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'मेरे ऊपर छिपकली फेंकी गई', KGMU मामले में महिला आयोग उपाध्यक्ष अपर्णा यादव EXCLUSIVE

लखनऊ की मशहूर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में लव जिहाद और धर्मांतरण का मामले में बड़ी खबर आई है. महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अपर्णा यादव ने बताया कि वह डॉ. रमीज़ के मामले को लेकर कल केजीएमयू की वीसी डॉ. सोनिया नित्यानंद से मिलने गई थीं.

  • महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं
  • अपर्णा ने कहा कि जब वो KGMU में गईं तो उनपर छिपकली फेंकवाने की कोशिश की गई
  • अपर्णा यादव ने कहा कि वीसी उनसे मिलने की बजाय 'भाग खड़ी हुईं

लखनऊ के केजीएमयू में लगातार विवादों के बीच महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपर्णा यादव ने बताया कि वह डॉ. रमीज़ के मामले, बिना अनुमति ब्लड बैंक संचालन और अन्य शिकायतों को लेकर कल केजीएमयू की वीसी डॉ. सोनिया नित्यानंद से मिलने गई थीं.

'KGMU में कुछ लोगों को छूट दी जा रही'

अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि वीसी ने जानबूझकर उनसे मिलने से इनकार कर दिया और उनके ऊपर गिरगिट/छिपकिली फेंकवाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि डॉ. रमीज़ मामले में गठित विशाखा कमेटी ने धर्मांतरण के एंगल को जांच में शामिल नहीं किया. अपर्णा ने दावा किया कि केजीएमयू में धर्म विशेष के लोगों को बदमिजाज़ी करने की छूट दी जा रही है.

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'वीसी ने मिलने से किया इनकार'

महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने बताया कि वहां कुछ लोगों ने ‘जय श्री राम' का नारा लगाया, जिस पर आपत्ति हुई, लेकिन उन्होंने सबको शांत कराया. अपर्णा यादव ने कहा कि वीसी उनसे मिलने की बजाय 'भाग खड़ी हुईं.'

अपर्णा ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी सीएम योगी आदित्यनाथ को दी है और राज्यपाल को भी पत्र लिखकर शिकायत की है. अपर्णा ने मांग की कि इस मामले पर सख्त कार्रवाई हो.

गिरफ्तार हुआ डॉक्टर रमीज

बता दें कि इस धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में पुलिस ने आरोपी डॉक्टर रमीज को कल गिरफ्तार किया है. लखनऊ पुलिस ने आरोपी पर 50 हजार का इनाम रखा था और कुर्की के लिए कई उसके घर पर नोटिस भी चस्पा किया था. विशाखा कमेटी की जांच में रमीज को दोषी माना गया था.

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क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में विश्वविद्यालय की विशाखा कमेटी ने आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज़ को दोषी करार दिया था. कमेटी ने अपनी जांच में पाया था कि आरोपी ने शादी की बात छुपाई, पीड़िता का मानसिक उत्पीड़न किया और यौन उत्पीड़न अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया.

विशाखा कमेटी की अध्यक्ष डॉ. मोनिका ने बताया था कि जुलाई 2025 से दोनों के बीच संबंध थे, जिसे आरोपी ने भी स्वीकार किया. जांच में सामने आया कि रिश्ता निजी अपार्टमेंट तक सीमित था और पीड़िता को सितंबर 2025 में पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है.

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बंगाल से पढ़ने आई थी महिला

अभी तक इस मामले में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक पीड़िता जून 2025 में मास्टर्स कोर्स के लिए KGMU आई थी. इसी दौरान उसकी आरोपी से दोस्ती हुई, जो बाद में शादी की बातचीत तक पहुंची. पीड़िता के पिता का आरोप है कि बेटी ने धर्म परिवर्तन से इनकार किया, जिसके बाद उस पर दबाव बढ़ता गया. इसी मानसिक तनाव में पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास भी किया. यह मामला अब विश्वविद्यालयी अनुशासन, महिला सुरक्षा और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर गंभीर बहस का कारण बन गया है.

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