नार्वे में मौत का तांडव करने वाले हत्यारे एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की हत्या करने की साजिश रची थी। यह साजिश तब रची गई थी जब वह नोबेल पुरस्कार हासिल करने के लिए 2009 में ओस्लो गए थे।
लंदन:
नार्वे में मौत का तांडव करने वाले हत्यारे एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की हत्या करने की साजिश रची थी। यह साजिश तब रची गई थी जब वह नोबेल पुरस्कार हासिल करने के लिए 2009 में ओस्लो गए थे।
समाचार पत्र डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक उसने कार बम से ओबामा की हत्या की योजना बनाई थी।
आतंकवादी ने पिछले साल जुलाई में ऐसी ही एक योजना में ओस्लो में सरकारी भवनों पर हमला किया था, जिसमें 77 लोगों की मौत हो गई थी। उटोया द्वीप पर उसने सरकारी भवनों पर बम से हमला करने के बाद एक युवा शिविर पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थी।
उसने पुलिस को बताया कि उसने प्रतीक स्वरूप नोबेल पुरस्कार समारोह पर भी बम से हमला करने की योजना बनाई थी, क्योंकि इसे दुनिया भर में देखा जा रहा था। लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण बम को वहां ले जाना कठिन समझते हुए उसने योजना टाल दी थी।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक उसने अल कायदा द्वारा बम हमलों में अपनाए गए तरीकों से प्रेरणा ली थी। ब्रेविक के खिलाफ 16 अप्रैल को सुनवाई शुरू होगी। उसने 77 लोगों की हत्या की बात कबूल की है। लेकिन उसने कहा कि उसके देश वासियों को पश्चिम और इस्लाम के बीच होने वाले एक सम्भावित युद्ध से सावधान करने के लिए यह जरूरी था।
समाचार पत्र डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक उसने कार बम से ओबामा की हत्या की योजना बनाई थी।
आतंकवादी ने पिछले साल जुलाई में ऐसी ही एक योजना में ओस्लो में सरकारी भवनों पर हमला किया था, जिसमें 77 लोगों की मौत हो गई थी। उटोया द्वीप पर उसने सरकारी भवनों पर बम से हमला करने के बाद एक युवा शिविर पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थी।
उसने पुलिस को बताया कि उसने प्रतीक स्वरूप नोबेल पुरस्कार समारोह पर भी बम से हमला करने की योजना बनाई थी, क्योंकि इसे दुनिया भर में देखा जा रहा था। लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण बम को वहां ले जाना कठिन समझते हुए उसने योजना टाल दी थी।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक उसने अल कायदा द्वारा बम हमलों में अपनाए गए तरीकों से प्रेरणा ली थी। ब्रेविक के खिलाफ 16 अप्रैल को सुनवाई शुरू होगी। उसने 77 लोगों की हत्या की बात कबूल की है। लेकिन उसने कहा कि उसके देश वासियों को पश्चिम और इस्लाम के बीच होने वाले एक सम्भावित युद्ध से सावधान करने के लिए यह जरूरी था।
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