
वॉशिंगटन:
सीरिया और ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों के समर्थन में आते हुए भारत ने शुक्रवार को कहा कि कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ओबामा से एक घंटे तक चली मुलाकात के बाद व्हाइट हाउस स्थित ओवल ऑफिस में ओबामा के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने उनके दृष्टिकोण की और कूटनीति को एक और मौका देने में उनके हौसले की प्रशंसा की।’
उन्होंने कहा कि भारत इन पहल का पूरी तरह समर्थन करता है क्योंकि पश्चिम एशिया में 60 लाख भारतीय रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘वे वहां अपनी आजीविका अर्जित करते हैं जो हमारे स्वतंत्रता के मूल्यों को बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण है।’ सिंह ने कहा, ‘इसलिए पश्चिम एशिया में, ईरान में, सीरिया में शांति और स्थिरता के लिए जो भी महत्वपूर्ण है, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित में है। यह निश्चित तौर पर उस क्षेत्र की जनता के हित में है जहां मैं और भारत स्थित है।’
ओबामा ने सीरिया के रासायनिक हथियारों को समाप्त करने के संबंध में ‘सीरिया पर सुरक्षा परिषद’ के अन्य सदस्यों के साथ साझेदारी में अमेरिका और रूस के बीच हुए समझौते पर बयान देने के लिए मनमोहन सिंह से इजाजत मांगी। उन्होंने कहा, ‘हालांकि आगे चुनौतियां हैं लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है।’
ओबामा ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय न केवल बातचीत के लिए एकत्रित हो रहा है बल्कि प्रभावी अंतरराष्ट्रीय नियमों के लिहाज से तथा सभी की सुरक्षा के लिए समन्वित कार्रवाई में भी सक्षम है। इनमें क्षेत्र के लोग और जाहिर तौर पर सीरिया के भी लोग शामिल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आज सीरिया के रासायनिक हथियारों के भंडार को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर समझौता होने की प्रशंसा की और इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी जीत बताया।
उन्होंने उस ढांचे की प्रशंसा की जो कानूनी रूप से बाध्य, सत्यापनयोग्य और लागू होने योग्य है। उन्होंने कहा कि सैन्य हमला करने की उनकी धमकी ने समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन वह हमेशा कूटनीतिक समाधान को तरजीह देते हैं।
ओबामा ने कहा, ‘मैंने हमेशा कूटनीतिक तरीके से समाधान को तरजीह दी है।’ ओबामा ने प्रस्ताव और निरस्त्रीकरण की योजनाओं की प्रशंसा की।
कल हुए समझौते के अनुसार, प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत सीरिया को अपना रासायनिक हथियारों का भंडार खत्म करना होगा और निरीक्षकों को सभी स्थलों तक पहुंच देनी होगी। ओबामा ने कहा कि अभी इस संबंध में कई कार्य किये जाने हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ओबामा से एक घंटे तक चली मुलाकात के बाद व्हाइट हाउस स्थित ओवल ऑफिस में ओबामा के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने उनके दृष्टिकोण की और कूटनीति को एक और मौका देने में उनके हौसले की प्रशंसा की।’
उन्होंने कहा कि भारत इन पहल का पूरी तरह समर्थन करता है क्योंकि पश्चिम एशिया में 60 लाख भारतीय रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘वे वहां अपनी आजीविका अर्जित करते हैं जो हमारे स्वतंत्रता के मूल्यों को बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण है।’ सिंह ने कहा, ‘इसलिए पश्चिम एशिया में, ईरान में, सीरिया में शांति और स्थिरता के लिए जो भी महत्वपूर्ण है, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित में है। यह निश्चित तौर पर उस क्षेत्र की जनता के हित में है जहां मैं और भारत स्थित है।’
ओबामा ने सीरिया के रासायनिक हथियारों को समाप्त करने के संबंध में ‘सीरिया पर सुरक्षा परिषद’ के अन्य सदस्यों के साथ साझेदारी में अमेरिका और रूस के बीच हुए समझौते पर बयान देने के लिए मनमोहन सिंह से इजाजत मांगी। उन्होंने कहा, ‘हालांकि आगे चुनौतियां हैं लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है।’
ओबामा ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय न केवल बातचीत के लिए एकत्रित हो रहा है बल्कि प्रभावी अंतरराष्ट्रीय नियमों के लिहाज से तथा सभी की सुरक्षा के लिए समन्वित कार्रवाई में भी सक्षम है। इनमें क्षेत्र के लोग और जाहिर तौर पर सीरिया के भी लोग शामिल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आज सीरिया के रासायनिक हथियारों के भंडार को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर समझौता होने की प्रशंसा की और इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी जीत बताया।
उन्होंने उस ढांचे की प्रशंसा की जो कानूनी रूप से बाध्य, सत्यापनयोग्य और लागू होने योग्य है। उन्होंने कहा कि सैन्य हमला करने की उनकी धमकी ने समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन वह हमेशा कूटनीतिक समाधान को तरजीह देते हैं।
ओबामा ने कहा, ‘मैंने हमेशा कूटनीतिक तरीके से समाधान को तरजीह दी है।’ ओबामा ने प्रस्ताव और निरस्त्रीकरण की योजनाओं की प्रशंसा की।
कल हुए समझौते के अनुसार, प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत सीरिया को अपना रासायनिक हथियारों का भंडार खत्म करना होगा और निरीक्षकों को सभी स्थलों तक पहुंच देनी होगी। ओबामा ने कहा कि अभी इस संबंध में कई कार्य किये जाने हैं।
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