- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग से RAM की कीमतें पिछले साल में लगभग पांच गुना बढ़ गई हैं
- AI डेटा सेंटर भारी मात्रा में RAM, हार्ड ड्राइव और CPU खरीद रहे हैं, इससे फोन की कीमतों में आगे और वृद्धि होगी
- AI डेटा सेंटरों में अत्यधिक बिजली और पानी की खपत होती है, जो पर्यावरण और संसाधनों पर गंभीर दबाव डाल रही है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज हमारी जिंदगी का सबसे एडवांस और बहुत हद तक सस्ता टेक्नोलॉजी टूल लगता है. कई बड़े AI टूल तो फ्री में ही इस्तेमाल हो रहे हैं. लेकिन जरा रुकिए. बिना सब्सक्रिप्शन लिए भी अगर आप AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो क्या वह सच में फ्री है? कहीं ऐसा तो नहीं कि इसकी कीमत आप दूसरी जगह चुका रहे हैं? AI को चलाने वाले विशाल डेटा सेंटर दुनिया भर में बड़ी मात्रा में चिप्स, मेमोरी और दूसरी टेक्नोलॉजी खरीद रहे हैं. इसका असर धीरे-धीरे आप और हम जैसे आम लोगों की जेब तक पहुंच रहा है. यानी AI का बिल सिर्फ वही नहीं भर रहा, जो इसका सब्सक्रिप्शन लेता है. असली कहानी इससे कहीं ज्यादा बड़ी है.
मेमोरी चिप एक साल में 5 गुना महंगा
जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने टॉम्स हार्डवेयर की एक रिपोर्ट शेयर की है. इसके अनुसार पिछले 12 महीनों में RAM की कीमतें लगभग 500% बढ़ी हैं. माना जा रहा है कि साल के बाकी समय में भी ये बढ़ती रहेंगी. 1960 के दशक से लगातार सस्ती होती आ रही इस चीज की कीमतों में आई यह जबरदस्त तेजी से लोग इतने हैरान हैं कि इसे 'RAMpocalypse' (RAM का संकट) कह रहे हैं.
काम की बात: RAM, यानी रैंडम एक्सेस मेमोरी, हर कंप्यूटर का एक जरूरी हिस्सा है. यह कंप्यूटर को डेटा को ठीक से पढ़ने और उस पर काम करने में मदद करती है. काम करने के लिए, आपके CPU को प्रोसेस करने के लिए लगातार जानकारी की जरूरत होती है, और यह जानकारी हार्ड ड्राइव में स्टोर होती है. लेकिन आपकी हार्ड ड्राइव चाहे कितनी भी तेज क्यों न हो, वह इतनी तेज नहीं हो सकती कि CPU को उसका काम ठीक से करने के लिए जरूरी रफ्तार से डेटा दे सके. RAM इन दोनों के बीच काम करती है. यह स्टोरेज से फाइलें निकालती है और उन्हें CPU के काम करने के लिए तैयार रखती है. आपके पास जितनी ज्यादा RAM होगी, उतना ही ज्यादा डेटा स्प्रिंग की तरह तैयार हालत में रखा जा सकेगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके.
RAM की कीमतों में जो अचानक बढ़ोतरी दिख रही है, उसकी एक बड़ी वजह AI डेटा सेंटर हैं. ये डेटा सेंटर बनते ही बड़ी मात्रा में RAM खरीद रहे हैं. इन्वेस्टर्स से मिले भारी फंड के दम पर AI कंपनियों ने दुनिया भर में मौजूद RAM की लगभग पूरी सप्लाई खरीद ली है.
इसी वजह से Apple के CEO टिम कुक को भी चेतावनी देनी पड़ी है कि कीमतें बढ़ना तय है. DRAM और मेमोरी चिप्स की भारी कमी हो गई है. पार्ट्स की बढ़ती लागत के कारण MacBook और iPad की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं, और RAM व स्टोरेज की बढ़ती लागत की वजह से आने वाले iPhone मॉडल की रिटेल कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
RAM सिर्फ फोन और लैपटॉप में नहीं होती. इसका इस्तेमाल गेमिंग सिस्टम, टीवी, कार और कई दूसरी चीजों में भी होता है. हालात इतने खराब हैं कि 2027 में बनने वाली RAM का बड़ा हिस्सा अभी से बिक चुका है. यानी आने वाले समय में RAM और महंगी हो सकती है.
बात सिर्फ RAM की नहीं है
बात सिर्फ फोन, लैपटॉप या ऐसी ही टेक्नोलॉजी की दूसरी चीजों तक सीमित नहीं है. AI डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और पानी भी इस्तेमाल करते हैं. AI डेटा सेंटर में होने वाले काम से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है. इसलिए, उपकरणों को सही रूप से चलाने और महंगे डाउनटाइम से बचने के लिए लगातार कूलिंग की जरूरत होती है. एक मध्यम आकार का डेटा सेंटर उतना ही पानी इस्तेमाल कर सकता है जितना एक छोटा कस्बा, और सबसे बड़ी AI फैसिलिटीज रोजाना 50 लाख गैलन तक पानी की खपत कर सकती हैं- जो 50,000 लोगों वाले शहर के बराबर है.
हम दुनिया भर में पानी की कमी के दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां डिमांस सप्लाई से ज्यादा हो गई है. इसका असर भी तो आम लोगों पर ही होगा. यानी अगले कुछ साल अगर आप कोई टेक सामान न भी खरीदें, तब भी AI की बढ़ती कीमतों से बचना संभव नहीं होगा.
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