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पहले अंडा या पहले मुर्गी? वैज्ञानिकों ने दे दिया जवाब, विशालकाय विलुप्त पक्षी को फिर से धरती पर लाने की कोशिश

Chicken or an egg, What came first: एक रिसर्च कंपनी ने कृत्रिम माहौल में जिंदा चूजों को जन्म दिया है. इसकी मदद से वह भविष्य में ऐसे विलुप्त पंक्षी को वापस लाना चाहते हैं जिनके अंडे मुर्गी के अंडों से 80 गुना बड़े होते थे.

पहले अंडा या पहले मुर्गी? वैज्ञानिकों ने दे दिया जवाब, विशालकाय विलुप्त पक्षी को फिर से धरती पर लाने की कोशिश
वैज्ञानिकों ने बिना असली अंडे के लैब में छोटे-छोटे चूजे पैदा कर दिए है(फोटो- Colossal Biosciences)
  • Colossal Biosciences कंपनी ने बिना असली अंडे के कृत्रिम 3डी प्रिंटेड ढांचे में 26 जिंदा चूजे पैदा किए हैं
  • कंपनी का उद्देश्य विलुप्त पक्षी जैसे न्यूजीलैंड के जायंट मोआ को कृत्रिम अंडा तकनीक से फिर जिंदा करना है
  • अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक प्रभावशाली है लेकिन वास्तविक विलुप्त जीवों को वापस लाना संभव नहीं होगा
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पहले अंडा आया या मुर्गी?... सदियों से लोगों के बीच यह सवाल मजाक और बहस का हिस्सा रहा है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसा एक्सपेरिमेंट किया है, जिसने इस पुराने सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है. वैज्ञानिकों ने बिना असली अंडे के लैब में छोटे-छोटे चूजे पैदा कर दिए है. यह दावा करने वाली कंपनी अब ऐसे पंक्षियों को वापस लाने की कोशिश कर रही है, जो हजारों साल पहले धरती से खत्म हो चुकी हैं. चलिए आपको पूरी बात समझाते हैं.

बिना अंडे के निकले चूजे

एक बायोटेक कंपनी Colossal Biosciences ने मंगलवार को कहा कि उसने कृत्रिम माहौल में जिंदा चूजों को जन्म दिया है. एपी की रिपोर्ट है कि कंपनी के मुताबिक 26 छोटे चूजे पैदा हुए हैं. इनमें कुछ चूजे कुछ दिन के हैं, जबकि कुछ कई महीने के हो चुके हैं. इन चूजों को 3डी प्रिंटेड ढांचे में तैयार किया गया, जो अंडे के छिलके जैसा काम करता है. इससे पहले भी कंपनी दावा कर चुकी है कि उसने जेनेटिक बदलाव करके ऐसे जानवर बनाए हैं, जो विलुप्त प्रजातियों जैसे दिखते हैं. इनमें ऊनी मैमथ जैसे लंबे बालों वाले चूहे और डायर वुल्फ जैसे दिखने वाले भेड़िये के बच्चे शामिल हैं.

बिना अंड के निकले चूजे (फोटो- Colossal Biosciences)

बिना अंड के निकले चूजे (फोटो- Colossal Biosciences)

रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के सीईओ बेन लैम ने कहा कि भविष्य में इस कृत्रिम अंडा तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसे पक्षी बनाए जा सकते हैं, जो न्यूजीलैंड के विलुप्त “साउथ आइलैंड जायंट मोआ” जैसे दिखें. मोआ के अंडे मुर्गी के अंडों से 80 गुना बड़े होते थे और आज का कोई पक्षी इतने बड़े अंडे नहीं दे सकता. बेन लैम ने कहा, “हम ऐसी चीज बनाना चाहते थे, जिसे प्रकृति ने पहले से बहुत अच्छी तरह बनाया है, लेकिन हम उसे और बेहतर, बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने लायक और ज्यादा प्रभावी बनाना चाहते हैं.”

न्यूजीलैंड के म्यूजियम में विलुप्त “साउथ आइलैंड जायंट मोआ” की मूर्ति

न्यूजीलैंड के म्यूजियम में विलुप्त “साउथ आइलैंड जायंट मोआ” की मूर्ति

हालांकि दूसरे वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक प्रभावशाली जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह कृत्रिम अंडा नहीं कहा जा सकता. उनका कहना है कि विलुप्त जीवों को वापस लाना शायद संभव नहीं है. विन्सेंट लिंच ने कहा, “हो सकता है कि वे इस तकनीक से जेनेटिक बदलाव वाला पक्षी बना लें, लेकिन वह सिर्फ बदला हुआ पक्षी होगा. वह असली मोआ नहीं होगा.”

कैसे काम करती है यह तकनीक

चूजों को पैदा करने के लिए कंपनी के वैज्ञानिकों ने फर्टिलाइज्ड अंडों के अंदर का हिस्सा कृत्रिम सिस्टम में डाला और उसे इनक्यूबेटर में रखा. उन्होंने कैल्शियम भी डाला, जो आमतौर पर अंडे के छिलके से मिलता है. इसके साथ ही उन्होंने भ्रूण कैसे बढ़ रहा है, इसको रियल टाइम में देखा.

वैज्ञानिकों का कहना है कि कंपनी ने ऐसा कृत्रिम अंडे का छिलका बनाया है, जिसमें एक झिल्ली है. यह असली अंडे की तरह सही मात्रा में ऑक्सीजन अंदर जाने देती है. लेकिन अंडे के दूसरे जरूरी हिस्से इसमें नहीं थे. जैसे वे अस्थायी अंग, जो बढ़ते हुए चूजे को पोषण देते हैं, उसे सुरक्षित रखते हैं और गंदगी बाहर निकालते हैं. विन्सेंट लिंच ने कहा, “यह कृत्रिम अंडा नहीं है, क्योंकि बाकी सारे हिस्से आपने बाहर से डाले हैं. यह सिर्फ कृत्रिम अंडे का छिलका है.”

पिछले कई दशकों में वैज्ञानिक पहले भी साधारण तकनीक से पारदर्शी अंडे के छिलके बना चुके हैं, जिनमें प्लास्टिक की फिल्म या थैली से चूजे पैदा किए गए थे. ऐसी तकनीक का इस्तेमाल मुर्गियों के विकास को समझने और दूसरे जानवरों व इंसानों पर रिसर्च में मदद के लिए किया जाता है.

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