- पिछले साल दिसंबर में हुए थे हिंसक प्रदर्शन
- PFI के 108 सदस्यों को किया गिरफ्तार
- लखनऊ से 14 और बहराइच से 16 लोग अरेस्ट
उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) ने पिछले चार दिनों में राज्य के 13 जिलों से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 108 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का आरोप है कि यह लोग नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में हिंसा फैलाने में शामिल थे. इस संगठन के 25 लोग दिसंबर में गिरफ्तार किए गए थे. UP में 19, 20 और 21 दिसंबर को CAA और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में हिंसा हो गई थी. पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की कई घटनाएं हुईं और इसमें 23 लोगों की जान चली गई थी. पुलिस का दावा है कि इसके पीछे केरल के संगठन PFI का हाथ है. संगठन के 25 लोग उसी वक्त गिरफ्तार किए गए थे.
लखनऊ से 14, सीतापुर से 3, मेरठ से 21, गाजियाबाद से 9, मुजफ्फरनगर से 6, शामली से 7, बिजनौर से 4, बहराइच से 16, कानपुर से 5, गोंडा, हापुड़ और जौनपुर से 1-1 PFI के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में उत्तर प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने बताया कि CAA और NRC को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में दर्ज मामलों के आधार पर PFI से जुड़े सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पिछले चार दिनों में पूरे प्रदेश में एक अभियान चलाया गया. इस अभियान में पूरे प्रदेश में संगठन के 108 सदस्यों की गिरफ्तारी की गई है. बता दें कि PFI केरल का एक मुस्लिम संगठन है, जो लंबे अरसे से कट्टरपंथी सोच को लेकर विवादों में रहा है. PFI की स्थापना 2006 में हुई थी. उसमें 1994 में बने नेशनल डेवलेपमेंट फ्रंट (NDF) का विलय किया गया था.
PFI पर आरोप है कि उसके कई पदाधिकारी पहले 'सिमी' में थे. 2011 में PFI पर केरल के एक प्रोफेसर टीजे जोसेफ की हत्या, उसी साल मैसूर में दो छात्रों की हत्या, 2012 में ABVP के दो छात्र नेताओं सचिन और गोपाल की हत्या और 2013 में केरल के कन्नूर में हथियार ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगा. 2014 में केरल सरकार ने PFI पर 27 CPM कार्यकर्ताओं की हत्या, 86 की हत्या की कोशिश और 106 सांप्रदायिक घटनाओं में शामिल होने का आरोप लगाया.
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UP के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने कहा कि PFI के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस की भी जानकारी ली जा रही है और इसमें केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है. हम लोगों का पहला टारगेट यह है कि इनकी पहचान कर लें और कार्रवाई करें. यह अभियान ऐसा है कि निरंतर चलता रहेगा और इसकी लगातार निगरानी की जाएगी. गिरफ्तार किए गए लोगों को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि UP पुलिस ने बहुत सारे छोटे-मोटे काम करने वालों और रेस्टोरेंट्स में काम करने वाले बंगाली कामगारों को PFI का सदस्य बताकर गिरफ्तार किया है. यही वजह है कि सबूत के अभाव में पकड़े गए लोगों की फौरन जमानत हो रही है.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं