- चीन में अंडरग्राउंड चर्च आंदोलन में शामिल ईसाई नेताओं और सदस्यों को गिरफ्तार किया जा रहा है
- यायांग चर्च की इमारत को तोड़ा जा रहा है और कई चर्च सदस्यों को हिरासत में लिया गया है
- चीनी सरकार उन चर्चों को खत्म करने का प्रयास कर रही है जो कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाते हैं
क्या उईगर मुसलमानों के बाद चीन की शी जिनपिंग सरकार ईसाइयों के खिलाफ भी अत्याचार कर रही है? चीन में हालत यह है कि वहां समुदाय के लोगों ने ही अंडरग्राउंड चर्च आंदोलन शुरू किया है. अब उन्हें खोज खोजकर निकाला जा रहा, अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार चीन के एक प्रभावशाली प्रोटेस्टेंट चर्च ने कहा है कि ईसाई धर्म के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार किया गया है. अर्ली रेन कोवेनेंट चर्च ने कहा कि पुलिस ने मंगलवार को मध्य चीन के चेंग्दू में घरों और चर्च कार्यालय पर छापा मारने के बाद नौ लोगों को हिरासत में लिया. बुधवार तक पांच को रिहा कर दिया गया था.
चीन में धार्मिक उत्पीड़न पर नज़र रखने वाले NGO चाइनाएड ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि यहां से 1,000 मील से अधिक दूर वानजाउ में, चीनी अधिकारियों ने यायांग चर्च की इमारत को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है. चीन में "अंडरग्राउंड चर्च आंदोलन" (या हाउस चर्च आंदोलन) टर्म उन लाखों ईसाइयों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जो सरकार के अनुमति प्राप्त धार्मिक स्थल के बाहर पूजा करते हैं.
चलिए आपको बताते हैं कि चीन की सरकार ईसाई समुदाय के साथ क्या कर रही है और इसके पीछे की वजह क्या है.
चीन में ईसाई समुदाय के खिलाफ कार्रवाई
- दिसंबर 2025 में, अधिकारियों ने पांच दिनों में वेनझोउ में यायांग चर्च के लगभग 100 सदस्यों को गिरफ्तार किया था. ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, कम से कम 24 सदस्य हिरासत में हैं.
- बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल अक्टूबर में, चीन के सबसे बड़े अंडरग्राउंड चर्चों में से एक - सिय्योन चर्च के 30 नेताओं को सात शहरों में हिरासत में लिया गया था. इस चर्च के संस्थापक एज्रा जिन अभी भी हिरासत में हैं.
- चीनी सरकार ने 2008 में स्थापित अर्ली रेन कॉवेनेंट चर्च को भी सालों से निशाना बनाया है. 2018 में, अधिकारियों ने चर्च पर छापा मारा और संस्थापक पादरी वांग यी और उनकी पत्नी जियांग रोंग को गिरफ्तार कर लिया. इसके कुछ दिनों बाद कम से कम 100 चर्च सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया.
चीन की सरकार ऐसा क्यों कर रही?
ईसाई समूहों का कहना है कि यह कार्रवाई उन चर्चों को खत्म करने के कम्युनिस्ट पार्टी के संकल्प को दर्शाती है जो उसकी विचारधारा से मेल नहीं खाते हैं. चीनी सरकार नास्तिकता को बढ़ावा देती है और जिन धर्मों को मानने की अनुमति है उन्हें भी नियंत्रित करती है. सरकार ने 2018 में कहा था कि देश में 4.4 करोड़ ईसाई हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उस संख्या में वे लोग शामिल हैं या नहीं जो कई अंडरग्राउंड चर्चों में जाते हैं.
कम्युनिस्ट पार्टी ने लंबे समय से ईसाइयों पर केवल सरकार द्वारा मुहर लगाए गए पादरियों के नेतृत्व वाले राज्य-स्वीकृत चर्चों में शामिल होने के लिए दबाव डाला है. लेकिन ईसाई समूहों का कहना है कि अब धड़-पकड़ काफी सख्त हो गई है, गिरफ्तारियां अधिक आम हो गई हैं. चीन में कम से कम दो चर्च नेताओं ने बीबीसी को बताया है कि अधिकारी अनाधिकृत चर्च नेताओं को तेजी से गिरफ्तार कर रहे हैं.
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने धार्मिक स्वतंत्रता पर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया है. 2015 के बाद से जिनपिंग ने "धर्मों के चीनीकरण" का आह्वान किया है. इसके तहत कहा गया कि चीनी संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप ही धार्मिक सिद्धांतों और प्रथाओं को बदलना होगा. पिछले साल, चीन के अधिकारियों ने सभी धर्मों के पादरियों को सोशल मीडिया पर लाइव प्रचार करने, बच्चों के लिए ऑनलाइन गतिविधियों का आयोजन करने और ऑनलाइन धन जुटाने पर तब तक बैन लगा दिया था, जब तक कि इन्हें सरकार द्वारा मंजूरी दिए गए प्लेटफार्मों पर नहीं किया जाता.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं