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यूपी चुनाव में सपा के लिए कितनी जरूरी कांग्रेस, ज्यादा सीट देने पर क्यों 'साइकिल' फंसने का डर

यूपी चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों की रस्साकशी अभी से शुरू हो गई है. लेकिन यह भी सच है कि सपा नहीं चाहेगी कि अलग लड़कर वोटों का बंटवारा किया जाए. वह भी ऐसा वोट जो सपा को परंपरागत रूप से वोट करता रहा है.

यूपी चुनाव में सपा के लिए कितनी जरूरी कांग्रेस, ज्यादा सीट देने पर क्यों 'साइकिल' फंसने का डर
  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर विवाद और टकराव जारी है
  • कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन में सपा को ज्यादा जरूरत है
  • सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कांग्रेस की तुलना बरगद के पेड़ से करते हुए तंज कसा है
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सपा जरूरी है या फिर अखिलेश यादव को हाथ का साथ चाहिए. यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सीट बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है और सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा पर तंज कस दिया है. उनका कहना है कि सपा को ही गठबंधन की ज्यादा जरूरत है. हम यदि उनके साथ थे तो 2024 में उन्हें 37 सीटों पर जीत मिली थी. इस तरह सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी है तो सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा में भी जवाब दिया है. उनका कहना है कि कांग्रेस बरगद के पेड़ जैसी है और उसके नीचे कोई दूसरा दल पनप नहीं सकता.

सपा विधायक ने कहा, 'बरगद के पेड़ के नीचे जो पेड़ निकलते हैं, वो सब पेड़ सूख जाते हैं। कांग्रेस अगर बरगद का पेड़ है तो इसके नीचे कोई भी दल पनप नहीं सकता है। समाजवादी पार्टी आम का पेड़ है, जो आम के पेड़ के पत्ते भी पूजा के काम आते हैं.' इस तरह सपा ने भी कांग्रेस को जवाब दिया है. पर सवाल वही है कि आखिर किसे कितनी जरूरत है? यह बात सही है कि यूपी में मुस्लिम वोट करीब 150 सीटों पर अहमियत रखता है. इसका एक हिस्सा कांग्रेस के साथ भी जाता रहा है. 

सपा की एक मजबूरी, इसलिए कांग्रेस है इतनी जरूरी

ऐसे में सपा नहीं चाहेगी कि अलग लड़कर वोटों का बंटवारा किया जाए. वह भी ऐसा वोट जो सपा को परंपरागत रूप से वोट करता रहा है. यही कारण है कि भले ही यूपी में सपा की ताकत ज्यादा है, लेकिन कांग्रेस को साथ लेकर उसे 1 और 1 मिलकर 11 होने की उम्मीद रहती है. अब सवाल है कि जब कांग्रेस की इतनी अहमियत है तो फिर सपा उसे ज्यादा सीट क्यों नहीं देना चाहती. इसकी वजह 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े भी हैं. सपा ने कांग्रेस को 100 सीटें लड़ने के लिए दी थीं, लेकिन उसे 6 पर ही जीत मिली थी. कांग्रेस को लेकर यूपी में यह राय है कि वह भाजपा के साथ सीधे मुकाबले में नहीं जीत सकती. ऐसी स्थिति में सपा उसे ज्यादा सीटें नहीं देना चाहती.

यह भी देखें: यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस-SP में 'मुस्लिम वोट बैंक' पर महा-जंग, क्‍या टूट जाएगा गठबंधन?

पश्चिम यूपी और अवध में कांग्रेस को क्यों है उम्मीद 

वहीं कांग्रेस के हौसले 2024 में 6 लोकसभा सीटों पर जीत से बढ़ गए हैं. इसके अलावा पश्चिम यूपी की मुस्लिम बेल्ट में अपनी पकड़ का भी हवाला दे रही है. उसे लगता है कि सहारनपुर, गाजियाबाद, मेरठ जैसे शहरों में सपा के साथ गठबंधन में वह मजबूत होगी. इसके अलावा रायबरेली, प्रतापगढ़ समेत अवध के भी कई जिलों में फायदा मिलेगा. वहीं सपा को भी लगता है कि मुस्लिम वोट बैंक पर उसका हक है. इस तरह यह लड़ाई मुस्लिम वोट बैंक को लेकर है तो वहीं सपा की चिंता यह भी है कि आखिर कांग्रेस चुनाव में भाजपा के मुकाबले कितना सफल हो पाएगी. इसके अलावा भविष्य की राजनीति के लिहाज से भी सपा यह नहीं चाहेगी कि कांग्रेस इतनी मजबूत हो कि सरकार बनने की स्थिति में उससे ज्यादा मोलभाव कर सके.

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