World Ugliest Man: दुनिया का सबसे बदसूरत इंसान में शुमार युगांडा के 'गॉडफ्रे बागूमा' (Godfrey Baguma) एक दुर्लभ आनुवांशिकी बीमारी से जूझ रहे हैं. साल 2002 में युगांडा में हुए एक प्रतियोगिता में सबसे बदसूरत इंसान का खिताब अपने नाम करने वाले गॉडफ्रे बागूमा 'सेसाबी' नाम से भी मशूहर हैं. बचपन में भंयकर बीमारी की जद में आए 56 वर्षीय बागूमा को जब दुनिया का सबसे बदसूरत इंसान चुना गया, तो उन्होंने इस खिताब को अपना लिया, जिसने वर्षों तक जिंदा रहने में उनकी मदद की.
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आमतौर पर गर्दन और कंधों से शुरू होती है यह बीमारी
गौरतलब है एफओपी बीमारी से ग्रसित इंसान के शरीर की मांसपेशियां, टेंडन, स्नायु और संयोजी टीशू धीरे-धीरे हड्डियों में परिवर्तित हो जाते हैं. यह प्रक्रिया आमतौर पर गर्दन और कंधों से शुरू होती है और धीरे-धीरे अंगों तक फैलती जाती है. इससे धीरे-धीरे पीड़ित इंसान का चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है और मरीज को खाने और बोलने में बहुत कठिनाई हो सकती है.
खिताब ने बागूमा का खोया हुआ आत्मविश्वास लौटाया
महज 10 साल की उम्र में गालों पर आई अजीब सी सूजन के रूप में दिखाई देने वाली इस दुर्लभ बीमारी का इलाज गॉडफ्रे बागूमा को वयस्क होने पर तब मिला जब युगांडा के म्बारा अस्पताल के डॉक्टरों ने उनका एमआरआई स्कैन किया. TLC के 'मोस्ट एक्सट्रीम ह्यूमन्स' कार्यक्रम में नजर आए गॉडफ्रे ने बताया कि उन्हें मिले दुनिया के सबसे बदसूरत के खिताब ने उनका खोया हुआ आत्मविश्वास लौटाया, जिससे उन्हें जीने की वजह मिली.
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'गोरिल्ला', तो किसी ने 'कुत्ते के सिर' कहकर चिढ़ाया
एक छोटे से गांव में पले-बढ़े बागूमा को अक्सर उनके शारीरिक विकृति को लेकर चिढ़ाया जाता था और विभिन्न अपमानजनक नामों से पुकारा जाता था. कोई उन्हें "गोरिल्ला", तो कोई "कुत्ते के सिर वाला" कहा, लेकिन बागूमा पर लोगों को चिढ़ाने का कोई असर नहीं हुआ और अपनी विकृति को किस्मत समझ कर उन्होंने जीना सीख लिया.
बीमारी के साथ जीने के लिए लिया संगीत का सहारा
दुर्लभ आनुवांशिकी बीमारी के साथ जीने के लिए अभिसप्त बागूमा ने जीने के लिए संगीत का सहारा लिया और उनके जीवन में वह क्षण भी आया जब उन्हें नमांडे केट के रूप में एक जीवनसाथी मिलीं. वर्तमान में बागूमा के छह बच्चे हैं, इसके अलावा बागूमा के पिछले रिश्ते से भी दो बच्चे हैं. बागूमा आज 56 साल के हैं और असहनीय दर्द में भी एक कॉमेडियन के रूप में दूसरों को हंसाते हैं.
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दुर्लभ आनुवंशिक विकार के शिकार 'गॉडफ्रे बागूमा'
Photo Credit: X/Kelechi Duru
आज एक सफल गायक और कॉमेडियन हैं बागूमा
उल्लेखनीय है जिस दुर्लभ बीमारी एफओपी से बागूमा जूझ रहे हैं, उसका कोई इलाज नहीं है. इसे बागूमा की जीवटता ही कहेंगे कि सामाजिक तानों के बीच न केवल उन्होंने सिर उठाकर जीना सीख लिया, बल्कि आज वो एक सफल गायक और कॉमेडियन हैं. बागूमा मानते हैं कि साल 2002 उनके लिए टर्निंग प्वाइंट रहा जब उन्होंने 'दुनिया के सबसे बदसूरत आदमी' की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और खिताब जीता.
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