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F-35B फाइटर जेट, कम से कम 15 जंगी जहाज... ट्रंप की सेना ने होर्मुज को कैसे चक्रव्यूह में घेर दिया है? 

US blockade of Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी लगा दी है. यह फैसला पाकिस्तान में हुए लंबे (मैराथन) बातचीत के बाद लिया गया, जिसमें कोई समझौता नहीं हो पाया.

F-35B फाइटर जेट, कम से कम 15 जंगी जहाज... ट्रंप की सेना ने होर्मुज को कैसे चक्रव्यूह में घेर दिया है? 
US blockade of Strait of Hormuz: अब अमेरिका ने होर्मुज की नाकेबंदी की

US blockade of Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बनी है और अब अमेरिकी सेना ने भी होर्मुज की नाकेबंदी कर दी है. अमेरिका की नौसेना इस समय मिडिल ईस्ट क्षेत्र में कम से कम 15 जंगी जहाजों के साथ मौजूद है. इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और 11 डेस्ट्रॉयर (युद्धपोत) शामिल हैं. ये जहाज ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी में हिस्सा ले सकते हैं. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी एक अमेरिकी अधिकारी ने दी है. यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद उठाया गया है.

हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि कौन-कौन से जहाज नाकाबंदी में हिस्सा लेंगे, क्योंकि पहले की जानकारी के अनुसार ये जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर फैले हुए हैं.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की ताकत

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तैनात बेड़े में एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ 11 डेस्ट्रॉयर शामिल हैं. इनमें यूएसएस बैनब्रिज, यूएसएस थॉमस हडनर, यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस डेलबर्ट डी. ब्लैक, यूएसएस जॉन फिन, यूएसएस माइकल मर्फी, यूएसएस मिट्शर, यूएसएस पिंकनी, यूएसएस राफेल पेराल्टा, यूएसएस स्प्रुएंस और यूएसएस मिलियस शामिल हैं. इसके अलावा, ट्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी तैनात है, जिसमें यूएसएस ट्रिपोली, यूएसएस न्यू ऑरलियन्स और यूएसएस रशमोर शामिल हैं.

इस नौसैनिक बेड़े के साथ कई सपोर्ट (सहायता) और सुरक्षा देने वाले जहाज भी हैं. लेकिन नाकाबंदी के लिए सही जगह तक पहुंचने के लिए इन्हें या तो स्वेज नहर से गुजरना होगा या फिर भूमध्य सागर से निकलकर अफ्रीका के चारों ओर घूमकर जाना होगा.

यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने X पर एक पोस्ट में बताया है, "यूएसएस ट्रिपोली (एलएचए 7) अरब सागर में घूमते समय रात्रि उड़ान संचालन कर रहा है. ट्रिपोली को पारंपरिक वेल डेक के बिना डिजाइन किया गया है. इसकी वजह से इसपर अधिक एफ-35बी लाइटनिंग II स्टील्थ लड़ाकू विमानों, एमवी-22 ऑस्प्रे, हेलीकॉप्टर और अतिरिक्त रखरखाव स्थान की अनुमति मिलती है. पीक ऑपरेशन के दौरान, जहाज 20+ एफ-35बी तक का समर्थन करने के लिए बढ़ सकता है."

पर्शियन गल्फ में कोई तैनाती नहीं?

वहीं एपी की रिपोर्ट के अनुसार एक डिफेंस अधिकारी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में U.S. नेवी के 16 वॉरशिप हैं, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन भी शामिल है. एक दूसरे डिफेंस अधिकारी ने कहा कि पर्शियन गल्फ में कोई भी अमेरिकन वॉरशिप नहीं है, जो ईरान के कोस्टलाइन का ज़्यादातर हिस्सा है. दोनों ने नाम न बताने की शर्त पर सेंसिटिव मिलिट्री ऑपरेशन पर बात की. इंटरनेशनल कानून के तहत, नाकेबंदी को बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाना चाहिए. लीगल एक्सपर्ट यह भी देखेंगे कि क्या U.S. ईरान तक मानवीय मदद पहुंचने देता है.

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के नेशनल सिक्योरिटी लॉ प्रोग्राम के डायरेक्टर और रिटायर्ड नेवी कैप्टन टॉड हंटले ने कहा, "इसे कैसे किया जाता है, इससे तय होगा कि यह कानूनी है या नहीं." 

होर्मुज की नाकेबंदी

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी लगा दी है. यह फैसला पाकिस्तान में हुए लंबे (मैराथन) बातचीत के बाद लिया गया, जिसमें कोई समझौता नहीं हो पाया. यह बढ़ता हुआ सैन्य दबाव उस समय आया है जब क्षेत्रीय संकट को सुलझाने की ऊंचे स्तर की कूटनीतिक कोशिशें असफल हो गईं. अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट तेहरान (ईरान की राजधानी) का परमाणु हथियार बनाने का इरादा है. उन्होंने कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा.”

बीते वीकेंड की असफल बातचीत पर बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “हम कई बातों पर सहमत हुए थे, लेकिन वे उस बात पर सहमत नहीं हुए. मुझे लगता है कि वे मान जाएंगे. मुझे लगभग पूरा भरोसा है, बल्कि मैं पूरी तरह से यकीन में हूं.” ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “अगर वे सहमत नहीं होते, तो कोई समझौता नहीं होगा. कभी भी समझौता नहीं होगा.”

परमाणु कार्यक्रम रोकने के अलावा, अमेरिका की प्राथमिकता ईरान के पास मौजूद समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम को वापस लेना भी है. राष्ट्रपति ने कहा, “हम उसे वापस लेंगे. हम उसे उनसे वापस लेंगे या फिर खुद ले लेंगे.” स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि ट्रम्प ने पिछले हफ्ते दो हफ्ते का युद्धविराम (सीजफायर) घोषित किया था. लेकिन पाकिस्तान में शांति वार्ता कमजोर पड़ने के बाद, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की कि ईरान परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर युद्धविराम खत्म होने तक समझौता नहीं हुआ, तो “उनके लिए अच्छा नहीं होगा.”

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