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This Article is From Jan 13, 2026

ये सेहत के लिए ठीक नहीं... इस्लामाबाद में 29 हजार पेड़ काटने पर बवाल के बीच सरकार की अजब दलील

पाकिस्तान सरकार में गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली में बताया कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (आईसीटी) से 29,115 पेड़ हटाए गए हैं.

ये सेहत के लिए ठीक नहीं... इस्लामाबाद में 29 हजार पेड़ काटने पर बवाल के बीच सरकार की अजब दलील
  • पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 29 हजार से ज्यादा पेड़ काट दिए गए हैं, जिसे लेकर विवाद हो गया है
  • मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली में कहा कि ये पेड़ सेहत के लिए ठीक नहीं थे. एलर्जी फैला रहे थे
  • विपक्षी नेताओं ने सरकार पर राजधानी को 'लंग्स विहीन' करने का आरोप लगाया और जवाबदेही की मांग की है

पेड़ धरती की ऐसी अनमोल नेमत हैं, जिनके बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है. लेकिन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 29 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटे जाने के लिए सरकार ने जो वजह बताई, उसे सुनकर आप भी माथा पीट लेंगे. इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने पर बवाल के बीच विपक्षी दल और आम जनता जहां इसे हरियाली की हत्या बता रहे हैं, वहीं सरकार के मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली में कहा, "वो सेहत के लिए ठीक नहीं थे!" सरकार का दावा है कि ये पेड़ एलर्जी फैला रहे थे, इसलिए उन्हें हटाना ज़रूरी था. 

पेड़ काटने पर संसद में जमकर हंगामा

इस्लामाबाद में 29 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जाने का मुद्दा सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से गर्माया हुआ है. लोग पेड़ काटने का विरोध कर रहे हैं. मंगलवार को इस मुद्दे पर पाकिस्तानी संसद में खूब हंगामा हुआ. विपक्ष ने हुक्मरानों पर राजधानी को 'लंग्स विहीन' करने का आरोप लगाया तो सरकार के मंत्रियों ने उन्हें सेहत के लिए सही न होने का अजीबोगरीब दावा किया.

मंत्री ने बताया, क्यों काटे गए पेड़

मीडिया आउटलेट डॉन के मुताबिक, गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली में बताया कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (आईसीटी) से 29,115 पेड़ हटाए गए हैं. उन्होंने सफाई दी कि इनके बदले आगामी महीनों में ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे. इससे पहले, क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने दावा किया था कि पेपर मलबेरी के करीब 29 हजार पेड़ों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत काटा गया है, जो 2023 और 2025 में जारी किया गया था. 

मंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि ये पेड़ एलर्जी फैला रहे थे और स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन रहे थे. इसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही थी. उन्होंने कहा कि काटे गए हर पेड़ के बदले तीन नए पौधे या पेड़ लगाए जाएंगे ताकि शहर की ग्रीन बेल्ट प्रभावित न हो. पर्यावरणीय सुधार के लिए परिपक्व देशी पेड़ भी लगाए जाएंगे. 

50-60 साल पुराने पेड़ क्यों काटे, विपक्ष ने पूछा

पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के अली मुहम्मद खान और पीपीपी की शाजिया मरी ने इस्लामाबाद में पेड़ काटने का मुद्दा जोरशोर से उठाया. अली ने सवाल किया कि अगर सिर्फ जंगली शहतूत के पेड़ों को हटाया जा रहा था तो 50-60 साल पुराने पेड़ भी क्यों हटाए गए? शाजिया मरी ने कहा कि विभिन्न इलाकों से खबरें आ रही हैं कि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं. भले ही आप यह कहकर इसे सही ठहरा रहे हैं कि पर्यावरण के लिए हानिकारक एक खास प्रजाति के पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन फिर जवाबदेही से क्यों भाग रहे हैं?

शाजिया मरी ने असली सच्चाई सामने लाने और भरपाई के लिए लगाए जाने वाले पेड़ों का आंकड़ा देने की मांग की. उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को आगे की बहस के लिए एनए की जलवायु परिवर्तन स्थायी समिति को भेजा जाए. अली का कहना था कि अगर गृह मंत्रालय, इस्लामाबाद प्रशासन या जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस्लामाबाद के नागरिकों को भरोसे में लेकर पेड़ काटे होते, तो उनमें अविश्वास नहीं फैलता. सांसद ने कहा कि आपने जो पेड़ काटे हैं, वो इस्लामाबाद के लिए फेफड़े की तरह काम करते थे. 

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