ऑस्ट्रेलिया ने भारत की चोरी हुई प्राचीन कलाकृतियां लौटाने का बड़ा ऐलान किया है. ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने NDTV से बात करते हुए कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया के किसी संग्रहालय में चोरी या गैर-कानूनी तरीके से लाई गई भारतीय कलाकृतियां हैं, तो उन्हें भारत को वापस किया जाएगा. इसके लिए ऑस्ट्रेलिया भारत के कहने का इंतजार भी नहीं करेगा, बल्कि खुद आगे बढ़कर कार्रवाई करेगा.
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान कई भारतीय कलाकृतियां लौटाने का ऐलान किया था. इसके कुछ दिन बाद NDTV के सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर आदित्य राज कौल से बातचीत में टोनी बर्क ने कहा कि यह सिर्फ एक बार का फैसला नहीं है, बल्कि आगे भी ऐसा किया जाएगा. उन्होंने बताया कि कलाकृतियां लौटाने के दो तरीके हैं. पहला, जब ऑस्ट्रेलिया खुद पता लगाए कि कोई कलाकृति गैर-कानूनी तरीके से उसके संग्रहालय में पहुंची है. दूसरा, जब कोई देश अपनी कलाकृति वापस मांगे. बर्क ने कहा कि पहले मामले में ऑस्ट्रेलिया को खुद पहल करनी चाहिए और किसी रिक्वेस्ट का इंतजार नहीं करना चाहिए.
चोरी को स्वीकार नहीं करेगा ऑस्ट्रेलिया- टोनी बर्क
NDTV से बातचीत में टोनी बर्क ने इस सिद्धांत को ऐसे नैतिक नजरिए से पेश किया जो इस मुद्दे पर किसी मौजूदा मंत्री से शायद ही सुनने को मिलता है. उन्होंने कहा, "दुनिया में कोई भी देश ऐसा नहीं होना चाहिए जो चोरी को स्वीकार्य माने... अगर आपके पास कोई ऐसी चीज है जिसे कानूनी तौर पर हासिल नहीं किया गया था, तो उसे अपने पास रखना चोरी है." उन्होंने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के ही इतिहास का एक उदाहरण दिया. भगवान शिव की एक मूर्ति पहले नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया के पास थी. लेकिन अधिकारियों ने यह पाया कि संस्थान का उस पर कोई वैध दावा नहीं है. फिर उसे वापस भारत को दे दिया दी. उन्होंने भहगान शिव की उस मूर्ति की वापसी को उसी सिद्धांत का पालन बताया.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कलाकृतियों का मुद्दा दोनों देशों के बीच बहुत गहरे सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग का बस एक छोटा सा हिस्सा है.
टोनी बर्क ने जब लगान देखा
इसके बाद मंत्री टोनी बर्क ने अपनी एक दिलचस्प याद भी साझा की. उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज एक स्टेडियम कार्यक्रम में शामिल थे, तब वह फिल्म लगान की 25वीं सालगिरह पर रखी गई विशेष स्क्रीनिंग में गए. वहीं उनकी पहली बार एक्टर आमिर खान से मुलाकात हुई. बर्क ने बताया कि उन्होंने पूरी फिल्म देखी. उनके मुताबिक, वह लगान तीसरी या चौथी बार देख रहे थे. उन्होंने इसे एक बेहतरीन फिल्म बताया. उन्होंने कहा कि फिल्म में अलग-अलग धर्म और जाति के लोग मिलकर क्रिकेट खेलते हैं. यही फिल्म का सबसे बड़ा संदेश है कि नफरत और भेदभाव से कोई भी इंसान कभी मजबूत नहीं बनता.
बर्क ने खुद को भारतीय सिनेमा का उत्साही कंज्यूमर बताया और RRR की महत्वाकांक्षा की तारीफ करते हुए तमिल फिल्म अंबे शिवम को किसी भी देश से अपनी अब तक की पसंदीदा फिल्म बताया.
कुल मिलाकर, बर्क से हुई इस बातचीत से पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार भारत को उसकी सांस्कृतिक धरोहर वापस लौटाने को केवल एक राजनयिक शिष्टाचार के रूप में नहीं बल्कि भारत के साथ अच्छे विश्वास के एक ठोस मार्कर के रूप में देखती है. आने वाले महीनों में ऐसी और कलाकृतियां रिटर्न की जाएंगी.
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