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क्या अब यूरोप के देशों में अपनी मर्जी के पीएम और राष्ट्रपति चाहते हैं ट्रंप?

अमेरिका की नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहा गया था कि यूरोप में "सभ्यता के मिट जाने" का खतरा है. साथ ही, इसमें "देशभक्त यूरोपीय पार्टियों" के बढ़ते प्रभाव की तारीफ भी की गई.

क्या अब यूरोप के देशों में अपनी मर्जी के पीएम और राष्ट्रपति चाहते हैं ट्रंप?
ट्रंप ने यूरोप के लिए MAGA फंड की घोषणा की है.
  • जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका द्वारा जर्मन चुनावों में हस्तक्षेप की योजना का कड़ा विरोध किया है
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने यूरोप को फंडिंग देने के लिए तीन मिलियन डॉलर तक की ग्रांट योजना शुरू की है
  • यह फंडिंग योजना संप्रभुता, प्रवासन, सेंसरशिप जैसे मुद्दों पर समान विचारधारा वालों को समर्थन देने के लिए है

बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों में हाल ही में शेख हसीना और इमरान खान की सरकारें गिर गईं. एक को देश छोड़ना पड़ा तो दूसरे अभी जेल में हैं. इन दोनों सरकारों के गिरने के पीछे अमेरिका का नाम आया. हालांकि, ये साबित नहीं हुआ. मगर अब यूरोप ऐसा ही आरोप लगा रहा है. वो भी यूरोप का सबसे धनी देश. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने खुलेआम अमेरिका के इस रवैये का विरोध किया है और साफ चेतावनी दी है कि जर्मनी के चुनावों में हस्तक्षेप मत करें. 

कैसे कर रहा अमेरिका हस्तक्षेप

अमेरिकी विदेश विभाग ने यूरोप में 'MAGA' (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) विचारधारा से जुड़े कामों के लिए फंड देने की योजना की घोषणा की है. इसके तहत यूरोपीय चैरिटी, थिंक-टैंक और व्यक्तियों को 3 मिलियन डॉलर (2.2 मिलियन पाउंड) तक की ग्रांट देने की पेशकश की गई थी. यह फंडिंग उन लोगों के लिए होगी जो साझा राजनीतिक विचारधारा, कानून और हमारी साझा पश्चिमी सभ्यता की विरासत के अनुरूप राष्ट्रीय संप्रभुता, प्रवासन, सेंसरशिप और कानूनी चुनौतियों से निपटने का प्रयास कर रहे हैं. इस बढ़ती चिंता के बीच कि अमेरिका यूरोपीय राजनीति को सीधे प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, मर्ज ने कहा कि वह नहीं चाहते कि अमेरिका सितंबर में होने वाले जर्मन राज्य चुनावों में दखल दे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मर्ज ने कहा, "हम अमेरिकी चुनावों में दखल नहीं देते हैं. इसी तरह, मैं नहीं चाहता कि अमेरिकी सरकार या सरकार से जुड़ी संस्थाएं जर्मन चुनावों में दखल दें."

किसको मिल सकता है फंड

अमेरिका के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यह ग्रांट योजना विदेश विभाग की उस कई महीनों से चल रही कोशिश का हिस्सा है, जिसका मकसद अमेरिकी सरकारी फंड का इस्तेमाल यूरोप में दक्षिणपंथी समूहों और संभवतः राजनीतिक दलों का समर्थन करने के लिए करना है. स्टेट डिपार्टमेंट के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि पैसे पाने के लिए कौन योग्य हो सकता है, इस बारे में भाषा साफ नहीं है. ग्रांट की घोषणा में कहा गया है कि "व्यक्ति" और "सरकारी संस्थान" आवेदन कर सकते हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इन कैटेगरी में कौन या क्या शामिल हो सकता है. पहले की रिपोर्टों से पता चला है कि ट्रंप के दौर में स्टेट डिपार्टमेंट यूरोप में राजनीतिक पार्टियों को फंडिंग देने में दिलचस्पी रखता है, लेकिन विदेशी मदद से जुड़े अमेरिकी कानूनों की वजह से इसमें रुकावट आ सकती है. बुधवार को मर्ज ने बताया कि जर्मनी में विदेश से राजनीतिक पार्टियों को फंडिंग देना गैर-कानूनी है.

ऐसा क्यों कर रहा अमेरिका

स्टेट डिपार्टमेंट के पूर्व अधिकारी ने कहा, "ऐसा लगता है कि स्टेट डिपार्टमेंट यूरोप में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, जिससे दक्षिणपंथी पार्टियों को ऐसे संसाधन मिल रहे हैं जो उन्हें आम तौर पर नहीं मिलते और उन्हें अनुचित फायदा हो रहा है." यह पहल पश्चिमी यूरोपीय देशों में पारंपरिक सहयोगियों पर अमेरिकी नेताओं (जिनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हैं) द्वारा किए गए बड़े हमलों के बाद शुरू हुई है. ये हमले माइग्रेशन, अबॉर्शन और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर किए गए थे. स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारी यूरोप के सामाजिक रूप से रूढ़िवादी समूहों और दक्षिणपंथी पार्टियों के साथ संबंध बनाने में भी जुटे हुए हैं. दिसंबर में, अमेरिका की नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहा गया था कि यूरोप में "सभ्यता के मिट जाने" का खतरा है. साथ ही, इसमें "देशभक्त यूरोपीय पार्टियों" के बढ़ते प्रभाव की तारीफ भी की गई (जो जाहिर तौर पर लोकलुभावन आंदोलनों की ओर इशारा था). जाहिर तौर पर ट्रंप और अमेरिका यूरोप में ऐसे नेता चाहते हैं, जो उनके हिसाब से फैसले लें.

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