उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस ने एक ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है जो खुद को आईपीएस ऑफिसर बातकर लोगों से ठगी करता था और कई लोगों को अपने जाल में फंस लिया था. दरअसल देहरादून पुलिस ने ठगी के आरोप में जिस युवक को गिरफ्तार किया है वह और कोई नहीं बल्कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी का बेटा है.
पूर्व मुख्य सचिव का है बेटा
लोगो को अपने प्रभाव में लेने के लिए खुद को कभी फर्जी आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ सैनिक अधिकारी, रॉ एजेंट, सीआरपीएफ अधिकारी और अन्य एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बातकर अक्सर आरोपी यशवर्धन लोगों से ठगी किया करता था आरोपी यशवर्धन और कोई नहीं बल्कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी एस० रामास्वामी का बेटा है. पुलिस ने आरोपी यशवर्धन से पांच फर्जी आई कार्ड, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस और आर्मी के 25 लोगो, 3 जोड़ी आर्मी और पैरामिलिट्री की वर्दी, तीन फर्जी रिबन एक लैपटॉप और वायरलेस सेट भी बरामद किया गया.
कई लोगों से कर चुका है धोखाधड़ी
पुलिस ने जब पूछताछ कि तो आरोपी यशवर्धन ने बताया कि उसके पिता वरिष्ठ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी है तथा बचपन से उसका सपना अधिकारी बनने का था. बचपन से अपने पिता के साथ रहने के दौरान उसने वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने वाली पावर और सुविधा देखी थी. उसके मन में बचपन से ही वरिष्ठ अधिकारी बनने का सपना था. उसने कई सालों तक यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की किंतु वह परीक्षा में वह सफल नहीं हो पाया. असफलता हाथ लगने पर उसने खुद को फर्जी आईपीएस और अन्य एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों पर अपना रौब झाड़ने लगा. आमलोगों को वह अपने पद का प्रभाव डालकर उनको नौकरी दिलवाने अथवा उनके टेंडर और अन्य काम जल्दी करवाने के नाम पर लाखों रुपए की जालसाजी और धोखाधड़ी करने लगा. उसके बात करने का तरीका तथा उसकी यूनिफॉर्म और फर्जी आई कार्ड देखकर लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लेते थे. इसी का फायदा उठाकर वह सालों से कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है.
यूं पकड़ में आया जालसाज
दरअसल, 08 जुलाई 2016 को देहरादून के निवासी अंशुल उपाध्याय ने थाना राजपुर पर तहरीर दी कि यशोवर्धन नाम के व्यक्ति द्वारा अपने आप को वरिष्ठ अधिकारी बताकर उन्हें होटल जिंजर निकट साईं मंदिर देहरादून में मिलने के लिए बुलाया तथा उनकी दिवंगत माता की स्मृति में उनके नाम पर एक कंपनी का पंजीकरण जल्द करने के एवज में उनसे 15 लाख रुपए की धोखाधड़ी की. प्राप्त तहरीर पर थाना राजपुर पर धारा 318 (4)BNS में मुकदमा दर्ज किया गया. देहरादून के एक अन्य निवासी डॉ० अनुषा ने भी यशोवर्धन के खिलाफ थाना राजपुर पर तहरीर दी गई थी. तहरीर में कहा गया था कि यशोवर्धन नाम के व्यक्ति द्वारा खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए उन्हें अपने फर्जी विजिटिंग कार्ड और आईडी दिखाई गई तथा प्रभाव में लेकर उसको को रक्षा मंत्रालय में डाटा साइंस कंसलटेंट के पद पर नौकरी दिलाने के एवज में धोखाधड़ी कर 4,60,000 रुपए हड़प लिए.
इन शिकायतों के बाद एसएसपी देहरादून द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी के लिए तत्काल थाना राजपुर पर पुलिस टीम का गठन किया गया. गठित टीम ने दोनों मुकदमों में सबूतों को इकट्ठा की. जांच के दौरान पुलिस ने दोनों घटनास्थलों तथा आने जाने वाले मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरो की फुटेज की जांच की. जांच के बाद 16 जुलाई को पुलिस टीम द्वारा धोखाधड़ी की घटना में शामिल अभियुक्त यशोवर्धन को दौराने चेकिंग CSI तिराहा मसूरी रोड से गिरफ्तार किया गया.
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