उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे 179 मदरसों बंद हो गए है राज्य सरकार की सख्ती के बाद ये 107 मदरसे बंद किये गए हैं. बंद हुए मदरसों में सबसे ज्यादा 102 मदरसे हरिद्वार जिले के हैं. इसके बाद उधम सिंह नगर जिले में 55 मदरसे बंद हुए हैं वही नैनीताल में भी 10 मदरसे बंद किए गए हैं. इन मदरसों को बंद करने के पीछे की वजह नियमों की अनदेखी करना है.
179 मदरसे हो चुके हैं बंद
उत्तराखंड में निर्धारित मान्यता एवं शैक्षणिक मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई लगातार की जारी है. प्रदेश में अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है, जबकि तीन मदरसों के प्रबंधकों ने संचालन बंद किए जाने की लिखित सूचना दी है. अब तक कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन बंद कराया गया है. वही 179 मदरसों को बंद किया जा चुका है , उत्तराखंड में 452 मदरसे चल रहे थे जिसमें हरिद्वार में 270 उधर सिंह नगर में 119, नैनीताल में 18 देहरादून में 41 चंपावत में दो अल्मोड़ा में एक और पिथौरागढ़ में एक मदरसा चल रहा था. लेकिन नियमों की अनदेखी और और बिना मान्यता के चलने वाले ऐसे लगभग 179 मदरसों को बंद कर दिया गया है. हरिद्वार में 102 मदरसे बंद किए गए हैं उधम सिंह नगर में 55 मदरसों को बंद किया गया है और नैनीताल में लगभग 10 मदरसों को बंद किया गया है.
Kashipur, Uttarakhand: Administration sealed two allegedly unregistered madrasas following a joint inspection by police, minority affairs and revenue officials. The administration is also verifying registration records of other madrasas in the area pic.twitter.com/6U9077PrMM
— IANS (@ians_india) September 9, 2026
मदरसा बोर्ड समाप्त
उत्तराखंड राज्य में देश में पहला ऐसा राज्य है जिसने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है. उत्तराखंड में 30 जून 2026 को मदरसा को समाप्त हो गया था. जिसके बाद 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को लागू किया गया इस प्राधिकरण में मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मदरसों को संचालन के लिए शिक्षा विभाग से एफिलिएशन लेना अनिवार्य है. वर्तमान समय में 100 से अधिक मदरसों में शिक्षा विभाग से एफिलिएशन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है, जबकि अभी तक 35 मदरसों को शिक्षा विभाग से एफिलिएशन मिलने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिल चुकी है.
बच्चों का रखा जा रहा है ध्यान
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जो मदरसे बंद हुए है, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को आसपास के स्कूलों या फिर पंजीकृत मदरसों में शिफ्ट करने के निर्देश जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों को दिए गए है. ताकि किसी भी बच्चे की शिक्षा इस लीगल प्रक्रिया की वजह से बाधित न हो.
वही, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक मदरसों को इस लिए बंद किया गया क्योंकि मदरसों में नियम और मानक नही पूरे किया जा रहे थे. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि कुछ मदरसे एक कमरे में चल रहे थे तो कुछ मदरसे किसी ओर की जमीन में चल रहे थे इस के अलावा मदरसों की हालत नियमों के मुताबिक ठीक नही थी सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी.
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