- रूस और बेलारूस की दोस्ती सोवियत संघ के साझा इतिहास और रक्षा-आर्थिक निर्भरता पर आधारित है
- फरवरी 2022 में बेलारूस ने रूस को अपनी जमीन से यूक्रेन पर हमला करने की अनुमति देकर महत्वपूर्ण सैन्य सहयोग दिया
- बेलारूस ने रूस को अपने क्षेत्र में परमाणु हथियार रखने की अनुमति दी, जिससे वह रूस का सबसे भरोसेमंद साथी बना
अमेरिका इजरायल की दोस्ती सबसे गाढ़ी मानी जाती है. आज ही ट्रंप ने अपने सोशल ट्रूथ पर लिखा कि चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के एक महान सहयोगी के रूप में खुद को साबित किया है. वे साहसी, निडर, वफादार और बुद्धिमान हैं, और संघर्ष और तनाव के क्षणों में अपना असली रंग दिखाने वाले अन्य देशों के विपरीत, इजरायल डटकर मुकाबला करता है और जीतना जानता है. रूस के लिए बेलारूस भी कुछ ऐसा ही है. जब कोई रूस के साथ खुलकर खड़ा नहीं होता तब बेलारूस उसके साथ होता है.
रूस-बेलारूस की दोस्ती समझिए
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की दोस्ती भी कम नहीं है. बेलारूस और रूस के बीच संबंध दुनिया के सबसे करीबी और रणनीतिक गठबंधनों में से एक माने जाते हैं, जिसमें बेलारूस ने समय-समय पर रूस का महत्वपूर्ण साथ दिया है. दोनों देशों की दोस्ती मुख्य रूप से सोवियत संघ के दौर की विरासत, साझा इतिहास, और रक्षा-आर्थिक निर्भरता पर टिकी है. उदाहरण के लिए फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के दौरान, बेलारूस ने रूसी सैनिकों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी, जिससे रूस ने उत्तर से यूक्रेन पर हमला किया, जो कीव के सबसे करीब था.

रूस ने दी है बेलारूस को परमाणु सुरक्षा
इसके साथ ही बेलारूस ने रूसी सेना को अपने हवाई क्षेत्रों, मिसाइल लॉन्च पैड और बुनियादी ढांचे का उपयोग करने की अनुमति दी है. रूसी मिसाइलों को बेलारूस में तैनात किया गया है और वहां घायल रूसी सैनिकों का इलाज भी किया गया है. बेलारूस ने अपने देश में रूसी टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन (परमाणु हथियार) रखने की सहमति दी, जिससे वह रूस का सबसे भरोसेमंद साथी बन गया है. 2020 के बेलारूस में चुनाव के बाद विरोध प्रदर्शन हुए, तो पुतिन ने लुकाशेंको का समर्थन किया, जिसके बदले में लुकाशेंको ने रूस की शर्तों पर और निर्भरता स्वीकार की. यूक्रेन की तरह बेलारूस भी कभी सोवियत संघ का हिस्सा था, मगर एक दुश्मन बन गया और दूसरा सबसे करीबी दोस्त.

फिर क्यों ट्रंप से दोस्ती चाहते हैं लुकाशेंको?
तो अचानक बेलारूस अमेरिका की दोस्ती की बात क्यों होने लगी? क्या रूस और बेलारूस अब अलग राह पर निकल पड़े हैं? जवाब हां भी है और ना भी. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए 2025 के अंत में और मार्च 2026 में राजनीतिक कैदियों के एक बड़े समूह को रिहा किया. इसके बदले में, अमेरिका ने बेलारूस पर लगे कुछ प्रमुख प्रतिबंधों में ढील दी है. मार्च 2026 में, अमेरिका ने बेलारूस की पोटाश (उर्वरक) कंपनी और कुछ वित्तीय संस्थानों (जैसे बेलइन्वेस्टबैंक) पर से प्रतिबंध हटा दिए। इसका उद्देश्य ईरान युद्ध के कारण उपजे वैश्विक उर्वरक संकट के बीच अमेरिकी किसानों को राहत देना बताया गया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेलारूसी नेता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें "उच्च सम्मानित" बताया. विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन बेलारूस को रूस के पूर्ण प्रभाव से अलग करने या यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक 'बड़ी डील' के तहत लुकाशेंको से बातचीत कर रहा है.

अमेरिका से क्या चाहता है बेलारूस?
अमेरिका बेलारूस के साथ संबंधों को सुधारकर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बेलारूस अपनी सैन्य अवसंरचना को रूस के रणनीतिक लक्ष्यों से अलग करे. अमेरिका का मुख्य उद्देश्य बेलारूस को रूस से दूर करना है, न कि लुकाशेंको की सत्ता का पूर्ण समर्थन करना. ये बात लुकाशेंको भी समझते हैं. लुकाशेंको ने आरटी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि बेलारूस संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक "बड़े समझौते" के लिए तैयार है, लेकिन यह समझौता दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए. लुकाशेंको ने कहा, "राजनीतिक कैदी, प्रतिबंध... ये तो मामूली बातें हैं. हमारे सामने इससे कहीं बड़े मुद्दे हैं. यह एक बड़े समझौते का विषय है. जैसे ही हम इसे निचले स्तर पर तैयार कर लेंगे, हम ट्रंप से मिलने और इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं." उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखता है तो वे बैठक के लिए तैयार हैं.

क्या रूस से दोस्ती बेलारूस नहीं चाहता?
लुकाशेंको ने संकेत दिया कि ट्रंप मिन्स्क का इस्तेमाल रूस के साथ संबंध स्थापित करने के लिए कर सकते हैं. बेलारूसी नेता ने कहा, "मुझे खुशी होगी अगर डोनाल्ड ट्रंप अंततः हमारी बातचीत और वार्ताओं के पीछे कुछ और देखें. शायद वे रूस के नजरिए से बेलारूस की किसी खास स्थिति की जांच कर रहे हैं. यह सामान्य और तर्कसंगत होगा." उन्होंने कहा कि वाशिंगटन के पास वर्तमान में मॉस्को के साथ समझौता करने का एक अनुकूल अवसर है, खासकर पुतिन के राष्ट्रपति काल में. उन्होंने जोर देकर कहा, "लेकिन आपको यह स्पष्ट रूप से समझना होगा: अगर आप वादा करते हैं, तो आपको उसे पूरा भी करना होगा." लुकाशेंको ने कहा कि ट्रंप से हाथ मिलाने की उनकी इच्छा के बावजूद, अमेरिकी नेता से मिलना उनके लिए कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है. बेलारूसी राष्ट्रपति ने "सम्राट के अधीन रहने" की किसी भी स्थिति को खारिज करते हुए इसे "एक सच्चे राष्ट्रपति की नीति बताया जो अपनी जनता का सम्मान करता है."मतलब साफ है कि बेलारूस रूस की रजामंदी से ही अमेरिका के नजदीक जा रहा है. वो रूस और अमेरिका के संबंधों को सामान्य बनाने में भूमिका निभा रहा है. साथ ही खुद पर लगे प्रतिबंधों को भी इसके जरिए हटाना चाहता है.
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