
- फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र मान्यता देने का निर्णय लिया, जिससे इजरायल नाराज.
- इजरायल और अमेरिका ने इस कदम पर नाराजगी जताई और इसे चरमपंथियों को प्रोत्साहित करने वाला बताया गया.
- गाजा में जारी युद्ध में अब तक साठ हजार से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है.
फिलिस्तीन को एक आजाद देश के तौर पर मान्यता देने के फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निर्णय के बाद अन्य पश्चिमी देशों ने भी इसी प्रकार के कदम उठाए जिसे लेकर इजरायल और उसके सहयोगी अमेरिका में नाराजगी है. इस फैसले ने गाजा में जारी विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों के केंद्र में दो-राष्ट्र समाधान को एक बार फिर से ला खड़ा किया. पिछले हफ्ते इजरायली के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लिखे एक पत्र में राष्ट्रपति मैक्रों ने लिखा, 'फिलिस्तीनी जनता को उनका अपना राष्ट्र दिलाने के हमारे संकल्प की जड़ें इस विश्वास से जुड़ी हैं कि स्थायी शांति इजरायल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है.'
क्यों लिखा मैक्रों की चिट्ठी में
मैक्रों ने कहा, 'फ्रांस के कूटनीतिक प्रयास गाजा में उस भयावह मानवीय आपदा पर हमारे आक्रोश से उत्पन्न हुए हैं, जिसका कोई औचित्य नहीं हो सकता.' इजरायल ने शुक्रवार को गाजा के सबसे बड़े शहर को युद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के साथ शुरू हुए युद्ध में अब तक 63,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई है.
अब क्या करेंगे नेतन्याहू
फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और माल्टा ने कहा है कि वे 23 सितंबर से शुरू हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक के दौरान फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के अपने संकल्प को औपचारिक रूप देंगे. न्यूजीलैंड, फिनलैंड और पुर्तगाल सहित कुछ अन्य देश भी इसी तरह के कदम पर विचार कर रहे हैं. नेतन्याहू ने फिलिस्तीन देश का दर्जा अस्वीकार कर दिया है और वह गाजा में सैन्य अभियान बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. इजरायल और अमेरिका का कहना है कि फिलिस्तीन को मान्यता देने से चरमपंथियों का हौसला बढ़ता है.
क्या सोचते हैं एक्सपर्ट्स
पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय एवं सामरिक संबंध संस्थान के निदेशक और भू-राजनीति विशेषज्ञ पास्कल बोनिफेस ने कहा कि इस तरह की नाराजगी भरी प्रतिक्रिया बताती है कि 'प्रतीक मायने रखते हैं'. उन्होंने कहा, 'कूटनीतिक रास्ते, जहां दो-राज्य समाधान बहस के केंद्र में है, और जमीनी हालात के बीच समय के खिलाफ एक तरह की दौड़ चल रही है, जो हर दिन इस दो-राज्य समाधान को थोड़ा और जटिल या असंभव बना रहा है.'
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