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जनता कंगाल, कंपनियां बेहाल, आर्थिक पतन का साल... क्या दिवालिया की तरफ बढ़ रहा है पाकिस्तान?

Economic Crisis in Pakistan: एक्सपर्ट का मानना है कि रेमिटेंस पर बढ़ती पाकिस्तान की निर्भरता एक मीठा जहर साबित हो सकती है. यह पैसा निवेश के बजाय रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो रहा है.

जनता कंगाल, कंपनियां बेहाल, आर्थिक पतन का साल... क्या दिवालिया की तरफ बढ़ रहा है पाकिस्तान?
  • पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर जनसंख्या वृद्धि दर से कम होने के कारण प्रति व्यक्ति उत्पादन घट रहा है
  • पाकिस्तान में अमीर और गरीब के बीच आय का अंतर लगातार बढ़ रहा है और गरीबी बढ़ती जा रही है
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में रेमिटेंस का स्तर देश के कुल निर्यात से अधिक पहुंच गया है
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Economic Crisis in Pakistan: पाकिस्तान इस समय एक अजीबोगरीब आर्थिक समस्या से गुजर रहा है. एक तरफ जहां सरकार मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी और रिकॉर्ड रेमिटेंस का दावा कर रही है, वहीं, दूसरी ओर रियल इनकम में गिरावट और बढ़ती इनक्वलिटी ने देश को फेलिंग स्टेट की कगार पर खड़ा कर दिया है.

ग्रोथ रेट बनाम जनसंख्या

हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट औसतन 2.47% रही है, जबकि देश की जनसंख्या वृद्धि दर 2.55% है. इसका सीधा मतलब यह है कि प्रति व्यक्ति उत्पादन बढ़ने के बजाय घट रहा है. आम पाकिस्तानी की आर्थिक स्थिति सुधरने के बजाय और खराब हुई है.

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Photo Credit: ai image

बढ़ी अमीरी-गरीबी की खाई

भले ही 2018 के बाद से परिवारों की नॉमिनल इनकम दोगुनी हुई हो, लेकिन पिछले 50 सालों की महंगाई ने इस दोगुनी हुई इनकम को खत्म कर दिया है. पाकिस्तान में अमीर और अमीर हो रहा है, गरीब और गरीब होता ज रहा है. शहरी इलाकों में अमीर परिवारों की औसत आय जहां 1,46,920 रुपये है, वहीं, सबसे गरीब परिवारों की आय 42,412 रुपये है. लगभग तीन गुना से ज्यादा का अंतर साफतौर पर देखा जा सकता है. एक आंकड़ा और जानिए, हाई क्लास की इनकम में जहां 119% का इजाफा हआ, वहीं गरीबों के लिए यह आंकड़ा केवल 80% रहा.

निर्यात से ज्यादा रेमिटेंस

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब कमाई से ज्यादा मदद पर टिकी है. फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में रेमिटेंस रिकॉर्ड 38.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो देश के कुल निर्यात (32.3 अरब डॉलर) से भी कहीं ज्यादा है. एक्सपर्ट का मानना है कि रेमिटेंस पर बढ़ती निर्भरता एक मीठा जहर साबित हो सकती है. यह पैसा निवेश के बजाय रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो रहा है. इससे स्थानीय उद्योगों और उत्पादकता में सुधार नहीं हो पा रहा है. इससे हुआ यह है कि युवा अपनी स्किल बढ़ाने की बजाय विदेश जाने में लगे हुए हैं, जिससे लोकल मार्केट कमजोर हो रहे हैं.

शिक्षा और पुरानी नीतियां

इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की इस हालात के दो अहम वजह बताईं गईं हैं. पहली वजह है एजुकेशन पर कम खर्च, ओल्ड सिलेबस और स्किल ट्रेनिंग की कमी से युवा आबादी बोझ बनती जा रही है. दूसरी बड़ी वजह सीपेक. चीन के निवेश (CPEC) को गेम चेंजर बताया गया था, लेकिन डिमांड बेस्ड यह मॉडल फेल रहा. अब इसके बाद एस्कपर्ट सप्लाई साईड अर्थशास्त्र अपनाने की सलाह दे रहे हैं, जिसमें टैक्स डिडक्शन, प्राइवेटाइजेशन और फ्री ट्रेड शामिल है.

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