डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना हमेशा से डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह काम बेहद आसान होने जा रहा है. चीनी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आधुनिक 'ब्रेन-रीडिंग' AI मॉडल तैयार किया है, जो किसी व्यक्ति में डिप्रेशन के खतरे का अनुमान पूरे चार साल पहले ही लगा सकता है. अगर सही समय पर जोखिम का पता चल जाए, तो सही कदम उठाकर व्यक्ति को डिप्रेशन के गर्त में जाने से बचाया जा सकता है.
दुनियाभर में 33 करोड़ से अधिक लोग पीड़ित
शेन्जेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की तरफ से विकसित यह AI मॉडल डिप्रेशन से निपटने में एक बड़ी क्रांति माना जा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, 'मेजर डिप्रेशिव डिसऑर्डर' आज वैश्विक स्तर पर 33.2 करोड़ से भी अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है. चिंता की बात यह है कि इस मानसिक स्थिति का इलाज बेहद जटिल और लंबा होता है. कई मामलों में जब तक मरीज को डिप्रेशन का एहसास होता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है.
कैसे काम करता है यह AI मॉडल?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने शोधकर्ताओं की टीम के हवाले से बताया है कि यह ब्रेन-रीडिंग AI मॉडल मस्तिष्क की गतिविधियों और उससे जुड़े न्यूरोलॉजिकल डेटा का विश्लेषण करता है. यह मॉडल दिमाग में होने वाले उन सूक्ष्म बदलावों को पकड़ लेता है जो भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का संकेत देते हैं. इसकी मदद से डॉक्टर चार साल पहले ही यह भांप सकेंगे कि किसी व्यक्ति को आगे चलकर डिप्रेशन होने का कितना जोखिम है.
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए वरदान
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि डिप्रेशन के मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले ही प्रिवेंटिव केयर (बचाव के उपाय) दी जा सकेगी. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव, थेरेपी और डॉक्टरी सलाह की मदद से डिप्रेशन को पूरी तरह से रोका जा सकता है. यह खोज ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है.
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