बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार के चार लोगों की लाश उनके घर में मिली है. इस घटना से सनसनी फैल गई. पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है. शुरुआती जांच के बाद पुलिस को गला घोंटकर मारे जाने का शक जताया है. मिली जानकारी के अनुसार यह घटना बांग्लादेश के रंगपुर शहर की है. जहां कल देर रात एक बंद घर में स्कूल के एक रिटायर्ड टीचर, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे के शव मिले. रंगपुर मेट्रोपॉलिटन कोतवाली पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अफसर नजमुल कादर ने बताया कि शव शहर के दासपारा (मछुआपारा) इलाके से रात करीब 11:30 बजे बरामद किए गए.
मृतकों की पहचान रंगपुर जिला स्कूल के रिटायर्ड शिक्षक गणपति चक्रवर्ती (65), उनकी पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती (50), उनकी बेटी आगामी चक्रवर्ती प्रार्थि (23) और बेटे प्रियम चक्रवर्ती (12) के तौर पर हुई है. रंगपुर मेट्रोपॉलिटन CID के इंचार्ज सुबीर चौधरी ने को बताया कि मां और बेटी के शव सीढ़ियों से मिले, जबकि पिता का शव छत पर मिला. उन्होंने बताया कि बेटे का शव बिस्तर के नीचे मिला.
घर का सामान बिखरा हुआ मिला, लूटपाट की आशंका
उन्होंने कहा, "घर का सामान बिखरा हुआ और अस्त-व्यस्त हालत में मिला. अभी तो यह लूटपाट का मामला लग रहा है. हालांकि, जांच पूरी होने तक कुछ भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता." रंगपुर मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिप्टी कमिश्नर और डिटेक्टिव ब्रांच के हेड सनातन चक्रवर्ती ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए रंगपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुर्दाघर भेज दिया गया है.
रंगपुर जिला स्कूल से रिटायर हुए थे गणपति
स्थानीय लोगों के अनुसार, गणपति पिछले साल 31 दिसंबर को रंगपुर जिला स्कूल से रिटायर हुए थे. उनकी बेटी ने इस साल रंगपुर कारमाइकल कॉलेज से इंग्लिश में मास्टर्स डिग्री पूरी की थी, जबकि उनका बेटा रंगपुर ज़िला स्कूल में 5वीं कक्षा का छात्र था.
प्रीतिलता की छोटी बहन पूजा चक्रवर्ती ने को बताया कि उन्होंने आखिरी बार गुरुवार दोपहर अपनी बहन से बात की थी. परिवार के चारों मोबाइल फोन गुरुवार रात से ही बंद थे. उन्होंने कहा, "फोन बंद मिलने के बाद हम शनिवार रात दासपारा आए. घर का मुख्य गेट बंद था और अंदर की सभी लाइटें बंद थीं. बाद में पुलिस आई, ताला तोड़ा और घर में दाखिल हुई, जहां उन्हें शव मिले."
रिश्तेदार ने बताया, 'मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरी बहन और उसके पूरे परिवार की हत्या किसने की, या यह क्यों और कब हुआ. मेरी बहन के पति बहुत अच्छे इंसान थे. उनका कोई दुश्मन नहीं था. उन्होंने दासपारा में एक नया घर बनाया था और वहीं रह रहे थे.'
गणपति की भतीजी सोमा चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार गुरुवार दोपहर अपने अंकल से बात की थी. उन्होंने कहा, "शनिवार रात खबर मिलने के बाद मैं यहां आई और उनका शव देखा. मेरी आंटी, बहन और भाई के शव भी वहीं पड़े थे. मेरे अंकल का कोई दुश्मन नहीं था. स्कूल से रिटायर होने के बाद, उन्होंने होम्योपैथिक डॉक्टर के तौर पर काम करना शुरू किया था."
स्थानीय निवासी सुधांशु चंद्र दास ने बताया कि परिवार पिछले चार वर्षों से इस इलाके में रह रहा था. गणपति ने तीन मंज़िला घर बनवाया था, हालांकि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ था. सुधांशु ने कहा कि चूंकि परिवार इस इलाके में नया था, इसलिए उनके बहुत से लोगों के साथ करीबी रिश्ते नहीं बने थे, हालांकि गणपति मिलनसार और विनम्र स्वभाव के थे.
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