर स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं तो मेरी उम्मीद है कि आज शाम तक या कल सुबह तक हमें बेहतर स्थिति की जानकारी होगी.
भारतीयों के लिए दूतावास सक्रिय
भारतीय राजदूत ने बताया कि हमारी एम्बेसी ने इमरजेंसी हॉटलाइन्स खोल रखी है. तीन फोन लाइन्स 24 घंटों अवेलेबल है. हम नेपाली आर्मी और नेपाल की विभिन्न संस्थाओं के साथ लगातार संपर्क में है. सर्च एंड रेस्क्यू जैसे आगे बढ़ेगा, जैसे-जैसे जानकारी अवेलेबल होगी हम साझा करते रहेंगे. हमारा उद्देश्य ये रहेगा कि जितने भी भारतीय यहां फंसे हैं, उस इलाके में उनको नेपाली सेना की और नेपाली संस्थाओं की सहायता के साथ सुरक्षित काठमांडू वापस ला सकें और काठमांडू से फिर भारत की उनकी यात्रा करवा सकें. अभी बहुत सारा रिलीफ मटीरियल भारत से नेपाल की तरफ पहुंचाया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने भी एक औपचारिक बातचीत की है.
अब तक भारत ने क्या की मदद
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने एनडीटीवी को बताया कि कल से हम नेपाल सरकार के संपर्क में थे. पीएम मोदी की भी पीएम बालेन से बात हुई और जैसा आप सब जानते हैं कि भारत हमेशा से पड़ोस में मदद करने वाला पहला देश रहा है. नेपाल में पहले भी जब त्रासदियां हुई थीं, 2015 के भूकंप के बाद हालांकि वो इस स्केल पर नहीं हुई थीं तो भारत और भारतीय सेना और भारत की मदद सामाग्री सबसे पहले पहुंचती है. नेपाल की भी यही इच्छा रहती है कि भारत सबसे पहले मदद करे. भारत के प्रधानमंत्री ने सबसे पहले पीएम बालेन को सांत्वना दी और फिर भरोसा दिलाया कि भारत और भारत के लोग इस संकट की घड़ी में नेपाल के साथ हैं.
साथ ही जो भी मानवीय सहायता की जरूरत है वो भारत उपलब्ध कराएगा. फिर हमने नेपाल के विदेश मंत्री और अधिकारियों से बात की और आकलन किया कि किन चीजों की जरूरत नेपाल को पड़ेगी. पहली खेप हमने कल रात नेपाल को पहुंचा दिया है. दूसरी खेप आज आने वाली है. ये कार्य आने वाले दिनों तक चलता रहेगा. नेपाल को भी अभी ये आकलन करने में समय लगेगा कि उन्हें किन चीजों की जरूरतें आगे होंगी. 2015 का भूकंप और ये त्रासदी दोनों अलग तरह की हैं. भूकंप का नुकसान क्षेत्र काफी ज्यादा था. उसमें इमारतों को काफी नुकसान हुआ था. ये बाढ़ दो नदियों के आसपास आई है और उनके किनारे बसे गांव और शहर तबाह हो गए हैं.
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