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बांग्लादेश में भीड़ ने युवक को पीटा, पुलिस ने बचाकर अस्पताल में भर्ती किया, भीड़ ने अस्पताल से घसीटकर मार डाला

बांग्लादेश के सतखीरा में 38 साल के वाहिदुज्जमान शमीम की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी है. शमीम के परिवार का कहना है कि वह पिछले कुछ दिनों से अजीब व्यवहार कर रहा था और मानसिक रूप से ठीक नहीं था. उसे एक साल पहले नशाखुरानी गैंग ने अपना शिकार बनाया था जिसके बाद उसके व्यवहार में बदलाव देखा गया था.

बांग्लादेश में भीड़ ने युवक को पीटा, पुलिस ने बचाकर अस्पताल में भर्ती किया, भीड़ ने अस्पताल से घसीटकर मार डाला
बांग्लादेश में 38 साल के वाहिदुज्जमान शमीम की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी (फोटो- सोशल मीडिया)
  • बांग्लादेश के सतखीरा में भीड़ ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में वाहिदुज्जमान शमीम की पीट-पीटकर हत्या की
  • सोशल मीडिया पर शमीम की ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद इलाके में तनाव और हिंसा फैल गई थी
  • पुलिस ने शमीम को पहले भीड़ से बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन भीड़ ने फिर उसे अस्पताल से निकालकर मारा

बांग्लादेश में अभी जंगलराज चल रहा है. पुलिस के अनुसार बांग्लादेश के सतखीरा में 38 साल के एक व्यक्ति की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी है. उस पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप था. 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट के मुताबिक वाहिदुज्जमान शमीम नाम के इस शख्स को तब निशाना बनाया गया, जब सोशल मीडिया पर उसकी कुछ ऑडियो क्लिप वायरल हो गईं, जिनमें कथित तौर पर 'ईशनिंदा' वाली बातें थीं. डरावनी बात यह थी कि पुलिस ने उसे बचाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया था लेकिन भीड़ ने उसे वहां से भी निकालकर इतना पीटा की उसकी मौत ही हो गई.

बांग्लादेश में क्या हुआ?

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने एक बार शमीम को भीड़ से बचाया और हॉस्पिटल में भर्ती कराया. लेकिन बाद में रात में, वही भीड़ वापस आई और उसे हॉस्पिटल से बाहर निकालकर फिर से पीटा. जल्द ही उसकी हालत बिगड़ गई और दूसरे हॉस्पिटल ले जाते समय उसकी मौत हो गई. सोशल मीडिया पर शमीम की कुछ ऑडियो बातचीत शेयर होने के बाद वह भीड़ के गुस्से का शिकार हो गया. स्थानीय निवासी खैरुल आलम ने बांग्लादेशी अखबार 'प्रोथोम आलो' को बताया कि रिकॉर्डिंग में ऐसी बातें थीं, जिनसे कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं आहत हुईं.

इन ऑडियो क्लिप्स की वजह से इलाके में तनाव फैल गया, जिसके बाद हिंसा हुई. हालांकि, पीड़ित के परिवार का कहना है कि वह पिछले कुछ दिनों से अजीब व्यवहार कर रहा था और मानसिक रूप से ठीक नहीं था. परिवार ने बताया कि कुछ दिन पहले उसने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी.

शमीम के बड़े भाई अब्दुल जलील ने मीडिया को बताया कि एक साल पहले, जगन्नाथ यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल कर चुके शमीम को स्थानीय स्तर पर 'ओग्यान पार्टी' (बेहोश करने वाला गिरोह) के नाम से मशहूर एक गैंग ने अपना शिकार बना लिया था. उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद से ही शमीम के व्यवहार में बदलाव देखा गया था. 

वहीं देभाटा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी एच.एम. शाहीन ने 'प्रथम आलो' को बताया कि शाम करीब 4:40 बजे पुलिस को सूचना मिली कि स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति को पकड़ रखा है और वे उसे पीट रहे हैं. इसके बाद पुलिस ने उसे बचाया और देभाटा उपजिला स्वास्थ्य परिसर में भर्ती कराया. लेकिन रात 8:40 बजे, 200 से 250 लोग अस्पताल पहुंचे और शमीम के इलाज को रोक दिया. उन्होंने पुलिस और हॉस्पिटल कर्मचारियों की बातों को अनसुना कर दिया, शमीम को वहां से ले गए और उसकी पिटाई की.

बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया. लेकिन तब तक शमीम की हालत बिगड़ चुकी थी, जिसके चलते उसे सतखिरा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. हॉस्पिटल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

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