- मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट तनाव ने PAK की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाला है.
- कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंचने के कारण पाकिस्तान में फ्यूल संकट और महंगाई बढ़ी है.
- PM शहबाज शरीफ ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूल बंद करने और कॉलेज की कक्षाएं ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया है.
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान‑इजरायल संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने पड़ोसी पाकिस्तान की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार पहुंचने के बाद पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहरा गया है. आयात पर निर्भर पाकिस्तान की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे पेट्रोल‑डीजल महंगे हो गए हैं और सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े हैं.
स्कूल बंद, क्लासेज ऑनलाइन: ऊर्जा बचत की कोशिश
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तेल की खपत कम करने के लिए नए नियमों की घोषणा की है. स्कूल दो हफ्ते बंद रहेंगे. कॉलेज‑यूनिवर्सिटी की हायर क्लासेज ऑनलाइन होंगी, ताकि छात्रों और स्टाफ की आवाजाही घटे. सरकारी कार्यक्रम, ऑफिशियल डिनर और इफ्तार पार्टियों पर भी रोक लगाने का फैसला हुआ है.
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रमजान में महंगे हुए फल‑सब्जियां
पाकिस्तान में पहले से ही कमजोर प्राइस कंट्रोल सिस्टम रमजान के दौरान फेल दिख रहा है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार-
- फर्स्ट‑ग्रेड केले का सरकारी रेट PKR 240 था, पर बाज़ार में PKR 300 में बिके.
- अमरूद PKR 145 की जगह PKR 150,
- कंधारी अनार PKR 630 की जगह PKR 700,
- सेब PKR 420 की जगह PKR 450,
- थाई अदरक PKR 280 की जगह PKR 350 तक बेची गई.
कीमतें बढ़ने से लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ रहे हैं.
पेट्रोल‑डीजल की भारी किल्लत?
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है. ईरान‑अमेरिका‑इजरायल संघर्ष के चलते यहां सप्लाई बाधित हुई है. पाकिस्तान की अधिकांश तेल आपूर्ति इसी रूट से होती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर उस पर पड़ा. सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उछाल ने पाकिस्तान में फ्यूल संकट को गहरा दिया, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ गया है.
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मिडिल ईस्ट की जंग का असर
जहां एक तरफ जनता रोजमर्रा की चीजों के लिए महंगाई का बोझ झेल रही है, वहीं देश ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. मिडिल ईस्ट की जंग थमने के आसार नजर नहीं आते, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की परेशानियां आगे भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दाने‑दाने को तरसता पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय जंग की मार से और भी कमजोर होता जा रहा है.
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