नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत की राजकीय यात्रा पर आए फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ मंगलवार को द्विपक्षीय सम्बंधों के विस्तार पर चर्चा की।
वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
मनमोहन सिंह ने इस वर्ष फलस्तीन की आर्थिक जरूरतों में मदद के लिए फलस्तीन के बजट में एक करोड़ डॉलर के योगदान की भी घोषणा की।
वार्ता के दौरान सिंह ने एक सम्प्रभुता सम्पन्न, स्वतंत्र और संयुक्त फलस्तीन राज्य, जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो और जिसका इस्रायल के साथ शांतिपूर्ण सम्बंध हो, के लिए भारतीय समर्थन दोहराया।
अब्बास के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'फलस्तीन के हित को समर्थन भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।' उन्होंने कहा, 'भारत ने यूनेस्को में पूर्ण सदस्य का दर्जा प्राप्त करने के फलस्तीन राज्य के प्रयासों को समर्थन देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हम संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण और बराबरी की सदस्यता के फलस्तीन के प्रयासों को भी समर्थन देते रहेंगे।'
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत फलस्तीन को समर्थन करता रहा है। भारत ने 2011 में संयुक्त राष्ट्र में सदस्यता के लिए फलस्तीन के आवेदन का प्रबल समर्थन किया था।
पश्चिमी एशियाई क्षेत्र में करीब 60 लाख भारतीय रहते हैं। इसे देखते हुए मनमोहन सिंह ने फलस्तीन और इस्रायल के बीच शांति वार्ता जल्द शुरू होने के लिए समर्थन जताया और आशा जताई कि दोनों पक्षों के बीच समस्या का व्यापक हल निकले।
मनमोहन सिंह ने कहा, 'राष्ट्रपति महमूद अब्बास मंगलवार नए फलस्तीनी दूतावास का उद्घाटन करेंगे, जिसका निर्माण भारत की सहायता से किया गया है। यह भवन दोनों देशों और दोनों देशों के लोगों के बीच शाश्वत मैत्री का प्रतीक है।'
सिंह ने कहा, 'राष्ट्रपति अब्बास और मैंने क्षेत्रीय घटनाओं, विशेष रूप से पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया है। हमारे विचारों में बहुत समानता है। हम इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्र की समस्याओं को राजनीतिक वार्ता के जरिए और हिंसा तथा बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए और इसके साथ सभी लोगों की उचित आकांक्षाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।'
वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
मनमोहन सिंह ने इस वर्ष फलस्तीन की आर्थिक जरूरतों में मदद के लिए फलस्तीन के बजट में एक करोड़ डॉलर के योगदान की भी घोषणा की।
वार्ता के दौरान सिंह ने एक सम्प्रभुता सम्पन्न, स्वतंत्र और संयुक्त फलस्तीन राज्य, जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो और जिसका इस्रायल के साथ शांतिपूर्ण सम्बंध हो, के लिए भारतीय समर्थन दोहराया।
अब्बास के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'फलस्तीन के हित को समर्थन भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।' उन्होंने कहा, 'भारत ने यूनेस्को में पूर्ण सदस्य का दर्जा प्राप्त करने के फलस्तीन राज्य के प्रयासों को समर्थन देने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हम संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण और बराबरी की सदस्यता के फलस्तीन के प्रयासों को भी समर्थन देते रहेंगे।'
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत फलस्तीन को समर्थन करता रहा है। भारत ने 2011 में संयुक्त राष्ट्र में सदस्यता के लिए फलस्तीन के आवेदन का प्रबल समर्थन किया था।
पश्चिमी एशियाई क्षेत्र में करीब 60 लाख भारतीय रहते हैं। इसे देखते हुए मनमोहन सिंह ने फलस्तीन और इस्रायल के बीच शांति वार्ता जल्द शुरू होने के लिए समर्थन जताया और आशा जताई कि दोनों पक्षों के बीच समस्या का व्यापक हल निकले।
मनमोहन सिंह ने कहा, 'राष्ट्रपति महमूद अब्बास मंगलवार नए फलस्तीनी दूतावास का उद्घाटन करेंगे, जिसका निर्माण भारत की सहायता से किया गया है। यह भवन दोनों देशों और दोनों देशों के लोगों के बीच शाश्वत मैत्री का प्रतीक है।'
सिंह ने कहा, 'राष्ट्रपति अब्बास और मैंने क्षेत्रीय घटनाओं, विशेष रूप से पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया है। हमारे विचारों में बहुत समानता है। हम इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्र की समस्याओं को राजनीतिक वार्ता के जरिए और हिंसा तथा बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए और इसके साथ सभी लोगों की उचित आकांक्षाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।'
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