- चीन ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करते हुए हर यूनिवर्सिटीज को अलग-अलग खास भूमिकाएं देने का फैसला लिया है
- नए दिशानिर्देशों के तहत यूनिवर्सिटीज को घटती छात्र आबादी और बदलती उद्योग जरूरतों के अनुसार खुद को ढालना होगा
- चीन में उच्च शिक्षा में एडमिशन का रेट तेजी से बढ़ा है, इसलिए जरूरत के हिसाब से यूनिवर्सिटीज को रोल बदलना होगा
चीन में अब हर यूनिवर्सिटी का काम एक जैसा नहीं होगा. उनका टारगेट एक जैसा नहीं होगा. किसी यूनिवर्सिटी का फोकस रिसर्च और नई खोज पर होगा, कोई चीन की तेजी से भागती इंडस्ट्री के लिए लोगों को तैयार करेगी, तो कोई छात्रों को तकनीकी और काम आने वाली स्किल सिखाएगी. दरअसल चीन ने अपनी यूनिवर्सिटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. इसकी वजह देश में घटती छात्र आबादी, नौकरी का बदलता बाजार और तेजी से बदलती इंडस्ट्री की जरूरतें हैं.
चीन में क्या होने जा रहा?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 20 सितंबर को चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति और चीन की कैबिनेट यानी स्टेट काउंसिल के जनरल ऑफिस ने मिलकर उच्च शिक्षा में बदलाव के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. नए नियमों में कहा गया है कि यूनिवर्सिटीज को स्कूली उम्र की आबादी में हो रहे बदलाव के हिसाब से खुद को बदलना होगा. उन्हें एक जैसे तरीके से आगे बढ़ने के बजाय अपनी अलग पहचान और अलग भूमिका बनानी होगी. यानी सबका अपना टारगेट हो. साथ ही उच्च शिक्षा को ज्यादा आपस में जोड़ने और भविष्य के इनोवेटर्स यानी नई खोज करने वाले लोगों को तैयार करने के नए तरीके तलाशने होंगे.
हर यूनिवर्सिटी का अलग काम
चीन ने खास तौर पर यूनिवर्सिटीज को अलग-अलग भूमिका देने पर जोर दिया है. इस रिपोर्ट के अनुसार बड़े और उच्च स्तर के रिसर्च यूनिवर्सिटीज से उम्मीद की जाएगी कि वे देश की बड़ी रणनीतिक जरूरतों में मदद करें. वहीं इंडस्ट्री से जुड़ी यूनिवर्सिटीज को वास्तविक अर्थव्यवस्था और इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने की अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी.
वजह क्या है?
इस रिपोर्ट के अनुसार शंघाई की टोंगजी यूनिवर्सिटी के एजुकेशन इवैल्यूएशन रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर फैन श्यूडी ने कहा कि स्कूली उम्र की आबादी घट रही है और उच्च शिक्षा अब सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रह गई है. भविष्य में ज्यादा लोगों को यूनिवर्सिटी जाने का मौका मिलेगा. इसलिए शिक्षा व्यवस्था को आबादी में हो रहे बदलाव के हिसाब से बदलना जरूरी है.
इस बदलाव के पीछे चीन की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े भी बड़ी वजह हैं. देश में स्कूली उम्र की आबादी अपने चरम पर पहुंचने के बाद तेजी से घटने का अनुमान है. प्री-स्कूल से जूनियर सेकेंडरी तक की आबादी में गिरावट पहले ही शुरू हो चुकी है. 2022 में बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी और दूसरी संस्थाओं के रिसर्चर्स ने जनगणना के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया था कि चीन की कुल स्कूली उम्र की आबादी 2021 के 32.8 करोड़ से घटकर 2035 में करीब 25 करोड़ रह सकती है. यूनिवर्सिटी जाने की उम्र वाली आबादी 2032 में अपने चरम पर पहुंचने का अनुमान है. दूसरी ओर, चीन में उच्च शिक्षा तेजी से बढ़ी है. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2025 में यूनिवर्सिटीज में कुल 4.87 करोड़ छात्र थे. उच्च शिक्षा में कुल मिलाकर एडमिशन का रेट 61.3 प्रतिशत हो गया, जो 2012 के 30 प्रतिशत से दोगुनी से भी ज्यादा है.
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